August 27, 2026 10:09 pm

तुम्हर द्वार,तुम्हर राशन कार्ड:महासमुंद में राशन सेवा का नया प्रयोग—अब पंचायत में ही बनेगा राशन कार्ड!

तुम्हर द्वार,तुम्हर राशन कार्ड:महासमुंद में राशन सेवा का नया प्रयोग—अब पंचायत में ही बनेगा राशन कार्ड!

नवीन जिला खाद्य अधिकारी आशीष चतुर्वेदी की पहल से बदलेगी व्यवस्था, 270 ग्राम पंचायतों को मिली ऑनलाइन आईडी; 1 सितम्बर के बाद ग्रामीणों को मिलने लग सकती है सुविधा,

महासमुंद /छत्तीसगढ़ में सरकारी दफ्तर की सीढ़ियां, आवेदन लेकर भटकते ग्रामीण, राशन कार्ड में नाम जुड़वाने या सुधार कराने के लिए बार-बार जिला मुख्यालयों के चक्कर और फिर वही इंतजार…। ग्रामीणों के लिए राशन कार्ड से जुड़ा काम लंबे समय से किसी परीक्षा से कम नहीं रहा है। लेकिन अब महासमुंद जिले में इस कहानी का दृश्य बदलता दिखाई दे रहा है। जिले में जिला खाद्य अधिकारी आशीष चतुर्वेदी के पदभार संभालने के बाद राशन कार्ड संबंधी सेवाओं को ग्रामीणों की पंचायत तक पहुंचाने की दिशा में एक नई पहल शुरू की गई है।

इस पहल को फिलहाल “तुम्हर द्वार, तुम्हर राशन कार्ड” के रूप में देखा जा रहा है। सबसे खास बात यह है कि ग्रामीणों को हर छोटे-बड़े राशन कार्ड संबंधी काम के लिए जिला खाद्य कार्यालय या कलेक्टर जनदर्शन की ओर दौड़ लगाने की जरूरत कम हो सकती है। अब उनकी अपनी ग्राम पंचायत में ही राशन कार्ड से संबंधित विभिन्न कार्यों की सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।

270 पंचायतों में ऑनलाइन आईडी जारी, बाकी का काम निरंतर जारी!

जानकारी के अनुसार महासमुंद जिले की 270 ग्राम पंचायतों में ऑनलाइन आईडी जारी कराने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। यह व्यवस्था “स्मार्ट पीडीएस” के माध्यम से संचालित किए जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है। शेष ग्राम पंचायतों की आईडी तैयार करने का काम भी निरंतर जारी है।

यानी जिस काम के लिए ग्रामीणों को पहले पंचायत से लेकर ब्लॉक और फिर जिला मुख्यालय तक दौड़ लगानी पड़ती थी, उसी काम को अब जिला खाद्य अधिकारी महासमुंद आशीष चतुर्वेदी द्वारा पंचायत स्तर पर राशन कार्ड बनाने की सुविधा उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।

यह पहल कागज पर जितनी सरल दिखाई देती है, जमीन पर इसका असर उतना ही बड़ा हो सकता है। खासकर बुजुर्ग, महिलाएं, दिव्यांगजन और दूरदराज के गांवों में रहने वाले ऐसे ग्रामीण, जिनके लिए जिला मुख्यालय तक पहुंचना समय और पैसे दोनों की बर्बादी बन जाता है, उन्हें इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

जनदर्शन की कतार से पंचायत के दरवाजे तक!

महासमुंद जिले में राशन कार्ड से जुड़ी शिकायतों और समस्याओं को लेकर ग्रामीणों को अक्सर अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई बार छोटी-सी जानकारी या सुधार के लिए भी ग्रामीणों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

अब नई व्यवस्था का उद्देश्य यही है कि “सरकार की सेवा ग्रामीण के पास पहुंचे, ग्रामीण सेवा के पीछे न भागे”

यही वजह है कि जिला खाद्य अधिकारी आशीष चतुर्वेदी की इस पहल को प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो ग्रामीणों को राशन कार्ड बनवाने, आवश्यक संशोधन कराने और संबंधित प्रक्रियाओं के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधा मिल सकेगी।

छत्तीसगढ़ में महासमुंद बना पहला जिला?

