“महासमुंद गोपालपुर में ‘ठेकेदार राज’: करणी कृपा प्लांट की पाइपलाइन के नाम पर किसानों की जमीन पर अवैध बुलडोजर—विरोध करने वालों को जेल, दमन का दौर तेज… किसान कांग्रेस अध्यक्ष मानिक साहू
महासमुंद। कभी हरियाली से लहलहाते खेत, कभी शांति से बहने वाली निस्तारी की धाराएं… और आज वही गाँव ठेकेदारों के आतंक की चपेट में हैं। गोपालपुर एनीकट—जो ग्रामीणों और पशुधन की जीवनरेखा माना जाता है—अब करणी कृपा एग्रो प्राइवेट लिमिटेड के पाइपलाइन कार्यों के चलते विवादों के तूफान में है। किसानों की निजी कृषि भूमि पर अवैध खुदाई, बिना अनुमति के भारी वाहनों की आवाजाही और विरोध करने पर किसानों को जेल… इस पूरे घटनाक्रम ने पूरे इलाके में सनसनी मचा दी है।
‘अवैध बुलडोजर’ का हाहाकार—गाँवों में दहशत का माहौल!
तुमगाँव, गोपालपुर और आसपास के गाँवों में पाइपलाइन लगाने के ठेकेदारों ने मानो मुहिम छेड़ दी हो। न पंचायत से अनुमति, न ग्रामसभा की सहमति और न ही कोई वैधानिक स्वीकृति—फिर भी सुबह-शाम खेतों में बुलडोजर और जेसीबी गरज रहे हैं।
छोटी-संकरी सड़कों पर भारी ट्रक धड़धड़ाते हुए दौड़ रहे हैं, मिट्टी उड़ रही है, फसलें बर्बाद हो रही हैं, और किसान बेबस होकर देख रहे हैं।
ग्राम गोपालपुर के एक बुजुर्ग किसान ने बताया—
“हमारी खड़ी फसल को रौंद दिया गया, खेत में डेढ़-डेढ़ फीट की खुदाई कर दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं। विरोध करो तो पुलिस उल्टा हम पर ही भड़क जाती है।”
विरोध की आवाज़ उठी तो जेल भेज दिया गया!
किसान नेता एवं किसान कांग्रेस के जिला अध्यक्ष मानिक साहू ने इस पूरे मामले को जिला प्रशासन और ठेकेदारों की मिलीभगत का नतीजा बताया है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा—
“ठेकेदारों के भारी वाहन गाँव को बर्बाद कर रहे हैं। किसान विरोध करे तो उसे अपराधी बना दिया जाता है। यह लोकतंत्र नहीं, ठेकेदार-तंत्र है!”
सबसे चौंकाने वाली घटना तब हुई जब गाँव के कुछ ग्रामीण करणी कृपा प्लांट के बाहर छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति स्थापित कर रहे थे। उसी समय पुलिस पहुँची और छह ग्रामीणों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
साहू ने आरोप लगाया—
“मूर्ति लगाने जैसे शांतिपूर्ण कार्य में बाधा, और ठेकेदारों को खुलेआम छूट… यह अत्याचार नहीं तो और क्या है? असल दोषी घूम रहे हैं और ईमानदार ग्रामीण सलाखों के पीछे हैं।”
इतना ही नहीं, गाँव के सरपंच पति को भी लूटपाट के झूठे केस में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, केवल इसलिए क्योंकि उन्होंने ठेकेदारों की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाई थी।
पुलिस पर भी सवाल—‘ठेकेदार का फोन आए तो तुरंत हाजिर’!
मानिक साहू ने महासमुंद पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है—
“किसान थाने में रिपोर्ट लिखाने जाए तो टरका दिया जाता है। किसान फोन करे तो पुलिस नहीं आती। लेकिन ठेकेदार फोन करे तो पुलिस मौके पर न केवल तुरंत पहुँचती है बल्कि किसानों को धमकाने लगती है।”
ग्रामीणों के मुताबिक, पुलिस किसी भी शिकायत को दर्ज करने से पहले ही उन्हें यह सलाह दे देती है—
“झगड़ा मत करो, ठेकेदार का काम चलने दो।”
ऐसे में ग्रामीणों का भरोसा प्रशासन से उठता जा रहा है।
एनीकट की सुरक्षा पर खतरा—गाँव की जल-व्यवस्था दांव पर!
गोपालपुर एनीकट सिर्फ जल संरक्षण संरचना नहीं, बल्कि आसपास के दर्जनों गाँवों की कृषि व्यवस्था की रीढ़ है। इसी पानी से फसलें सिंचाई पाती हैं, पशुओं की प्यास बुझती है और गाँवों को जीवन मिलता है। लेकिन पाइपलाइन के लिए की जा रही अवैध खुदाई से एनीकट का जलस्तर प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
साहू ने चेताया—
“एनीकट की जीवनरेखा को खतरे में डालकर एक निजी प्लांट को फायदा पहुँचाया जा रहा है। यह किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
किसान कांग्रेस की बड़ी चेतावनी—जिला स्तर पर महाआंदोलन की तैयारी!
किसान कांग्रेस जिला अध्यक्ष मानिक साहू ने साफ कहा है कि अगर यह अवैध खुदाई, दमन और किसानों का उत्पीड़न तुरंत नहीं रोका गया तो वे पूरे महासमुंद जिले में महाआंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व और मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
वे लगातार गाँव-गाँव जाकर किसानों से संपर्क कर रहे हैं। ग्रामीणों ने उन्हें बताया है कि—
• ठेकेदार मनमर्जी से मशीनें चला रहे हैं,
• खेतों को नुकसान का कोई मुआवजा नहीं,
• ना कोई सर्वे, ना कोई अनुमति,
• विरोध पर सीधे पुलिस कार्रवाई,
साहू ने कहा—
“यह सिर्फ एक पाइपलाइन का मामला नहीं, यह किसानों की अस्मिता और अस्तित्व का सवाल है। अगर ज़रूरत पड़ी तो हम सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं।”
गोपालपुर और आसपास के गाँवों में हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं। किसान डरे हुए हैं, ग्रामीण गुस्से में हैं और प्रशासन मौन है। करणी कृपा प्लांट की पाइपलाइन के नाम पर जमीन, फसलें और अधिकार लगातार कुचले जा रहे हैं।
अब सवाल यह है—
•क्या प्रशासन नींद से जागेगा?
•क्या किसानों की आवाज सुनी जाएगी?
•या फिर ठेकेदारों के बुलडोजर यूँ ही खेतों को रौंदते रहेंगे?
आने वाले दिनों में संघर्ष तेज होने की पूरी संभावना है।













