भुइया पोर्टल पर साजिश का तांडव: डिजिटल जमीन को कागजी सोना बनाकर 36 लाख उड़ाए…
फरार गिरोह के दो और सदस्य गिरफ्तार, साइबर धोखेबाज़ी का खुला ज़खीरा!
Chhatisgarh/डिजिटल शासन व्यवस्था को पारदर्शी और जनता के हित में बनाए रखने के लिए सरकार लाख कोशिशें कर रही है, मगर अपराधियों की चालाकी कभी-कभी तंत्र को भी ठेंगा दिखा देती है। भिलाई जिले के चर्चित भुइया पोर्टल छेड़छाड़ घोटाले में पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। शक्ति सकरौली निवासी गणेश प्रसाद तम्बोली (51 वर्ष) और बारद्वार निवासी अमित कुमार मौर्य (37 वर्ष) को नंदनी नगर थाना और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने पकड़ लिया। दोनों आरोपी पिछले कई दिनों से फरार चल रहे थे और साइबर छल की इस काली पटकथा में मुख्य किरदार माने जा रहे हैं।
पूरा मामला डिजिटल पोर्टल के दुरुपयोग का है, जहां जमीन के रकबे को फर्जी तरीके से बढ़ाकर 36 लाख रुपए का बैंक लोन लिया गया। सरकारी डेटा को हाथों की कठपुतली बनाकर अपराधियों ने न केवल सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए, बल्कि साबित कर दिया कि तकनीकी ज्ञान गलत हाथों में हथियार बन जाता है।
फर्जीवाड़े की कहानी: अकाउंट हैकिंग से फर्जी जमीन तक!
नंदिनी थाना प्रभारी परस ठाकुर ने बताया कि आरोपियों ने पटवारी की यूजर आईडी, पासवर्ड और ओटीपी हासिल कर भुइया पोर्टल में घातक खेल खेला। ग्राम मुरमुंदा, तहसील अहिवारा के खसरा नंबर 1538/11 और 187/04 में रिकॉर्ड को ऑनलाइन बदलकर भूमि का रकबा बढ़ा दिया गया। इस डिजिटल जालसाजी पर भरोसा करते हुए भारतीय स्टेट बैंक, शाखा अहिवारा ने 36 लाख रुपए का लोन मंजूर कर दिया।
जाहिर है कि सरकारी अभिलेखों की डिजिटाइजेशन प्रक्रिया को अपराधियों ने विश्वास के हथौड़े से तोड़ने की कोशिश की। सवाल उठता है कि सिस्टम में वही घुसपैठ कर सकता है, जिसे भीतर की प्रक्रिया की गहरी समझ हो। इस तरह का छेद सिर्फ चोरी नहीं, व्यवस्था को चुनौती है।
कैसे खुला राज… दोस्ती बनी साजिश, पासवर्ड बना हथियार!
जांच में सामने आया कि आरोपी गणेश तम्बोली को उसके परिचित अशोक उरांव ने पटवारी अभियानों और डिजिटल सिस्टम तक पहुंच का लालच दिया। बदले में मोटी रकम का ऑफर दिया गया। फिर गणेश ने अपने मित्र अमित मौर्य के साथ मिलकर साइबर जाल बुन दिया।
यह टीम तकनीकी जानकारी का दुरुपयोग करने में माहिर थी। उन्होंने पोर्टल में लॉगिन कर फर्जी एंट्री डाली, जमीन का रकबा बढ़ाया और इसे बैंक लोन का आधार बना दिया। पुलिस के मुताबिक इस अपराध में तकनीक, चालाकी और भरोसे के दुरुपयोग का खतरनाक संगम दिखाई देता है।
पहले भी हो चुकी गिरफ्तारी, अब और बड़े खुलासे की उम्मीद!
इस मामले में नंदकिशोर साहू की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। वहीं दीनू राम यादव और एस राम बंजारे सहित कुछ अन्य संदिग्धों पर भी जांच का शिकंजा कस रहा है। पुलिस को शक है कि यह कोई छोटा गिरोह नहीं, बल्कि संगठित नेटवर्क है जो सरकारी डिजिटल डेटा से खिलवाड़ कर आर्थिक लाभ कमाता है।
जांच एजेंसियां अब उन सभी संभावित खातों, मोबाइल नंबरों और बैंक डिटेल्स की पड़ताल कर रही हैं, जिनसे इस साजिश में संपर्क या लेन-देन हुआ। यह मामला सिर्फ दो-तीन लोगों के गिरने से खत्म नहीं होने वाला। यह तो बस शुरुआत है।
डिजिटल शासन के लिए खतरे की घंटी: सुरक्षा सिस्टम पर सवाल!
यह प्रकरण न सिर्फ अपराध का मामला है, बल्कि पूरे डिजिटल प्रशासन पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है। भुइया पोर्टल ग्रामीण भूमि अभिलेख का आधार है। इससे छेड़छाड़ का मतलब किसानों, जमीन मालिकों और सरकारी योजनाओं को सीधे खतरे में डालना है।
आज की दुनिया में डेटा ही शक्ति है। ऐसे में सिस्टम की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले अपराधियों के लिए कड़ी सजा और तकनीकी सुरक्षा मजबूत करना जरूरी है। नहीं तो यह मामला मिसाल बन जाएगा और अन्य साइबर अपराधियों को हौसला मिलेगा।
जनता में रोष, पुलिस ने दिया सख्त संदेश!
स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। जमीन से जुड़े मामलों में अनियमितता अक्सर विवाद और आर्थिक तबाही की वजह बनती हैं। भिलाई के नागरिकों का कहना है कि अगर ऐसे अपराधियों पर नकेल नहीं कसी गई तो लोग डिजिटल सेवाओं पर विश्वास खो बैठेंगे।
पुलिस ने साफ कहा कि साइबर अपराध चाहे कितना भी जटिल क्यों न हो, आरोपी चाहे कहीं भी छिपा हो, कानून उसे पकड़ ही लेता है। यह कार्रवाई बाकी अपराधियों के लिए चेतावनी है।
यह मामला सिर्फ 36 लाख की धोखाधड़ी नहीं, यह सरकारी डिजिटल तंत्र पर हमला है। तकनीक ने जीवन को आसान किया है, मगर इसका गलत इस्तेमाल समाज के लिए गंभीर खतरा है। ऐसे में आवश्यक है कि जनता सतर्क रहे, प्रशासन प्रणाली मजबूत करे और कानून अपराधियों को कठोर संदेश दे।
विश्वास डिजिटल है, मगर खतरे भी डिजिटल हैं। इस लड़ाई में जीत मिलेगी तभी जब तंत्र मजबूत और जनता जागरूक होगी।













