VIP भी भयभीत, जनता कहे — अब तो भगवान ही हैं ‘होमगार्ड’! : कानून व्यवस्था की ‘वीआईपी परीक्षा’ में सरकार फिर फेल?” कृष्ण कुमार चंद्राकर।
“जब पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ही असुरक्षित, तो आम जनता का सुरक्षा कवच कहीं छुट्टी पर तो नहीं?”
महासमुंद। प्रदेश की कानून व्यवस्था पर एक बार फिर सवालों का पहाड़ टूट पड़ा है। प्रदेश के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं वर्तमान बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक के साथ हाल ही में हुई घटना ने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इस पूरे मामले पर कांग्रेस पार्टी के पूर्व कार्यकारी नगर पालिका अध्यक्ष कृष्ण कुमार चंद्राकर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे प्रदेश की “लचर और ध्वस्त कानून व्यवस्था” का जीवंत प्रमाण बताया है।
कृष्णा चंद्राकर ने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा कि लगता है प्रदेश में अपराधियों का आत्मविश्वास इस कदर बढ़ चुका है कि अब उन्हें किसी कानून, पुलिस या कार्रवाई का भय नहीं रहा। अपराधी अपराध सायं सायं करने में लगे है अपराधियों ने भी यह मान लिया है कि “डर नाम की चीज़ अब केवल फिल्मों के संवादों में बची है।”
उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष जैसे वरिष्ठ और वीआईपी जनप्रतिनिधि तक सुरक्षित नहीं हैं, वहां आम जनता की स्थिति का अनुमान लगाना कोई कठिन गणित नहीं है। जनता अब यह सोचने को मजबूर है कि घर से बाहर निकलते समय सुरक्षा के लिए हेलमेट पहनें, सीसीटीवी लगाएं या सीधे प्रार्थना सभा में शामिल हो जाएं।
राज्य की कानून व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए चंद्राकर ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो अपराधियों को खुली छूट का कोई “अनौपचारिक लाइसेंस” मिल गया हो। चोरी, लूट, हमले और अन्य आपराधिक घटनाओं का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ रहा है, जबकि प्रशासन की सक्रियता नीचे उतरती दिखाई दे रही है। ऐसा लगता है जैसे अपराधों की रफ्तार “बुलेट ट्रेन” बन गई हो और प्रशासन की प्रतिक्रिया “धीमी पैसेंजर ट्रेन” की गति से चल रही हो।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में हालात इतने चिंताजनक हो चुके हैं कि आम लोग अब पुलिस सुरक्षा से ज्यादा अपने पड़ोसियों की सीटी और मोहल्ले के कुत्तों पर भरोसा करने लगे हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था किस दिशा में जा रही है? क्या कानून व्यवस्था केवल सरकारी प्रेस नोटों और बैठकों तक सीमित होकर रह गई है?
कृष्ण कुमार चंद्राकर ने राज्य सरकार और गृह मंत्री पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि बढ़ते अपराधों को लेकर सरकार की संवेदनशीलता कहीं फाइलों के ढेर में दब गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शायद अपराधों के आंकड़े देखकर भी जिम्मेदार लोग यही सोचते होंगे — “सब नियंत्रण में है”, जबकि ज़मीनी हकीकत कुछ और कहानी बयां कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन का भय अपराधियों के मन से लगभग समाप्त होता दिखाई दे रहा है। अपराधी अब इतने निडर हो चुके हैं कि मानो उन्हें यह विश्वास हो गया हो कि कार्रवाई से पहले बहाने और बयानबाजी का लंबा दौर चलेगा। जनता के मन में यह सवाल लगातार गूंज रहा है कि आखिर कानून का राज है या अपराधियों का आत्मविश्वास?
चंद्राकर ने कहा कि सरकार को अब केवल समीक्षा बैठकों और औपचारिक घोषणाओं से आगे बढ़ना होगा। प्रदेश की जनता को सुरक्षा का भरोसा चाहिए, केवल सांत्वना नहीं। यदि वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा ही सवालों के घेरे में है, तो आम नागरिकों की चिंता स्वाभाविक है।
उन्होंने मांग की कि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक के साथ हुई घटना के दोषियों के खिलाफ तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही सरकार को अपनी कथित निष्क्रियता छोड़कर कानून व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि प्रदेश का नागरिक स्वयं को भयमुक्त और सुरक्षित महसूस कर सके।
राजनीतिक गलियारों में इस बयान के बाद चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। एक तरफ सत्ता पक्ष कानून व्यवस्था को मजबूत बताने में जुटा है, वहीं विपक्ष इस घटना को मुद्दा बनाकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है। जनता भी अब यह पूछती दिखाई दे रही है — “अगर VIP सुरक्षा का यह हाल है, तो आम आदमी आखिर किस भरोसे जिए?”












