May 11, 2026 1:53 pm

गड्ढों में गुम हुआ विकास!” — मनेन्द्रगढ़ वन मंडल में 12 करोड़ का ‘गड्ढा मॉडल’ घोटाला उजागर!खड़गवां वन परिक्षेत्र में प्रशिक्षु एसडीओ मयंक सिंह पर करीब 12 करोड़ के घोटाले का आरोप!

“गड्ढों में गुम हुआ विकास!” — मनेन्द्रगढ़ वन मंडल में 12 करोड़ का ‘गड्ढा मॉडल’ घोटाला उजागर!खड़गवां वन परिक्षेत्र में प्रशिक्षु एसडीओ मयंक सिंह पर करीब 12 करोड़ के घोटाले का आरोप!

MCB/मनेन्द्रगढ़ वन मण्डल के खड़गवां वन परिक्षेत्र में पौधारोपण के नाम पर ऐसा “विकास मॉडल” तैयार किया गया कि जंगल तो कम उगे, लेकिन भ्रष्टाचार के किस्से खूब फलने-फूलने लगे। आरोप है कि प्रशिक्षु एसडीओ मयंक सिंह के कार्यकाल में करोड़ों रुपये खर्च दिखाकर सरकारी खजाने को ऐसा गड्ढा दिखाया गया, जिसमें नियम, गुणवत्ता और जवाबदेही सब दफन हो गए।

मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिकायतकर्ता अब्दुल सलाम क़ादरी ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल, वन मंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय और प्रधान मुख्य वन संरक्षक को विस्तृत शिकायत भेजकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। शिकायत में करीब 12 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया गया है।

60×60 की जगह 30×30 का “ईमानदार” गड्ढा !

वन विभाग के दस्तावेज़ों में पौधारोपण हेतु 60×60 सेंटीमीटर के मानक गड्ढे खोदने का उल्लेख है, लेकिन जमीन पर तस्वीर कुछ और ही दिखाई दी। आरोप है कि मौके पर केवल 30×30 सेंटीमीटर के छोटे-छोटे गड्ढे खोद दिए गए, वह भी आधे-अधूरे।

हद तो तब हो गई जब कई स्थानों पर गड्ढों से ठूंठ, जड़ें और झाड़ियां तक नहीं हटाई गईं। यानी पौधा लगाने से पहले जमीन तैयार करने की जो मूल प्रक्रिया होती है, उसे भी “प्राकृतिक रूप” में छोड़ दिया गया। स्थानीय लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं कि शायद विभाग “जंगल में जंगल उगाने” की नई तकनीक पर काम कर रहा था।

वन विभाग को ही गड्ढे में धकेल दिया !

क्षेत्र में चर्चा है कि पौधारोपण के नाम पर जो गड्ढे खोदे गए, उनमें पौधे कम और विभाग की साख ज्यादा दफन हुई। ग्रामीणों का कहना है कि अगर यही गुणवत्ता रही तो आने वाले समय में पेड़ कम और जांच समितियां ज्यादा उगेंगी।

कैमरा देखते ही “वनगमन” !

बताया जाता है कि फरवरी माह में जब इस पूरे मामले को लेकर प्रशिक्षु एसडीओ मयंक सिंह से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो कैमरा और मोबाइल देखते ही वे मौके से निकल गए। स्थानीय लोग अब इसे “वन विभाग की नई दौड़ प्रतियोगिता” बता रहे हैं।

“मौखिक आदेश” का अदृश्य जंगल!

जब इस मामले में निचले कर्मचारियों से ऑफ कैमरा चर्चा की गई, तो उन्होंने सारा काम “वरिष्ठ अधिकारियों के मौखिक आदेश” पर होने की बात कही। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर यह मौखिक आदेश था या भ्रष्टाचार का ऐसा अदृश्य जंगल, जिसमें जिम्मेदारी ढूंढना मुश्किल हो गया है।

सीसीएफ ने कही जांच की बात!

वहीं इस पूरे मामले में जब अम्बिकापुर के सीसीएफ महोदय से प्रतिक्रिया ली गई, तो उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच कराने की बात कही है। अब देखने वाली बात होगी कि जांच फाइलों में पौधारोपण की तरह “कागजों में हरी-भरी” होती है या वास्तव में जमीन तक पहुंचती है।

शिकायतकर्ता की मांग!

शिकायतकर्ता अब्दुल सलाम क़ादरी ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच EOW, विजिलेंस एवं दूसरे वन वृत्त के अधिकारियों की संयुक्त टीम से कराई जाए। साथ ही प्रत्येक पौधारोपण स्थल और एक-एक गड्ढे की भौतिक जांच शिकायतकर्ता की उपस्थिति में कराई जाए।

फिलहाल खड़गवां वन परिक्षेत्र में गड्ढों की गहराई से ज्यादा चर्चा अब इस घोटाले की गहराई की हो रही है।

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