“रोजगार की रणभेरी! पिकाडली कंपनी के गेट पर गूंजा ग्राम अछोली का आक्रोश, ‘स्थानीयों का हक नहीं मिला तो होगी आर-पार की लड़ाई’ — मानिक साहू”
महासमुंद। अछोली ग्राम पंचायत की शांत फिजा इन दिनों नारों की गूंज से कांप रही है। पिकाडली शराब निर्माता कंपनी के मुख्य द्वार पर स्थानीय मजदूरों का आंदोलन अब केवल रोजगार की मांग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह क्षेत्र के युवाओं के अधिकार, सम्मान और भविष्य की लड़ाई का प्रतीक बनता दिखाई दे रहा है। कंपनी के बाहर जुटे ग्रामीण और मजदूर लगातार अपनी मांगों को बुलंद कर रहे हैं। इसी बीच किसान कांग्रेस के जिला अध्यक्ष मानिक साहू आंदोलन स्थल पर पहुंचे और प्रदर्शनकारी मजदूरों के समर्थन में खुलकर खड़े होते हुए कंपनी प्रबंधन को चेतावनी दी कि यदि स्थानीय लोगों के रोजगार के अधिकार की अनदेखी जारी रही तो किसान कांग्रेस सड़क से लेकर प्रशासनिक स्तर तक निर्णायक संघर्ष करेगी।
आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में मौजूद ग्रामीणों और मजदूरों ने रोजगार में प्राथमिकता की मांग दोहराते हुए कहा कि जिस क्षेत्र की जमीन और संसाधनों का उपयोग कर उद्योग संचालित हो रहा है, वहां के लोगों को रोजगार से वंचित करना उचित नहीं है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनके परिवार लंबे समय से रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं।
किसान कांग्रेस जिला अध्यक्ष मानिक साहू ने आंदोलन को संबोधित करते हुए कहा कि स्थानीय युवाओं का रोजगार केवल आर्थिक मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक न्याय का भी प्रश्न है। उन्होंने कहा कि अछोली और आसपास के गांवों के अनेक युवा काम की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं, जबकि उद्योग उनके गांव के समीप संचालित हो रहा है। उनका कहना था कि यदि स्थानीय लोगों को ही रोजगार नहीं मिलेगा तो उद्योग स्थापित होने का वास्तविक लाभ क्षेत्रवासियों तक कैसे पहुंचेगा।
मानिक साहू ने दावा किया कि मजदूरों के साथ हुई चर्चा के दौरान कंपनी प्रबंधन से जुड़े एक अधिकारी श्री शुक्ला ने कथित रूप से कहा कि कंपनी जिसे चाहेगी उसे काम पर रखेगी और जिसे नहीं चाहेगी उसे काम नहीं दिया जाएगा तथा स्थानीय लोगों को रोजगार देना अनिवार्य नहीं है। मानिक साहू ने इस कथित बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यदि ऐसा कहा गया है तो यह स्थानीय लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला विषय है और इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी में बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश और बिहार से आए श्रमिकों को काम दिया जा रहा है, जबकि स्थानीय मजदूर रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मानिक साहू ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी अन्य राज्य के श्रमिकों का विरोध करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि स्थानीय युवाओं को भी रोजगार में उचित प्राथमिकता मिले। उन्होंने कहा कि उद्योगों की सामाजिक जिम्मेदारी होती है कि वे अपने आसपास के क्षेत्र के लोगों के विकास और रोजगार में योगदान दें।
आंदोलन स्थल पर मौजूद कई मजदूरों ने भी अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि वे लंबे समय से कंपनी में रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनका कहना था कि बार-बार आवेदन और संपर्क के बावजूद उन्हें काम नहीं मिल पाया। मजदूरों ने कहा कि वे किसी प्रकार का टकराव नहीं चाहते, बल्कि सम्मानजनक रोजगार और निष्पक्ष अवसर की मांग कर रहे हैं।
मानिक साहू ने कहा कि किसान कांग्रेस इस आंदोलन को केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं बल्कि स्थानीय जनता के अधिकारों की लड़ाई मानती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कंपनी प्रबंधन और संबंधित प्रशासन स्थानीय लोगों की मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं करते हैं तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर जिला प्रशासन, श्रम विभाग तथा राज्य सरकार के समक्ष भी यह मुद्दा मजबूती से उठाया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान कई ग्रामीणों ने कहा कि उद्योग स्थापित होने के समय क्षेत्र के विकास और रोजगार की उम्मीदें दिखाई गई थीं। उनका मानना है कि यदि स्थानीय लोगों को पर्याप्त अवसर नहीं मिलते हैं तो उन उम्मीदों पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। ग्रामीणों ने मांग की कि कंपनी स्थानीय युवाओं के लिए पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया अपनाए और रोजगार से संबंधित स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करे।
आंदोलन स्थल पर वातावरण लगातार जोशीला बना रहा। मजदूरों और ग्रामीणों ने हाथों में तख्तियां लेकर नारे लगाए तथा स्थानीय रोजगार की मांग को लेकर अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। किसान कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी मजदूरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर समर्थन जताया और कहा कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक स्थानीय लोगों को न्याय नहीं मिल जाता।
मानिक साहू ने कहा कि उद्योग और स्थानीय समाज के बीच विश्वास का रिश्ता होना चाहिए। यदि स्थानीय लोगों को यह महसूस होने लगे कि उनके अधिकारों की अनदेखी हो रही है तो असंतोष स्वाभाविक रूप से बढ़ेगा। उन्होंने कंपनी प्रबंधन से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील करते हुए कहा कि टकराव किसी के हित में नहीं है, लेकिन अधिकारों से समझौता भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।
राजनीतिक दृष्टि से भी इस आंदोलन ने जिले में चर्चा का विषय बना दिया है। स्थानीय स्तर पर लोग इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। रोजगार का मुद्दा पहले भी समय-समय पर उठता रहा है, लेकिन इस बार किसान कांग्रेस के खुलकर समर्थन में आने से आंदोलन को नई ऊर्जा मिलती दिखाई दे रही है।
फिलहाल प्रदर्शन जारी है और मजदूर अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक स्थानीय लोगों के रोजगार के संबंध में ठोस आश्वासन और सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
हालांकि, इस पूरे मामले में पिकाडली कंपनी प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। कंपनी का पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों और दावों पर पूर्ण स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में प्रशासन और संबंधित पक्षों से अपेक्षा की जा रही है कि वे संवाद के माध्यम से इस विवाद का शांतिपूर्ण एवं न्यायसंगत समाधान निकालने का प्रयास करें।












