March 4, 2026 1:32 pm

“पिथौरा के किशनपुर में उपसरपंच पर गंभीर आरोप:शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा, गांव में दहशत और अशांति – उग्र आंदोलन की चेतावनी…”

“पिथौरा के किशनपुर में उपसरपंच पर गंभीर आरोप: शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा, गांव में दहशत और अशांति – उग्र आंदोलन की चेतावनी…”

Mahasamund/ जिला महासमुन्द के विकासखण्ड पिथौरा के अंतर्गत ग्राम किशनपुर में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां के उपसरपंच चम्पेश्वर साहू पर आरोप है कि उन्होंने न केवल शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर मकान और कॉम्प्लेक्स खड़ा कर दिया, बल्कि उसे किराये पर भी दे रखा है। यही नहीं, ग्रामीणों का कहना है कि उपसरपंच का रवैया पूरी तरह दबंगई और आपराधिक प्रवृत्ति से भरा हुआ है। इस पूरे विवाद ने गांव में भय और अशांति का माहौल पैदा कर दिया है।

ग्रामीणों ने अवैध कब्जे का आरोप का लगाया आरोप!
ग्रामीणों  ने पिथौरा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को लिखित आवेदन देकर गंभीर आरोप लगाए हैं कि किशनपुर के उपसरपंच चम्पेश्वर साहू ने स्कूल के सामने शासकीय भूमि पर कब्जा कर मकान और कॉम्प्लेक्स बना लिया है। इसे उन्होंने किराये पर देकर आर्थिक लाभ कमाना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत राज अधिनियम के अनुसार कोई भी पंचायत पदाधिकारी यदि शासकीय भूमि पर कब्जा करता है, तो उसे पद से तत्काल पृथक किया जाना चाहिए।

दबंगई और धमकियों का खेल!
आवेदन में यह भी कहा गया है कि चम्पेश्वर साहू शुरू से ही “गुंडा और क्रिमिनल प्रवृत्ति” के व्यक्ति हैं। गांव के लोग बताते हैं कि यदि कोई भी उनके खिलाफ आवाज उठाता है तो वह उसे फर्जी मामलों में फंसाने की धमकी देने लगता है। महिला सरपंच को भी लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। पंचायत सचिव से वह प्रत्येक कार्य में 5% कमीशन की खुली मांग करता है, और न देने पर फंसाने की धमकी देता है।

गांव में गरीब परिवारों में भय की स्थिति!
गांव के कई परिवारों का कहना है कि वे लगातार डर के साए में जी रहे हैं। आवेदन में नामजद ग्रामीण राजकुमार बरिहा, बलभद्र साहू और दिलकुमार बाघ का कहना है कि उनके खिलाफ उपसरपंच ने पहले ही कलेक्टर के पास आवेदन देकर दंडात्मक कार्यवाही की मांग की है। इससे पूरे गांव में गरीब तबकों के बीच दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि वे अब और सहन नहीं करेंगे।

ग्रामीणों द्वारा आंदोलन की चेतावनी!
गांववासियों ने जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि 19 सितम्बर 2025 तक उपसरपंच को पद से पृथक कर अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो वे 23 सितम्बर से उग्र आंदोलन और धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे। ग्रामीणों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि आंदोलन से उत्पन्न स्थिति की सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

दूसरी तरफ पलटवार!
इसी मामले में अब एक और पक्ष सामने आया है। पूर्व में उपसरपंच चम्पेश्वर साहू के समर्थकों ने भी कलेक्टर को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि गांव में अशांति और अव्यवस्था फैलाने की असली कोशिश कुछ ग्रामीण कर रहे हैं। आवेदन में कहा गया है कि राजकुमार बरीहा, बलभद्र साहू और दिलकुमार मृधा स्वयं को “36 कुल समाज” का अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव बताकर फर्जी तरीके से राजनीति कर रहे हैं।

आवेदन में यह भी लिखा गया है कि ये लोग पंचायत सचिव पुनीत राम सिन्हा का बचाव कर गांव की जनता को जाति और धर्म के नाम पर भड़काते हैं। इससे गांव का माहौल बिगड़ रहा है और कभी भी विद्रोह जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। चम्पेश्वर समर्थकों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे लोगों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्यवाही की जाए।

गांव में माहौल गर्म!
अब हालात यह हैं कि दोनों गुट आमने-सामने खड़े हो गए हैं। एक ओर उपसरपंच पर अवैध कब्जे और दबंगई के आरोप हैं, तो दूसरी ओर उनके विरोधियों पर गांव में जातिगत विभाजन और अव्यवस्था फैलाने का आरोप लगाया जा रहा है। दोनों पक्ष प्रशासन से एक-दूसरे पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

ग्रामीणों में उबाल
गांव के सामान्य ग्रामीण इस पूरे घटनाक्रम से परेशान और डरे हुए हैं। वे कहते हैं कि पंचायत के कामकाज ठप पड़ गए हैं। विकास कार्य रुक गए हैं, क्योंकि हर निर्णय में विवाद खड़ा कर दिया जाता है। गरीब और कमजोर तबकों का कहना है कि वे प्रशासन से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं, परंतु यदि न्याय नहीं मिला तो वे सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।

प्रशासन की जिम्मेदारी!
अब सवाल यह है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाएगा ? ग्रामीणों की लिखित शिकायत और आंदोलन की चेतावनी प्रशासन के लिए चुनौती है। यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो किशनपुर गांव में तनाव और टकराव की स्थिति और गहरी हो सकती है।

“लेकिन तहसीलदार पिथौरा द्वारा ग्रामीणों द्वारा दिये गए शिकायत पत्र में तुरंत संज्ञान लेते हुए पटवारी को मौका जांच करते हुऐ प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिये लेख किया गया है।” 

कुल मिलाकर, किशनपुर का यह विवाद सिर्फ एक व्यक्ति या पद का नहीं, बल्कि गांव के सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक व्यवस्था की परीक्षा बन गया है। आने वाले कुछ दिनों में प्रशासनिक फैसले यह तय करेंगे कि गांव में शांति लौटेगी या फिर संघर्ष और आंदोलन की लपटें पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में लेंगी।

तहसीलदार पिथौरा द्वारा ग्रामीणों द्वारा दिये गए शिकायत पत्र में तुरंत संज्ञान लेते हुए पटवारी को मौका जांच करते हुऐ प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिये लेख किया गया है।

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