June 15, 2026 2:24 pm

अंग्रेज़ी सिखाने के नाम पर ‘खतरे की क्लास’! महासमुंद में बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ या प्रशासन की आंखों पर पट्टी?”

अंग्रेज़ी सिखाने के नाम पर ‘खतरे की क्लास’! महासमुंद में बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ या प्रशासन की आंखों पर पट्टी?”

महासमुंद शहर में अंग्रेज़ी बोलना सिखाने के नाम पर संचालित एक स्पीकिंग क्लास अब सवालों के घेरे में आ गई है। शहर में संचालित “सत्यम इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स” को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आई हैं। आरोप है कि जिस भवन में यह कोर्स संचालित किया जा रहा है, वहां छोटे-छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। यदि भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना घटित होती है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी—यह प्रश्न अब जनचर्चा का विषय बनता जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, महासमुंद में संचालित यह इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स एक ऐसे भवन में चल रहा है जहां सुरक्षा मानकों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्लास संचालित होने वाली जगह पर बच्चों के लिए न तो समुचित शौचालय की व्यवस्था है और न ही आपातकालीन निकासी (Emergency Exit) की कोई सुविधा उपलब्ध है। भवन में केवल एक ही रास्ता बताया जा रहा है, जिससे बच्चे अंदर-बाहर आते-जाते हैं।

सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि जिस कमरे में बच्चों को पढ़ाया जाता है, उसके ऊपर अस्थायी ढंग से झिल्ली या टीननुमा आवरण लगाया गया है। ऊपर से तेज धूप और भीषण गर्मी का असर अलग, वहीं भवन के ऊपर से गुजरती हाई टेंशन बिजली लाइन ने अभिभावकों की चिंता को और बढ़ा दिया है। सवाल उठ रहा है कि आखिर क्या बच्चों की शिक्षा के नाम पर उनकी सुरक्षा को दांव पर लगाया जा सकता है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए संचालित किसी भी शिक्षण संस्थान में न्यूनतम सुरक्षा मानकों का पालन होना बेहद जरूरी है। खासकर ऐसे समय में जब प्रदेश सहित देशभर में स्कूलों, कोचिंग संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा नियमों को लेकर कई हादसों के बाद प्रशासन लगातार निर्देश जारी करता रहा है। इसके बावजूद यदि किसी संस्थान में बुनियादी सुरक्षा इंतजाम तक नहीं हैं, तो यह एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का विषय बन सकता है।

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई, जब इस संबंध में कोचिंग संचालक से चर्चा की गई। आरोप है कि सुरक्षा संबंधी सवाल पूछे जाने पर संचालक ने कथित तौर पर जवाब दिया कि यदि कोई समस्या होती है, तो उसकी जिम्मेदारी मकान मालिक की होगी। यह जवाब सुनकर स्थानीय लोग भी हैरानी जता रहे हैं।

लोगों का तर्क है कि मकान मालिक केवल भवन किराये पर देता है, लेकिन यदि उस भवन में किसी व्यवसायिक गतिविधि या कोचिंग संस्थान का संचालन किया जा रहा है, तो संबंधित विभागों से अनुमति लेना और सभी नियमों का पालन करना संचालक की जिम्मेदारी होती है। बिना आवश्यक अनुज्ञा (लाइसेंस/अनुमति) के यदि बच्चों को पढ़ाने का व्यवसाय संचालित किया जा रहा है, तो यह कई कानूनी सवाल भी खड़े करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों से जुड़े किसी भी संस्थान में अग्निशमन व्यवस्था, वेंटिलेशन, शौचालय, सुरक्षित बिजली व्यवस्था, पर्याप्त जगह, आपातकालीन निकासी मार्ग और प्रशासनिक अनुमति जैसी मूलभूत आवश्यकताओं का होना जरूरी माना जाता है। यदि इनमें से किसी भी बिंदु की अनदेखी होती है, तो भविष्य में कोई अप्रिय घटना होने पर गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

महासमुंद जैसे तेजी से बढ़ते शहर में इन दिनों निजी कोचिंग संस्थानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई जगहों पर बिना किसी स्पष्ट सुरक्षा व्यवस्था और नियामकीय अनुमति के छोटे कमरों में बड़ी संख्या में बच्चों को बैठाकर कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। ऐसे में यह मामला केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं बल्कि पूरे जिले में संचालित निजी कोचिंग संस्थानों की जांच की मांग को भी मजबूत करता दिखाई दे रहा है।

अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को बेहतर भविष्य और शिक्षा के लिए कोचिंग भेजते हैं, लेकिन यदि वहां उनकी जान जोखिम में हो, तो यह बेहद चिंताजनक विषय है। भीषण गर्मी के इस दौर में यदि कमरे में पर्याप्त सुरक्षा, वेंटिलेशन और आपातकालीन व्यवस्था नहीं है, तो किसी भी आपदा की स्थिति में गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।

अब सवाल जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर भी उठने लगे हैं। यदि बिना सुरक्षा मानकों और आवश्यक अनुमति के कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं, तो आखिर जिम्मेदार विभाग अब तक मौन क्यों हैं? क्या किसी बड़ी दुर्घटना के इंतजार के बाद ही कार्रवाई होगी, या समय रहते जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे?

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि जिला प्रशासन तत्काल एक जांच टीम गठित कर न केवल संबंधित स्पीकिंग क्लास की जांच करे, बल्कि पूरे जिले में संचालित ऐसे कोचिंग संस्थानों का सर्वे कर सुरक्षा मानकों का परीक्षण किया जाए। यदि कहीं भी बच्चों की सुरक्षा से समझौता पाया जाता है, तो तत्काल कार्रवाई करते हुए ऐसे संस्थानों को बंद कराया जाना चाहिए।

फिलहाल, महासमुंद में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले संस्थानों में यदि सुरक्षा की बुनियाद ही कमजोर हो जाए, तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य और जीवन से सीधा खिलवाड़ माना जाएगा। अब देखने वाली बात होगी कि जिला प्रशासन इस गंभीर विषय पर कब और कैसी कार्रवाई करता है।

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