“एनएच-53 पर ‘नशे का काफिला’ धराशायी: महासमुंद पुलिस की सर्जिकल स्ट्राइक में 312 किलो गांजा जब्त, 1.71 करोड़ का काला खेल खत्म!”
महासमुंद/छत्तीसगढ़ के शांत माने जाने वाले महासमुंद जिले में उस वक्त सनसनी फैल गई जब पुलिस ने एक ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसने अंतरराज्यीय नशा तस्करी के नेटवर्क की जड़ें हिला दीं। एनएच-53 पर सिंघोड़ा थाना क्षेत्र के रेहटीखोल में की गई इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ ने न सिर्फ 312 किलो गांजा जब्त किया, बल्कि करोड़ों के इस काले कारोबार के कई बड़े खिलाड़ियों को भी बेनकाब कर दिया।
यह पूरी कार्रवाई किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं थी—गुप्त सूचना, नाकाबंदी, पीछा, गिरफ्तारी और फिर 12 घंटे के भीतर देश के अलग-अलग कोनों से जुड़े तस्करों की धरपकड़। पुलिस की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अब नशे के सौदागरों के लिए महासमुंद की धरती सुरक्षित नहीं रही।
“सूचना से एक्शन तक: कैसे बिछाया गया जाल?”
एन्टी नारकोटिक टास्क फोर्स को गुप्त सूचना मिली थी कि ओडिशा से एक ट्रक के जरिए भारी मात्रा में गांजा महाराष्ट्र की ओर भेजा जा रहा है। सूचना मिलते ही महासमुंद पुलिस हरकत में आई और एनएच-53 पर रेहटीखोल के पास सख्त नाकाबंदी कर दी गई।
कुछ ही देर में कर्नाटक नंबर का ट्रक KA 13 D 7710 पुलिस के जाल में फंस गया। ट्रक को रोककर जब तलाशी ली गई, तो उसके भीतर छिपा था ‘नशे का पहाड़’—312.590 किलोग्राम गांजा!
“दो चेहरे, एक साजिश: कर्नाटक से मध्यप्रदेश तक फैला नेटवर्क”!
ट्रक में बैठे दो व्यक्तियों ने अपनी पहचान इम्तियाज खान (कर्नाटक) और रवि प्रकाश राउतकर (मध्यप्रदेश) के रूप में बताई। पूछताछ में दोनों ने कबूल किया कि यह गांजा ओडिशा के सोनपुर जिले से लाया गया था और इसे मुंबई में खपाने की योजना थी।
यह खुलासा होते ही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और ट्रक सहित पूरे माल को जब्त कर लिया।
“12 घंटे में तीन राज्यों पर छापा: बरहमपुर से दबोचे गए ‘मास्टरमाइंड’”!
कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। असली ‘खेल’ तो इसके बाद शुरू हुआ। पुलिस ने आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर 12 घंटे के भीतर ओडिशा के बरहमपुर में छापेमारी कर तीन बड़े तस्करों—जियाउल हक, नदीम अंसारी और सुखविंदर उर्फ बुलबुल—को गिरफ्तार कर लिया।
ये तीनों इस पूरे नेटवर्क के अहम कड़ी थे—कोई सप्लायर था, कोई ट्रांसपोर्ट का इंतजाम करता था, तो कोई बड़े खरीदारों से संपर्क में था।
“जम्मू से यूपी और बालाघाट तक फैली जड़ें”!
इस तस्करी नेटवर्क की जड़ें देश के अलग-अलग हिस्सों में फैली हुई थीं। जम्मू-कश्मीर से लेकर उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश तक इसके तार जुड़े हुए थे। पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह लंबे समय से नशे के इस काले कारोबार में लिप्त था और बड़े शहरों में इसकी सप्लाई करता था।
मुंबई के भायखला इलाके में रहने वाला एक बड़ा खरीदार मोहम्मद फारूक उर्फ ‘बॉम्बे शेख’ भी इस नेटवर्क का अंतिम गंतव्य था, जहां यह गांजा पहुंचाया जाना था।
“1.71 करोड़ की संपत्ति जब्त: काले कारोबार पर करारा प्रहार”!
इस पूरी कार्रवाई में पुलिस ने कुल 1 करोड़ 71 लाख 42 हजार 500 रुपये की संपत्ति जब्त की है, जिसमें शामिल हैं—
•312.590 किलो गांजा (कीमत 1.56 करोड़ रुपये)
•ट्रक (कीमत 15 लाख रुपये)
•टोयोटा अर्बन क्रूजर कार
•2 मोबाइल फोन
यह जब्ती न सिर्फ आर्थिक रूप से तस्करों के लिए बड़ा झटका है, बल्कि उनके नेटवर्क को भी कमजोर करने वाला कदम है।
“तीन महीने में 46 क्विंटल गांजा जब्त: पुलिस का लगातार प्रहार”
महासमुंद पुलिस की यह कार्रवाई कोई पहली नहीं है। पिछले तीन महीनों में ही पुलिस ने 68 मामलों में कुल 4681.110 किलोग्राम गांजा जब्त किया है और 181 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
इनमें से 49 आरोपी छत्तीसगढ़ के हैं, जबकि 132 अन्य राज्यों से जुड़े हुए हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि महासमुंद अब नशा तस्करी के खिलाफ एक ‘फ्रंटलाइन जिला’ बन चुका है, जहां पुलिस लगातार इस जंग में जुटी हुई है।
“कानून का शिकंजा: NDPS एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई”!
सभी आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(B)(2)(B) के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्हें न्यायिक रिमांड पर अदालत में पेश किया गया है और आगे की जांच जारी है।
पुलिस का कहना है कि इस मामले में फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन भी किया जा रहा है, ताकि इस नेटवर्क के पीछे छिपे बड़े सरगनाओं तक पहुंचा जा सके।
“नशे के खिलाफ जंग जारी: महासमुंद पुलिस का स्पष्ट संदेश”!
इस पूरी कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि महासमुंद पुलिस अब सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि ‘मिशन मोड’ में काम कर रही है। नशे के खिलाफ यह जंग अब और तेज होने वाली है।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और किसी भी कीमत पर नशे के इस काले कारोबार को पनपने नहीं दिया जाएगा।
क्या खत्म होगा ‘नशे का साम्राज्य’?”
महासमुंद की इस कार्रवाई ने नशा तस्करों के हौसले जरूर पस्त कर दिए हैं, लेकिन सवाल अब भी बाकी है—क्या यह काला साम्राज्य पूरी तरह खत्म हो पाएगा?
फिलहाल इतना तय है कि पुलिस की इस ‘वज्रपात’ जैसी कार्रवाई ने तस्करों को यह संदेश दे दिया है कि अब हर रास्ता बंद है, हर चाल पर नजर है—और कानून का शिकंजा पहले से ज्यादा मजबूत हो चुका है।
महासमुंद में अब नशे के सौदागरों की खैर नहीं!