“तुम्हर द्वार, तुम्हर राशन कार्ड” कि यह अनूठी  व्यवस्था को लेकर महासमुंद जिले का नाम छत्तीसगढ़ में सबसे आगे बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस पहल में महासमुंद पहले स्थान पर और बस्तर दूसरे स्थान पर बताया जा रहा है।

अगर यह दावा और व्यवस्था व्यवहारिक स्तर पर भी उसी तरह सफल होती है, जैसा इसका उद्देश्य है, तो महासमुंद जिले की यह पहल दूसरे जिलों के लिए भी मॉडल बन सकती है।

अब सवाल केवल इतना नहीं है कि पंचायतों को ऑनलाइन आईडी मिल गई है या प्रक्रिया शुरू हो गई है। असली परीक्षा तब होगी, जब कोई ग्रामीण पंचायत में पहुंचेगा और उसे वास्तव में राशन कार्ड से संबंधित सेवा समय पर, आसानी से और बिना अनावश्यक परेशानी के मिलेगी।

1 सितम्बर के बाद असली परीक्षा!

बताया जा रहा है कि “1 सितम्बर के बाद ग्रामीणों को इस सुविधा का लाभ मिलना शुरू हो सकता है”ऐसे में आने वाला समय इस नई व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने रखेगा।

कागज पर व्यवस्था शानदार है, आईडी जारी हो चुकी हैं, पंचायतों को जोड़ा जा रहा है और ग्रामीणों के दरवाजे तक सेवा पहुंचाने का सपना दिख रहा है। लेकिन सरकारी योजनाओं की असली सफलता फाइलों में नहीं, बल्कि आम आदमी के अनुभव में दिखाई देती है।

अगर ग्रामीण को पंचायत में ही राशन कार्ड की सुविधा मिल गई, उसे बार-बार कार्यालय नहीं जाना पड़ा, आवेदन की स्थिति की जानकारी आसानी से मिल गई और उसका काम समय-सीमा में हो गया—तभी माना जाएगा कि “तुम्हर द्वार, तुम्हर राशन कार्ड” वास्तव में जमीन पर उतर गया।”

अब नजर व्यवस्था की निगरानी पर!

नई व्यवस्था शुरू होने के बाद सबसे महत्वपूर्ण भूमिका ग्राम पंचायत स्तर पर काम करने वाले जिम्मेदार कर्मचारियों की होगी। ऑनलाइन आईडी जारी होना पहला कदम है, लेकिन उसके बाद आवेदन की एंट्री, दस्तावेजों की जांच, सुधार और आगे की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और समयबद्ध रहती है, यह देखना भी जरूरी होगा।

ग्रामीणों को सुविधा देने वाली किसी भी व्यवस्था में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है। यदि पंचायत स्तर पर सुविधा मिलती है और ग्रामीणों को सही जानकारी उपलब्ध होती है तो यह व्यवस्था निश्चित तौर पर राहत देने वाली साबित हो सकती है।

क्या दूसरे जिले भी अपनाएंगे महासमुंद मॉडल?

महासमुंद जिले की यह पहल अब केवल जिले तक सीमित चर्चा नहीं रह सकती। यदि यह प्रयोग सफल हुआ तो छत्तीसगढ़ के दूसरे जिलों के लिए भी यह एक उदाहरण बन सकता है।

अब देखना यह होगा कि “महासमुंद के जिला खाद्य अधिकारी आशीष चतुर्वेदी की कार्यप्रणाली को छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों के जिला खाद्य कार्यालय कितनी गंभीरता से अपनाते हैं।”

फिलहाल महासमुंद के ग्रामीणों के लिए उम्मीद की एक नई खिड़की खुली है। जिस राशन कार्ड के लिए कभी जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती थी, अगर वही काम पंचायत के दरवाजे पर होने लगे तो इसे प्रशासनिक व्यवस्था में छोटा नहीं, बल्कि बड़ा बदलाव कहा जाएगा।

अब फाइलों की नहीं, मैदान की बारी है।

1 सितम्बर के बाद पता चलेगा—“तुम्हर द्वार, तुम्हर राशन कार्ड” सिर्फ नारा है या सचमुच ग्रामीणों के घर-द्वार तक पहुंची सरकारी सुविधा की नई कहानी!

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