श्रीकृष्ण लीला और शहीदों को नमन: मुंगेली पुलिस परिवार का भव्य आयोजन!
Mungeli/छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिला की धरती शनिवार को धर्म, भक्ति और बलिदान की अद्भुत त्रिवेणी से सराबोर हो उठी। अवसर था मुंगेली जिला पुलिस परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ कथा का, जिसमें धर्म की गंगा और वीर शहीदों की अमर गाथा का संगम देखने को मिला। इस आयोजन में छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, वरिष्ठ विधायक मुंगेली पन्नूलाल मोहले, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक और मुंगेली पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल की गरिमामयी उपस्थिति ने कथा-स्थल की शोभा बढ़ा दी।
शहीदों को श्रद्धांजलि, परिवारों का सम्मान!
कार्यक्रम की शुरुआत में पुलिस परिवार और आमजन ने उन अमर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने अपनी प्राण आहुति देकर मातृभूमि की रक्षा की।
मंच से उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा—
“शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाता। उनके पराक्रम की गाथा समाज को प्रेरणा देती है। पुलिस जवानों के त्याग से ही समाज सुरक्षित और मजबूत है।”
इसी भाव के साथ केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने भी कहा कि शहीद परिवारों का साहस हमें नई ऊर्जा देता है और सरकार हमेशा उनके साथ खड़ी है।
पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल ने भावुक होते हुए कहा—
“यह आयोजन केवल धार्मिक कथा नहीं है, बल्कि यह हमारे उन साथी जवानों की याद का प्रतीक है, जिन्होंने कर्तव्य-पालन में अपने जीवन की आहुति दी। पुलिस परिवार उनके परिवारों के साथ सदैव खड़ा रहेगा।”
कथा में झलकी श्रीकृष्ण लीला!
कथा के चौथे दिन व्यास पीठ पर विराजमान महाराज उमाकांत मिश्र और सूरज मिश्र ने श्रीकृष्ण लीला और गोवर्धन पूजा का रसपान कराया। कथावाचन सुनकर पूरा पंडाल भक्ति भाव से सरोबर हो उठा। जब श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार को तोड़कर गोवर्धन पर्वत उठाया, तो श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कथा के बीच भजन और संकीर्तन की गूंज से वातावरण और अधिक दिव्य बन गया।
श्रद्धालुओं ने अनुभव किया कि यह कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। इसमें सकाम और निष्काम कर्म, ज्ञान और भक्ति, मर्यादा और समर्पण जैसे गूढ़ रहस्यों का उद्घाटन हुआ।
पुलिस परिवार का अद्वितीय संगम!
इस आयोजन में पुलिस अधिकारी, कर्मचारी और उनके परिवार बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए। शहीद जवानों के परिजनों ने भी कथा श्रवण कर आध्यात्मिक शांति का अनुभव किया। वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों ने उनके साथ बैठकर भजन गाए और मनोबल बढ़ाया। यह क्षण इस बात का प्रतीक बना कि धर्म और कर्तव्य का संगम ही समाज को मजबूत करता है।
भक्ति और बलिदान का संदेश!
भागवत कथा ने यह सिखाया कि सच्ची पूजा केवल मंदिरों तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्तव्यपालन और समाज सेवा में भी निहित है। महाराज उमाकांत मिश्र ने कहा—
“भक्ति तभी सार्थक है जब उसमें कर्तव्य और बलिदान का समावेश हो। शहीदों का जीवन इसका सर्वोत्तम उदाहरण है।”
इस अवसर पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा—
“आज का आयोजन भावी पीढ़ी को यह संदेश देता है कि धर्म और कर्तव्य साथ-साथ चलते हैं। शहीदों का सम्मान और भगवान की कथा, दोनों हमारे जीवन को दिशा देते हैं।”
आयोजन की गूंज!
कथा में आए श्रद्धालुओं ने कहा कि पुलिस परिवार का यह प्रयास अद्वितीय है। इसने न केवल आध्यात्मिक वातावरण बनाया, बल्कि समाज को यह भी याद दिलाया कि सुरक्षा और शांति की नींव शहीदों के बलिदान से मजबूत होती है।
उपसंहार!
मुंगेली की इस शाम ने यह सिद्ध कर दिया कि जब धर्म और कर्तव्य एक साथ खड़े हों, तो समाज में नई ऊर्जा का संचार होता है। श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से लेकर गोवर्धन पूजा तक की कथा जहां भक्तों को भावविभोर कर गई, वहीं शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि ने उपस्थित हर व्यक्ति के मन को गर्व से भर दिया।
यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से सफल रहा, बल्कि यह पुलिस परिवार के उस संकल्प का भी सशक्त प्रतीक बना—
“हम शहीदों की स्मृति को सदैव जीवित रखेंगे और उनके परिवारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे।”













