महासमुंद में छोटे बच्चों की जान पर चल रही ‘खतरे की इंग्लिश क्लास’! जिला प्रशासन मौन, हादसे का इंतजार या कार्रवाई? रायपुर में हुई सख्ती, लेकिन सत्यम इंग्लिश स्पीकिंग सेंटर पर क्यों खामोशी?”
महासमुंद। शिक्षा को भविष्य की नींव कहा जाता है, लेकिन यदि वही शिक्षा बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा बन जाए तो यह किसी भी समाज और प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है। महासमुंद शहर में संचालित सत्यम इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स को लेकर लगातार उठ रहे सुरक्षा संबंधी सवालों के बावजूद जिला प्रशासन की चुप्पी अब लोगों के बीच बहस का विषय बन चुकी है। सबसे बड़ा प्रश्न यही उठ रहा है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा? क्या कोई हादसा होने बाद ही कार्रवाई होगी, या फिर समय रहते बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी?
इस पूरे मामले को लेकर पहले भी समाचारों के माध्यम से जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया जा चुका है। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। इसके बावजूद अब तक न तो किसी प्रकार की जांच की सूचना सामने आई है और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा स्थिति का निरीक्षण किए जाने की पुष्टि हुई है। इससे यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि प्रशासन फिलहाल मूकदर्शक बना बैठा है।
स्थिति तब और गंभीर दिखाई देती है जब यह जानकारी सामने आती है कि संबंधित भवन में छोटे-छोटे बच्चों के लिए आवश्यक बुनियादी सुरक्षा सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। आरोप है कि भवन में बच्चों के उपयोग के लिए समुचित शौचालय नहीं है, आपातकालीन निकासी (इमरजेंसी एग्जिट) की व्यवस्था नहीं है तथा पूरा आवागमन केवल एक ही प्रवेश द्वार से होता है। यदि किसी भी कारण से आग, शॉर्ट सर्किट या अन्य आपात स्थिति उत्पन्न हो जाए, तो बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना बेहद कठिन हो सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस कमरे में बच्चों की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं, उसके ऊपर अस्थायी झिल्ली अथवा टीननुमा आवरण लगाया गया है। भीषण गर्मी के मौसम में ऐसे कमरे का तापमान अत्यधिक बढ़ सकता है। इससे छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सबसे चिंताजनक पहलू यह बताया जा रहा है कि भवन के ऊपर से हाई टेंशन बिजली लाइन भी गुजर रही है। ऐसे में किसी भी अप्रत्याशित घटना की आशंका को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इस विषय में जब कोचिंग संचालक से सुरक्षा संबंधी प्रश्न पूछे गए तो कथित रूप से उन्होंने जिम्मेदारी भवन मालिक पर डालने की बात कही। हालांकि जानकारों का मानना है कि किसी भी व्यावसायिक गतिविधि का संचालन करने वाले व्यक्ति की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति प्राप्त करे तथा सभी सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करे। भवन मालिक और संचालक की जिम्मेदारियां अलग-अलग होती हैं। इसलिए किसी भी संभावित दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी से बचने का तर्क कानूनी रूप से भी कई सवाल खड़े कर सकता है।
सबसे हैरानी की बात यह भी सामने आई कि जब इस विषय पर जिला शिक्षा अधिकारी बी. एल.देवांगन से जानकारी ली गई तो उन्होंने कथित रूप से यह कहकर अपने दायित्व से पल्ला झाड़ लिया कि यह मामला उनके विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। अब सवाल यह उठता है कि यदि शिक्षा विभाग इसे अपना विषय नहीं मानता, तो आखिर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किस विभाग की है? क्या अलग-अलग विभाग जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालते रहेंगे और इस बीच बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी जाएगी?
प्रदेश में हाल ही में कुछ दिनों पहले सुरक्षा मानकों को लेकर सख्ती भी देखने को मिली थी। रायपुर सहित कई स्थानों पर कोचिंग संस्थानों की व्यापक जांच की गई। कई संस्थानों में नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई भी की गई और अनेक कोचिंग सेंटर बंद कराए गए। ऐसे में महासमुंद के इस मामले में अब तक किसी प्रकार की प्रभावी कार्रवाई न होना लोगों के मन में अनेक सवाल खड़े कर रहा है। यदि एक जिले में नियम लागू हो सकते हैं, तो दूसरे जिले में उन्हीं नियमों की अनदेखी क्यों?
अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद के साथ कोचिंग संस्थानों में भेजते हैं। लेकिन यदि वहां सुरक्षा के मूलभूत मानकों का ही अभाव हो, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि बच्चों के जीवन के साथ गंभीर जोखिम भी माना जा सकता है। उनका कहना है कि प्रशासन को किसी घटना के बाद नहीं बल्कि उससे पहले सक्रिय होना चाहिए।
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि किसी भी शिक्षण संस्थान में पर्याप्त वेंटिलेशन, अग्निशमन उपकरण, सुरक्षित विद्युत व्यवस्था, स्वच्छ शौचालय, पर्याप्त बैठने की जगह और आपातकालीन निकासी मार्ग जैसी सुविधाएं आवश्यक होती हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य केवल नियमों का पालन करना नहीं बल्कि बच्चों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।
महासमुंद शहर में तेजी से बढ़ते निजी कोचिंग संस्थानों के बीच यह मामला पूरे जिले के लिए एक चेतावनी भी माना जा रहा है। यदि एक संस्थान में इस प्रकार की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो यह आवश्यक हो जाता है कि प्रशासन पूरे जिले में संचालित सभी निजी कोचिंग संस्थानों का व्यापक सर्वे कर सुरक्षा मानकों की जांच करे। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कहीं अन्य स्थानों पर भी इसी प्रकार की स्थितियां तो नहीं हैं।
अब सबसे बड़ा प्रश्न जिला प्रशासन के सामने खड़ा है। क्या प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच टीम गठित करेगा? क्या संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्थाओं का परीक्षण करेंगे? यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो क्या आवश्यक कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला भी केवल शिकायतों और समाचारों तक सीमित रह जाएगा?
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि जिला प्रशासन तत्काल निष्पक्ष जांच कराए तथा यदि किसी भी प्रकार की सुरक्षा संबंधी कमी पाई जाती है तो नियमों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा किसी भी स्थिति में समझौते का विषय नहीं हो सकती।
फिलहाल महासमुंद में यह मुद्दा चर्चा के केंद्र में है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। क्या प्रशासन समय रहते बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देगा, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा? इस प्रश्न का उत्तर आने वाला समय और प्रशासन की कार्रवाई ही देगा।












