“गाइडलाइन का गणित या जनता पर गाज?—महासमुंद में जमीन के दाम 300-500% बढ़े, बिफरी जनता बोली: अब नहीं चलेगा मनमाना बाजार मूल्य!”
Mahasamund/पूरे महासमुंद जिले में इन दिनों एक ही मुद्दा हर चौराहे, हर बैठक, हर पंचायत में गरम है—जमीन के बाजार मूल्य में अचानक 300 से 500 प्रतिशत तक की बेतहाशा वृद्धि! जनता की आवाज अब सिर्फ असंतोष नहीं, बल्कि उग्र जनाक्रोश में बदलने लगी है। लोग इसे शासन की “मनमानी”, “अन्यायपूर्ण” और “जनविरोधी” कार्रवाई करार दे रहे हैं।
इसी के विरोध में आज जिला कलेक्टर एवं एसडीएम महासमुंद को एक भावनात्मक, तीखा और असरदार ज्ञापन सौंपा गया, जिसने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।
विवाद की जड़ — 20 नवंबर 2025!
वर्ष 2025-26 के लिए केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड छत्तीसगढ़ रायपुर द्वारा जारी नई गाइडलाइन 20 नवंबर से लागू कर दी गई।लेकिन यह निर्णय सिर्फ एक नई गाइडलाइन नहीं, बल्कि जैसे बिजली गिर गई हो आम लोगों पर।
भारत में प्रथा है कि हर साल वित्तीय वर्ष की शुरुआत में गाइडलाइन की दरें तय होती हैं।लेकिन छत्तीसगढ़ में पहली बार वर्ष के मध्य में गाइडलाइन में संशोधन किया गया—और वो भी इतना भारी कि आम जनता ल की आंखें फटी की फटी रह गईं।
पहले ही 2025-26 की गाइडलाइन में 42% की वृद्धि कर दी गई थी।और अब बिना चेतावनी, बिना अधिसूचना, बिना आपत्ति-सुझाव प्रक्रिया के…
एक झटके में 300% से 500% तक की नई वृद्धि!
जनता पूछ रही है—
“यह बाजार मूल्य है या जनता को बाजार में चढ़ाने की नीति?”
जमीन सस्ती—रजिस्ट्री महंगी!
महासमुंद जिले में स्थिति ऐसी हो गई है कि
“अब जमीन की कीमत कम और सेल डीड का खर्च ज्यादा पड़ रहा है”जो कि खरीदने-बेचने वालों के लिए पूरी तरह अव्यवहारिक और अन्यायपूर्ण है।जहां विकास शून्य है, इंफ्रास्ट्रक्चर का नामोनिशान नहीं,
वहीं पर गाइडलाइन की कीमतें आसमान छू रही हैं।
गांवों के लोग कहते हैं—
“जहां सड़क टूटी, जहां पानी नहीं, वहां जमीन का मूल्य दिल्ली-कोलकाता जैसा क्यों?”
गाइडलाइन बदलने की प्रक्रिया भी संदेह के घेरे में
ज्ञापन में गंभीर आरोप है कि:
•न कोई अधिसूचना निकाली गई,
•न आपत्तियां ली गईं,
•न सुझाव आमंत्रित हुए,
•न ग्राम या वार्ड स्तरीय बैठकें हुईं,
सब कुछ मनमाने तरीके से,सब कुछ बिना पारदर्शिता के,सब कुछ जनता को विश्वास में लिए बगैर कर दिया गया।
पंजीयन का ग्राफ गिरा—राजस्व को घाटा शुरू!
महासमुंद पंजीयन कार्यालय में प्रतिदिन 30 से 40 पंजीयन होते थे।लेकिन नई गाइडलाइन के लागू होने के बाद पिछले 10 दिनों में यह संख्या घटकर 15 से 20 रह गई।
यानी 50% से भी ज्यादा कमी!
सीधे-सीधे यह राज्य सरकार को राजस्व हानि पहुँचा रही है।जनता सवाल पूछ रही है—
“अगर सरकार का फैसला जनता को ही नहीं पचेगा, तो राजस्व कहां से आएगा?”
किसानों पर डबल मार—आयकर और महंगी रजिस्ट्री
नई गाइडलाइन का सबसे ज्यादा असर आम आदमी और किसानों पर पड़ रहा है।गरीब किसान जो—
•बेटी की शादी,
•खेत का इलाज,
•कर्ज चुकाने,
•या इलाज के लिए,
अपनी जमीन बेचते थे, अब उनके सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।ऊंची गाइडलाइन का मतलब है—
अनावश्यक आयकर,बढ़ा हुआ स्टांप शुल्क,और कई बार जमीन का सौदा रद्द!किसानों का दर्द शब्दों में छलक पड़ा—
“हमारी जमीन बिकेगी नहीं, तो हम बचेंगे कैसे?”
भविष्य में बैंक धोखाधड़ी का खतरा ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि:
•बाजार दर और गाइडलाइन दर की विशाल खाई,
•भविष्य में बैंक ऋण, मॉर्गेज और मूल्यांकन में
गंभीर भ्रम पैदा करेगी।
अगर जमीन का गाइडलाइन मूल्य 20 लाख हैऔर बाजार मूल्य 6 लाख—तो बैंक गलत लोन जारी कर सकते हैं,जो बाद में आर्थिक घोटालों और कर्ज वसूली संकट को जन्म देगा।
लाखों लोगों का रोजगार खतरे में निर्माण और भूमि व्यवसाय से जुड़े—
•इंजीनियर,
•मजदूर,
•सर्वे करने वाले,
•लोहा,सीमेंट, रेत बेचने वाले,
•एजेंट,
•दस्तावेज लेखक,
इन लाखों लोगों का रोजगार इस गाइडलाइन से प्रभावित होगा।
सबसे बड़ा खतरा—निवेशक बाहर भागेंगे!
बाहर से आने वाले निवेशक अब छत्तीसगढ़ की गाइडलाइन देखते ही अपना पैसा दूसरे राज्यों में ले जाएंगे।इसका मतलब—छत्तीसगढ़ को राजस्व की दोहरी मार—एक जनता से, दूसरी व्यापारी निवेश से।
जनता का अंतिम अल्टीमेटम—जनआंदोलन होगा!
ज्ञापन में बताया गया है कि:अगर सरकार को सचमुच जनता की चिंता है, तो—
•गाइडलाइन तुरंत वापस ली जाए,
•नई दरों का समुचित, न्यायसंगत निर्धारण किया जाए,
•जनता, जनप्रतिनिधियों और किसान संगठनों की राय ली जाए,
•नई गाइडलाइन नए वित्तीय वर्ष से लागू हो,
अन्यथा महासमुंद की जनता जन आंदोलन शुरू करने को विवश होगी,जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ सरकार की होगी।
ज्ञापन की प्रतिलिपि भेजी गई—माननीय राज्यपाल, छत्तीसगढ़
•मुख्यमंत्री, छ.ग.,
•वित्त एवं वाणिज्य कर मंत्री,
•जिलाधीश, महासमुंद,
•महानिरीक्षक पंजीयन,
•उप महानिरीक्षक पंजीयन,
•जिला पंजीयक एवं उप-पंजीयक महासमुंद,
इस मुद्दे ने महासमुंद में राजनीतिक और प्रशासनिक तापमान दोनों बढ़ा दिए हैं।अब देखना है कि सरकार जनता की पुकार सुनकर राहत देती है या आने वाले दिनों में महासमुंद एक बड़े जनआंदोलन का केंद्र बनेगा।













