वन विभाग में 24 IFS अफसरों का ‘महाफेरबदल’!
महासमुंद के नयें वनमण्डलाधिकारी श्रीनिवास तन्नेटी होगे, तबादले की सूची आते ही मचा हड़कंप, किसी को नई कुर्सी तो किसी को मिला अतिरिक्त प्रभार—वन महकमे में अब किसकी चलेगी हुकूमत?
रायपुर। छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में शनिवार को जारी हुआ 24 IFS अधिकारियों के तबादले का आदेश महज प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि वन विभाग के भीतर बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। आदेश सामने आते ही विभागीय गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। वर्षों से महत्वपूर्ण पदों पर जमे अधिकारियों से लेकर नई जिम्मेदारी पाने वाले अफसरों तक—हर किसी की नजर अब नई पदस्थापना और उसके संभावित असर पर टिक गई है।
वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने एक साथ 24 भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों के तबादले किए हैं। आदेश में कई अधिकारियों को नई पदस्थापना के साथ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा पंकज राजपूत पंकज राजपूत, भा.व.से. (2014) वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), खैरागढ़,वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), रायपुर की जिम्मेदारी सौंपी गई है
वही गणवीर धम्मशील को वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), बलौदाबाजार सेविशेष सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, मंत्रालय नवा रायपुर अटल नगर. (प्रतिनियुक्ति पर)की जिम्मेदारी सौंपी गई है
उत्तम कुमार गुप्ता, भा.व.से. (2013)वन उप संरक्षक (प्रादेशिक), बस्तर जगदलपुर प्रभारी मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) एवं क्षेत्र निदेशक, इंद्रावती टाइगर रिजर्व, जगदलपुर सौंपे की जिम्मेदारी सौंपी गई है वहीं दुलेश्वर प्रसाद को वन उप संरक्षक, मनेंद्रगढ़ के पद पर पदस्थ किया गया है।
एक आदेश… और बदल गया वन विभाग का पूरा समीकरण!
वन विभाग में पद और प्रभार की अपनी अलग अहमियत होती है। किसी अधिकारी की पदस्थापना केवल कार्यालय बदलने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसके साथ प्रशासनिक अधिकार, निर्णय लेने की जिम्मेदारी और विभागीय योजनाओं के संचालन की दिशा भी बदलती है। ऐसे में 24 अधिकारियों के एक साथ हुए फेरबदल ने स्वाभाविक रूप से विभाग के भीतर हलचल पैदा कर दी है।
कई अधिकारियों के लिए यह आदेश नई जिम्मेदारी और नई चुनौती लेकर आया है, तो कुछ के लिए पुरानी व्यवस्था से बाहर निकलकर नई जगह काम करने का अवसर। वहीं जिन अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर नई जिम्मेदारी मिली है, उनके सामने अब विभागीय कामकाज को गति देने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
गणवीर धम्मशील को मंत्रालय की बड़ी जिम्मेदारी!
तबादला आदेश में गणवीर धम्मशील को मंत्रालय में विशेष सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। मंत्रालय में पदस्थापना को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहां से विभाग की नीतियों, योजनाओं और प्रशासनिक निर्णयों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
अब सवाल यह है कि नई जिम्मेदारी के साथ विभागीय कामकाज में किस तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे? क्या फाइलों के निपटारे की गति बढ़ेगी? क्या वन संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन और विभागीय योजनाओं की मॉनिटरिंग में नई कार्यशैली दिखाई देगी? इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा।
उत्तम कुमार गुप्ता के कंधों पर वन्यजीवों की बड़ी जिम्मेदारी!
उत्तम कुमार गुप्ता को प्रभारी PCCF (वन्य प्राणी) की जिम्मेदारी सौंपना भी आदेश का प्रमुख हिस्सा है। वन्यजीव प्रबंधन का क्षेत्र छत्तीसगढ़ जैसे वनबहुल राज्य में बेहद संवेदनशील माना जाता है। मानव-वन्यजीव संघर्ष, वन्यजीव संरक्षण, संरक्षित क्षेत्रों का प्रबंधन और वन्यजीव अपराधों की रोकथाम जैसे विषय लगातार चुनौती बने हुए हैं।
ऐसे में प्रभारी PCCF वन्य प्राणी के रूप में नई जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी के सामने विभागीय अपेक्षाएं भी बड़ी रहेंगी।
तबादले से किसका कद बढ़ा और किसकी बदली भूमिका?
24 अधिकारियों के फेरबदल को लेकर वन विभाग में चर्चाएं तेज हैं। प्रशासनिक तबादलों का एक सामान्य उद्देश्य विभागीय कार्यप्रणाली में नई ऊर्जा लाना और अधिकारियों की जिम्मेदारियों का पुनर्विन्यास करना होता है। लेकिन इतने बड़े स्तर पर फेरबदल होने पर यह भी स्वाभाविक है कि विभाग के भीतर हर अधिकारी अपनी नई भूमिका को लेकर मंथन करे।
किस अधिकारी को कौन सा क्षेत्र मिला, किसे महत्वपूर्ण प्रभार दिया गया और किस अधिकारी को अपेक्षाकृत अलग जिम्मेदारी मिली—इन तमाम सवालों को लेकर विभागीय गलियारों में चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं।
क्या बदलेगी वन विभाग की कार्यशैली?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह फेरबदल सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा या जमीन पर भी इसका असर दिखाई देगा?
वन विभाग के सामने अवैध कटाई, वन भूमि संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष, वन अपराधों पर नियंत्रण और विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन जैसी कई चुनौतियां हैं। नई पदस्थापनाओं के बाद अधिकारियों से अपेक्षा होगी कि वे इन क्षेत्रों में बेहतर परिणाम दें।
विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर होगी कि नई टीम किस तरह विभागीय प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाती है और जिलों से लेकर मुख्यालय तक प्रशासनिक समन्वय कितना मजबूत होता है।
तबादला आदेश ने उड़ाए ‘होश’, लेकिन असली परीक्षा अब!
फिलहाल 24 IFS अधिकारियों के तबादले ने वन विभाग के भीतर प्रशासनिक हलचल जरूर बढ़ा दी है। जिन अधिकारियों को नई जिम्मेदारी मिली है, उनके लिए यह मौका भी है और परीक्षा भी। नई कुर्सी के साथ नई जवाबदेही आएगी और अब कामकाज के परिणाम ही बताएंगे कि यह बड़ा प्रशासनिक फेरबदल कितना प्रभावी साबित होता है।
एक बात साफ है—वन विभाग में कुर्सियां बदली हैं, जिम्मेदारियां बदली हैं और अब निगाहें परिणामों पर रहेंगी।
क्या यह फेरबदल वन प्रशासन में नई जान फूंकेगा? क्या महत्वपूर्ण पदों पर आए नए अधिकारी लंबित मामलों और विभागीय चुनौतियों को तेजी से निपटाएंगे? या फिर कुछ समय बाद यह तबादला आदेश भी सामान्य प्रशासनिक कवायद बनकर रह जाएगा?
इन सवालों का जवाब आने वाला समय देगा। फिलहाल इतना जरूर है कि 24 IFS अधिकारियों की तबादला सूची ने वन विभाग के भीतर हलचल पैदा कर दी है और नई पदस्थापनाओं के साथ विभाग में नए समीकरण बनने शुरू हो गए हैं।













