“समंस तामील कर लौट रहे कर्तव्यनिष्ठ आरक्षक…सड़क हादसे में दर्दनाक मौत:सामने से आती रफ्तार बाईक बनी मौत का पहिया — एक आरक्षक शहीद, दो युवक जिंदगी-मौत के बीच झूलते!”
Surajpur/सूरजपुर जिले का सड़क हादसे का ‘काला शनिवार’ ड्यूटी से लौटते समय छीन ली तेज रफ्तार ने आरक्षक की जान, दो युवक भी गंभीर, गांव में पसरा मातम बता दे आपको शनिवार की शाम छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के रामानुजनगर थाना क्षेत्र ने एक ऐसी दर्दनाक दहाड़ सुनी, जिसने पूरे पुलिस महकमे को सदमे में डाल दिया। कर्तव्यनिष्ठ, शांत स्वभाव और हमेशा मुस्कान लिए रहने वाले आरक्षक दलसाय कोराम (37) की मौत ने पूरे इलाके का दिल दहला दिया। सुबह ड्यूटी पर निकला यह जवान शाम को अपने ही खून में लथपथ सड़क पर पड़ा था—बिना किसी गलती के, सिर्फ किसी और की लापरवाह रफ्तार की वजह से।
ड्यूटी का आखिरी दिन साबित हुई यह यात्रा!
29 नवंबर की सुबह करीब 11 बजे दलसाय कोराम अपने रोज़मर्रा की जिम्मेदारी की तरह समंस वारंट तामील करने निकला था। दवना, परशुरामपुर, पटना, साल्ही और आमगांव… कई गांवों में अपनी ड्यूटी निभाते हुए वह शाम को वापस लौट रहा था। सड़क सुनसान थी, हवा में ठंडक थी, और शायद दलसाय कोराम को इस बात का अंदाजा भी न था कि कुछ ही मिनट बाद यह रास्ता उसकी जिंदगी का अंत बन जाएगा।
रफ्तार की सनक ने छीनी एक जिंदगी!
शाम करीब 6 बजे, सरईपारा नाला के पास अचानक सामने से बाइक क्रमांक CG 29 AF 6909 तेज रफ्तार में आती दिखी। चालक — परशुरामपुर निवासी मानप्रताप प्रजापति, जिसने बाइक को इस कदर लापरवाही से मोड़ा कि सामने से आ रहे आरक्षक की बाइक से जोरदार टक्कर हो गई। जिससे आरक्षक मौके में गिर पड़ा और चोटिल हो गया।
कुछ ही सेकंड में दो बाइकों के पुर्ज़े सड़क पर बिखरे थे और तीनों युवक सड़क पर कराह रहे थे।
हादसे का मंजर देख कांप उठे लोग!
मानप्रताप और उसके पीछे बैठा कितेश (22) भी गंभीर रूप से घायल पड़े थे। राहगीरों ने तुरंत एंबुलेंस बुलवाई और तीनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामानुजनगर पहुंचाया।लेकिन अस्पताल के दरवाज़े पर पहुंचते ही नियति ने अपना क्रूर फैसला सुना दिया—
डॉक्टरों ने आरक्षक दलसाय कोराम को मृत घोषित कर दिया।
उसकी वर्दी खून में सनी थी… उसकी जेब में वही समंस वारंट के कागज़ थे जिन्हें वह दिनभर लेकर गांव-गांव घूमता रहा था।
एक घायल सूरजपुर रेफर, दूसरा इलाजरत!
दूसरी बाइक के दोनों युवक भी गंभीर रूप से घायल हुए थे।कितेश की हालत ज्यादा नाज़ुक होने पर उसे प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल सूरजपुर रेफर कर दिया गया।मानप्रताप भी अस्पताल में इलाजरत है।
घर में पसरा मातम, रो-रोकर बेसुध हुए परिजन!
दलसाय कोराम ग्राम मानी, प्रतापपुर थाना क्षेत्र का निवासी था। खबर जैसे ही उसके घर पहुंची, मातम की चीखें हवा में गूंज उठीं।मां-बाप का सहारा, पत्नी का जीवनसाथी, बच्चों का सहारा… सब कुछ एक सड़क हादसे ने छीन लिया।
जब उसका शव पोस्टमार्टम के बाद घर पहुंचा, पूरा गांव उमड़ पड़ा। पुलिस विभाग के जवानों की आंखें भी नम थीं। हर कोई कह रहा था—
“वर्दी ने उसे कभी पीछे हटने नहीं दिया… लेकिन रफ्तार ने उसकी जिंदगी छीन ली।”
अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब!
रविवार को गमगीन माहौल में दलसाय का अंतिम संस्कार उसके गृहग्राम में किया गया। सलामी दी गई…फफकते हुए सहकर्मियों ने कंधा दिया…और धधकती चिता के साथ एक जवान की ड्यूटी हमेशा के लिए खत्म हो गई।
लापरवाही की यह रफ्तार कब रुकेगी?
यह कोई पहला हादसा नहीं…यह रोज़ का एक दर्द है, जिसे कई परिवार भुगतते हैं। सड़क पर किसी और की लापरवाही न सिर्फ उसकी, बल्कि कई मासूमों की जिंदगी छीन लेती है।दलसाय कोराम की मौत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि लापरवाही की यह रफ्तार सिर्फ मशीन नहीं, जिंदगियां भी तोड़ती है।
कानून, ड्यूटी और जिम्मेदारी — सब सवालों के घेरे में!
•क्या तेज रफ्तार के पीछे कोई मजबूरी थी?
•क्या सड़कें सुरक्षित हैं?
•क्या नियमों का पालन सिर्फ किताबों में रह गया है?
इन सवालों के जवाब अभी भी हवा में लटके हैं।एक पुलिस जवान जिसने अपने कर्तव्य के लिए दिनभर सड़कों पर बाइक चलाई…गांव-गांव जाकर समंस तामील किए…उसी सड़क ने उसे निगल लिया।दलसाय कोराम अब नहीं रहा,पर उसके परिवार का दर्द… उसके बच्चों की मासूम आंखें…हर दिन उस मोड़, उस टक्कर, उस चीख की सच्चाई बयान करती रहेंगी।
रफ्तार रुकेगी तभी… जब जिम्मेदारी जागेगी।













