“जनपद की बैठक में फूटा गुस्सा… मजदूरों के अवैध पलायन पर बागबाहरा में मचा हड़कंप!उड़ीसा के मजदूर दलाल सक्रिय… प्रशासन ने उठाया लोहे का हाथ, कड़ी कार्रवाई के संकेत!”
Bagbahara/जनपद पंचायत बागबाहरा की सामान्य प्रशासन समिति की बैठक इस बार सिर्फ औपचारिक चर्चा का मंच नहीं रही, बल्कि यह एक तेज़ बहसों, गुस्से और गंभीर मुद्दों से भरी ऐसी बैठक साबित हुई जिसने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी। अध्यक्ष केशव नायकराम चन्द्राकर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सबसे भयावह मुद्दा उभरकर सामने आया—उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में सक्रिय मजदूर दलालों द्वारा ग्रामीण मजदूरों का अवैध पलायन।
अवैध पलायन का मुद्दा—बैठक में गूंज उठा दर्द!
बैठक के एजेण्डा पर जैसे ही मजदूर पलायन का विषय आया, समिति सदस्यों में रोष फैल गया। बताया गया कि क्षेत्र में सक्रिय कुछ मजदूर दलाल ग्रामीणों को मोटी रकम, सुविधाओं और झूठे सपनों का लालच देकर उत्तरप्रदेश, तेलंगाना और अन्य राज्यों के ईंट भट्टों में ले जा रहे हैं। कई मामलों में तो मजदूरों को बंधुआ मजदूर बना देने तक की नौबत आ गई है—फोन छीन लेना, घरवालों से संपर्क तोड़ देना और अमानवीय मजदूरी कराना… ये सब दिल दहलाने वाली बातें बैठक में सामने आईं।
जनपद अध्यक्ष ने नाराजगी जताई—
“ये सिर्फ पलायन नहीं, यह मानव तस्करी है… और अब इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा!”
समिति ने कड़ा निर्देश जारी किया कि—
•हर ग्राम पंचायत सचिव अपने गांव से पलायन करने वाले मजदूरों का पूरा रिकॉर्ड तैयार करें।
•मजदूरों को ले जाने वाले व्यक्ति का नाम, पता और फोन नंबर भी दर्ज किया जाए।
•एसआईआर में हो रही पिछली त्रुटियों को सुधारने के लिए अभिलेखों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए।
इसके साथ ही समिति ने साफ कहा कि श्रम विभाग की अनुमति के बिना किसी भी मजदूर को बाहर ले जाना अवैध माना जाएगा।यदि कोई दलाल पकड़ा गया, तो उसके खिलाफ मानव तस्करी, बंधुआ श्रम निषेध अधिनियम और अन्य धाराओं के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग की हालत पर भी उठा बड़ा सवाल!
बैठक में विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी वर्मा ने जैसे ही शिक्षा व्यवस्था की स्थिति बताई, पूरे हॉल में चिंता की लहर दौड़ गई। उन्होंने बताया कि—
•विकासखण्ड में 7 स्कूल भवनविहीन हैं।
•40 विद्यालय अत्यंत जर्जर, कभी भी हादसा होने की संभावना।
•58 स्कूल आज भी बिना आहाते संचालित—सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे।
शासकीय हाईस्कूल मोहगांव, देवरी, खुसरूपाली, बकमा, माखन बाहरा, राटापाली, कमरौद जैसे विद्यालयों की सूची ने समिति को चौंका दिया।
समिति ने नाराजगी जाहिर करते हुए निर्माण और मरम्मत संबंधी कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
“बच्चों की शिक्षा के साथ समझौता नहीं किया जा सकता”— यह अध्यक्ष का स्पष्ट संदेश था।
कृषि विभाग पर भी बरसे सवाल—भंडारण और वितरण की व्यवस्था पर नाराज़गी!
वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी ने बीज भंडारण और वितरण की जानकारी बैठक में प्रस्तुत की, लेकिन समिति के कई सदस्य इससे संतुष्ट नहीं हुए।
सदस्यों ने कहा कि किसानों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं—
कहीं बीज समय पर नहीं मिल रहे तो,कहीं भंडारण की व्यवस्था बदहाल है।समिति ने निर्देश दिया कि जिले के सभी आरईओ की सूची और मोबाइल नंबर प्रस्तुत किए जाएं ताकि किसानों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जा सके।
कृषि उपज मंडी, बैंक शाखाएं और धान खरीदी—सब पर हुई अहम चर्चा!
बैठक में कृषि उपज मंडी समिति के सचिव ने विभागीय गतिविधियों का विवरण दिया।इसके बाद जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, रायपुर की बागबाहरा, कोमाखान, तेन्दूकोना और मुनगासेर शाखाओं के प्रतिनिधियों ने धान खरीदी की स्थिति बताई।
सदस्यों ने स्पष्ट निर्देश दिए कि—
•सोसायटियों में टोकन लिमिट बढ़ाई जाए, ताकि किसानों को बार-बार चक्कर न लगाना पड़े।
•पिछले वर्ष परसूली सोसायटी में धान खरीदी घोटाले की चर्चा पर बैठक और गर्म हो गई।
इसी संदर्भ में समिति ने नई जांच टीम गठित की जिसमें—
•गरिमा चन्द्राकर,
•मधुलिका चन्द्राकर,
•भगवती ठाकुर,
•तुलाराम ठाकुर को सदस्य बनाया गया।
अवैध पलायन पर प्रशासन का लोहे का हाथ—ग्राम सचिवों को मिली कड़ी जिम्मेदारी!
बैठक के अंत में समिति का सबसे सख्त फैसला सामने आया—अवैध मजदूर पलायन रोकना पहली प्राथमिकता है।ग्राम सचिव अब हर मजदूर का रिकॉर्ड रखेंगे, दलालों की निगरानी होगी और श्रम विभाग की अनुमति के बिना किसी मजदूर को बाहर नहीं भेजा जाएगा।समिति ने साफ चेतावनी दी—
“अगर कोई मजदूर दलाल मजदूरों को अवैध रूप से ले जाता पाया गया, तो वह सीधे मानव तस्करी का आरोपी माना जाएगा।”
बैठक रही कार्रवाई का संकेत… प्रशासन पूरी तरह अलर्ट!
बागबाहरा जनपद की यह बैठक सिर्फ चर्चा नहीं, बल्कि बड़े फैसलों और सख्त रुख का संदेश लेकर समाप्त हुई।मजदूर पलायन, शिक्षा व्यवस्था, कृषि प्रबंधन और धान खरीदी—हर मुद्दे पर समिति ने निर्णायक निर्देश जारी किए।बागबाहरा प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है—अवैध मजदूर पलायन पर अब जीरो टॉलरेंस…और विकास कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बिल्कुल नहीं!













