May 14, 2026 8:16 am

महासमुंद में ‘श्री राम कथा पर्ची टैक्स’ का धमाका”:अधिकारियों/कर्मचारियों से लेकर जिले के निजी अस्पतालों से लाखों की वसूली, कथा चिरमिरी में… पसीना महासमुंद में!

महासमुंद में‘श्री राम कथा पर्ची टैक्स’का धमाका”: अधिकारियों/कर्मचारियों से लेकर जिले के निजी अस्पतालों से लाखों की वसूली, कथा चिरमिरी में… पसीना महासमुंद में!

महासमुंद/छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों एक ऐसा “धार्मिक प्रशासनिक चमत्कार” देखने को मिल रहा है, जिसे सुनकर लोग माथा पकड़ रहे हैं और कर्मचारी फाइलों के पीछे छिपकर हंस भी रहे हैं। मामला इतना दिलचस्प और हास्यप्रद है कि सरकारी दफ्तरों में अब लोग मेडिकल रिपोर्ट कम और “श्रीराम कथा रसीद”ज्यादा खोजते नजर आ रहे हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिला स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों “11 हजार वाला आध्यात्मिक पैकेज” चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है। सूत्रों से मिली जानकारी आरोप है कि राज्य के विशेष मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी आई. नागेश्वर राव द्वारा अपने ही विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों से 11-11 हजार रुपये और निजी अस्पताल संचालकों लाखों रूपये श्रीराम कथा महोत्सव के नाम पर “विशेष श्रद्धा राशि”दबाब बना कर जमा करवाई जा रही है।

अब आप सोच रहे होंगे कि महासमुंद में कोई स्वास्थ्य विभाग के सौजन्य से कोई भव्य धार्मिक आयोजन हो रहा होगा… लेकिन यहीं कहानी में ट्विस्ट है!

कथा महासमुंद में नहीं… बल्कि छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री के जिले चिरमिरी में हो रही है।क्योंकि रशीद पर्ची चिरमिरी की है यानी भजन चिरमिरी में, लेकिन लाखों का चढ़ावा महासमुंद स्वास्थ्य विभाग से! यह सुनकर कई कर्मचारी यह कहते पाए गए — “सरकारी नौकरी में अब ट्रांसफर ही नहीं, पुण्य भी दूसरे जिले भेजा जा रहा है!”

जिले में स्वास्थ्य विभाग के गलियारों में चर्चा है कि छोटे कर्मचारियों को डराकर“आध्यात्मिक दबाव”बनाया जा रहा है। कोई कह रहा है—“रसीद लो और राम नाम जपो”, तो कोई फुसफुसा रहा है—“11 हजार नहीं दिए तो अगली ड्यूटी ऐसी जगह लगेगी जहां मच्छर भी छुट्टी मांगते हैं!”

निजी अस्पताल संचालकों की हालत भी कम मजेदार नहीं है। एक विशेष अस्पताल संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा—
“पहले स्वास्थ्य विभाग निरीक्षण करता था, अब लगता है कथा भी विभाग संचालन करेगा। समझ नहीं आ रहा लाइसेंस रिन्यू कराएं या कथा दान जमा करें!”

पूरा मामला इसलिए और हास्यास्पद बन गया है क्योंकि कथित वसूली महासमुंद जिले से एवं स्वास्थ्य विभाग के और कोई नहीं स्वयं भू मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी आई नागेश्वर राव द्वारा स्वयं सरकारी गाड़ी में जाकर की जा रही है जबकि आयोजन चिरमिरी में लेकिन चंदा महासमुंद से जा रहा है।

•क्या महासमुंद जिले का मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय अब “मोबाइल धार्मिक सेवा केंद्र” बन गया है?

यह समाचार वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस कथित मामले को लेकर तंजों की बाढ़ सी आ जायेगी !

•सबसे ज्यादा चर्चा यह है कि क्या सरकारी संसाधनों का उपयोग बिना कोई शासकीय आदेश के किसी दूसरे जिले के धार्मिक आयोजन के लिए किया जा सकता है?

•क्या बिना कोई शासकीय आदेश के जिले का मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी अब धार्मिक आयोजनों के लिये चंदा वसूली करेंगे ?

आरोप यह भी लग रहे हैं कि विभागीय वाहन “विशेष मिशन” में लगाए जा रहे हैं। यानी वाहन महासमुंद का… ईंधन सरकारी… दौड़ दूसरे जिले की कथा के लिए!

अगर ऐसा रहा तो एक कर्मचारी ने व्यंग्य में कहा—“पहले मीटिंग में टारगेट मिलता था टीकाकरण का… अब लगता है चंदा कलेक्शन का मिलेगा!”

स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारी तो अब मजाक में अपने विभाग का नया नाम “सीएमएचओ कथा प्रचार समिति” तक रखने लगे हैं। चाय की दुकानों से लेकर दफ्तरों तक एक ही चर्चा है—विभाग के अधिकारियों द्वारा “इतनी श्रद्धा अगर अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने में दिखाई जाती, तो मरीज भी आशीर्वाद देने लगते!”

जनता भी इस कथित वसूली को लेकर सवाल उठा रही है। लोगों का कहना है कि यदि कोई धार्मिक आयोजन स्वेच्छा से सहयोग मांगता है तो बात अलग है, लेकिन यदि सरकारी दबाव या पद का प्रभाव इस्तेमाल कर चंदा लिया जाए, तो यह गंभीर विषय है।

•मजेदार बात यह है कि क्या जिले में अब लोग 11 हजार की रकम को “आध्यात्मिक एंट्री फीस” कहकर चुटकुले बना बनाएंगे ?

•क्या महासमुंद जिला के सीएमएचओ कार्यालय के बाहर बोर्ड पर लिखा मिलेगा अधिकारी/ कर्मचारियों एवं निजी अस्पतालों द्वारा “11-11 हजार चंदा रूपी सहयोग जमा नहीं किए, तो अगली बार कार्यालय में इंजेक्शन की जगह प्रवचन मिलेगा”?

हालांकि पूरे मामले में आधिकारिक रूप से कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन चर्चाओं का बाजार इतना गर्म है कि जिले की स्वास्थ्य विभाग की फाइलों से ज्यादा “कथा कलेक्शन” की बातें घूम रही हैं।

कई कर्मचारियों का कहना है कि वे असमंजस में हैं। एक तरफ विभागीय दबाव का डर, दूसरी तरफ जेब का दर्द। कुछ लोग तो अब मजाक में छुट्टी आवेदनो में लिखा जायेगा कि—
“वेतन कम है, कृपया कथा चंदा अगली किश्त में लिया जाए!”

इधर जिले की जनता पूछना चाहेगी कि आखिर स्वास्थ्य विभाग का मूल काम क्या है—स्वास्थ्य सेवा देना या मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा धार्मिक आयोजनों के लिए आर्थिक समर्पण अभियान चलाना?

पूरा मामला अब जिले में हास्य, व्यंग्य और चर्चा का विषय बन चुका है। यदि यही रफ्तार रही, तो आने वाले समय में अस्पतालों के बाहर बोर्ड लग सकता है—“यहां इलाज के साथ कथा सहयोग भी स्वीकार है!”

अब देखने वाली बात यह होगी कि इस कथित चंदा वसूली पर प्रशासन कोई जांच बैठाता है या मामला “राम भरोसे” ही चलता रहेगा। फिलहाल महासमुंद के स्वास्थ्य विभाग को यही कहना सही होगा ,,

“बीमारी महासमुंद की… इलाज चिरमिरी में… और चंदा सीधे सीएमएचओ साहब के मिशन में!”

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