“DEO लहरे का महान सेटिंग साम्राज्य: जहां शिक्षा पीछे, दलाली आगे!”महासमुंद का ‘सेटिंग बाजार’ गर्म, लहरे साहब बने सौदेबाज नंबर वन!
Mahasamund /महासमुंद में जब शिक्षा विभाग में ‘शिक्षा’ की जगह ‘संपर्क’ और ‘शिकायत’ की जगह ‘सेटिंग’ चल रही हो, तो समझिए वहां DEO विजय कुमार लहरे का राज है! जनता कह रही—“अब स्कूलों में ABC नहीं, बल्कि H-L यानी हर्बल लाइफ का पाठ पढ़ाया जा रहा है।”
सरायपाली के राजेश प्रधान से शुरुआत हुई, पर खत्म कहां होगी—किसी को नहीं पता। अब लोग शिक्षा कार्यालय को ‘शिक्षा मॉल’ कहने लगे हैं—जहां हर केस का प्राइस तय है।
पहला एपिसोड: ‘जांच दल’ बना ‘जुमला दल’!
1 अगस्त 2025—लहरे साहब ने कमाल कर दिया!मामला था एक शिक्षक के हर्बल लाइफ के बिजनेस का, पर कहानी निकली सस्पेंस थ्रिलर। जांच दल बना, रिपोर्ट आई—दोष सिद्ध! पर फिर ‘सेटिंग’ का चमत्कार हुआ—सस्पेंशन गायब, सजा मिली बस ‘चाय-नाश्ता कटौती’।स्थानीय अफसर बोले—“लहरे साहब के ऑफिस में न्याय तौल से नहीं, सौदे से मिलताहै।”
दूसरा एपिसोड: डायरी की गूढ़ लिपि और ‘HL कोड’ का रहस्य!
सूत्रों की माने तो लहरे की डायरी आधिकारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि दलाली की बाइबल है! उसमें लिखा होता—HL-10%, HL-20%… मतलब हर्बल लाइफ शिक्षकों से कमीशन की दर!किसी फाइल में दोष? बस 20,000 का पेमेंट और “केस क्लोज्ड!”
किसी शिक्षक ने साइड बिजनेस पकड़ा गया? चिंता मत कीजिए—बस DEO ऑफिस जाएं, थोड़े मीठे शब्द और थोड़े ‘हरे नोट’, सब समाधान हो जाएगा।
तीसरा एपिसोड: धमकी, डर और डील – सब एक पैकेज में!
जब अभिनय शाह ने शिकायत की, तो उन्हें न्याय नहीं, धमकी मिली—“शिकायत वापस लो, वरना जंगल ट्रांसफर फाइनल!”लहरे और प्रधान के बीच हुई बातचीत की कहानी अब पूरे विभाग में चाय की चुस्की के साथ सुनी जा रही है।यह ट्रेलर नहीं, शिक्षा विभाग की ब्लॉकबस्टर फिल्म है—जिसका नाम है “सेटिंग: अ ट्रू स्टोरी”।
चौथा एपिसोड: ‘दलाली नेटवर्क लिमिटेड’ — मई से सितंबर तक का हिसाब!
•मई 2025 ,शिकायत 4,तरीका- धमकी+ समझौता,अफवाह राशि 15- 20 हजार,
•जून 2025 ,शिकायत 5, तरीका-ट्रांसफर डर,अफवाह राशि 10- 15 हजार,
•जुलाई 2025 ,शिकायत 6,तरीका- प्राईवेट डील,अफवाह राशि 20-30 हजार,
•अगस्त 2025 ,शिकायत 3,तरीका- फाइल गायब,अफवाह राशि 25 हजार,
•सितंबर 2025 ,शिकायत 4, तरीका-कमीशन,अफवाह राशि 15- 20 हजार,
कुल अनुमान: 3 लाख का ‘शांतिपूर्ण निपटारा’। और सस्पेंशन? एक भी नहीं!जनता कह रही—“शिक्षा विभाग या दलाल बाजार? फर्क बताओ!
”पांचवा एपिसोड: यूनियनों का बवाल और प्रशासन की चुप्पी!
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ ने मोर्चा खोला—“DEO लहरे हटाओ, नहीं तो धरना होगा ऐसा कि महसमुंद हिल जाएगा।”
अभिनय शाह ने भी एलान कर दिया—“अब कोर्ट में ही मिलेगा न्याय, सेटिंग से नहीं।”
BEO मांझी बोले (धीमी आवाज़ में): “हमने रिपोर्ट दी थी, पर फाड़ दी गई… अब डर लगता है!”शिक्षक अब मजाक में कहते हैं—“DEO ऑफिस में शिकायत मत करना, वहां शिकायत भी ‘कमीशन बेस्ड’ होती है।”
छठा एपिसोड: प्रशासन की आखिरी चेतावनी और जनता का तंज!
अब बातें ऊपर तक पहुंच गई हैं—मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आग्रह किया गया है कि इस ‘सेटिंग साम्राज्य’ पर लगाम लगाएं।जनता कह रही—“अगर अभी एक्शन नहीं हुआ, तो हर स्कूल के बाहर बोर्ड टंगा मिलेगा—‘यहां शिकायतों का त्वरित निपटारा: दरें बातचीत के अनुसार!’
शिक्षा विभाग की चिता या नव- जागरण?
महासमुंद में अब सवाल सिर्फ एक है—क्या शिक्षा फिर से पवित्र होगी या ‘पैसे का पाठ’ चलता रहेगा?
DEO लहरे के साम्राज्य का अंत शायद शुरू हो चुका है। पर जब तक जांच कमेटियां भी ‘सेटिंग’ में बदल जाएं, तब तक सस्पेंस बाकी रहेगा।
कलम कहती है—
“यह खबर नहीं, शिक्षा विभाग का नाटक है—जहां हर्बल लाइफ की खुशबू और दलाली की महक एक साथ उठती है!”













