“बस स्टैंड बना सट्टे का रणभूमि… पुलिस बनी ‘ग्राहक’, और फिर चला ऐसा शिकंजा कि आईफोन समेत किस्मत भी हो गई जब्त!”
Mahasamund/महासमुंद जिले के बागबाहरा में 8 अप्रैल 2026 की शाम अचानक ऐसा दृश्य बना, मानो किसी फिल्म का क्लाइमैक्स चल रहा हो। जहां आम दिनों में बसों की आवाजाही, यात्रियों की चहल-पहल और चाय की दुकानों की गहमागहमी रहती है, वहीं इस दिन सन्नाटे के बीच पुलिस ने ऐसा जाल बिछाया कि सट्टा कारोबारियों की पूरी ‘कुंडली’ ही उलट गई।
कार्यालय पुलिस अधीक्षक महासमुंद के सख्त निर्देशों के बाद जिले में अवैध गतिविधियों पर लगाम कसने का अभियान तेज़ी से चल रहा है। इसी अभियान के तहत थाना बागबाहरा पुलिस ने सट्टा कारोबार के खिलाफ एक सुनियोजित और फिल्मी अंदाज में कार्रवाई को अंजाम दिया।
सूत्रों की मानें तो पुलिस को मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली थी कि बागबाहरा बस स्टैंड पर एक व्यक्ति खुलेआम सट्टा खिलाने का खेल चला रहा है। यह कोई साधारण खेल नहीं था, बल्कि हजारों की रकम का दांव लगाकर लोगों की किस्मत से खिलवाड़ किया जा रहा था।
सूचना मिलते ही पुलिस ने बिना देर किए अपनी रणनीति तैयार की। वर्दी उतारकर सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी ‘ग्राहक’ बन गए। चेहरे पर सामान्य भाव, हाथ में मोबाइल, और जेब में नकली उम्मीदें लेकर पुलिस की टीम बस स्टैंड पहुंची। माहौल ऐसा था कि कोई भी यह अंदाजा नहीं लगा सकता था कि ये आम ग्राहक नहीं बल्कि कानून के रक्षक हैं।
बस स्टैंड के एक कोने में बैठा आरोपी नीरज सोनी पिता लेखराम सोनी उम्र 36 साल साकिन वार्ड न 4 थानापारा बागबाहरा अपने ‘धंधे’ में मग्न था। सट्टा पट्टी पर नंबर लिखते हुए वह ग्राहकों को सपनों का झांसा दे रहा था। तभी अचानक ‘ग्राहक’ बने पुलिसकर्मी ने इशारा किया और देखते ही देखते चारों ओर से घेराबंदी हो गई।
नीरज सोनी को रंगे हाथों पकड़ा गया। उसके हाथ में सट्टा पट्टी, सामने मोबाइल, और जेब में नकदी—सब कुछ पुलिस के सामने था। उस पल उसकी आंखों में जो डर और हैरानी थी, वह किसी भी फिल्मी दृश्य को मात दे सकती थी।
तलाशी के दौरान पुलिस ने उसके पास से एक महंगा एप्पल कंपनी का मोबाइल, एक सैमसंग मोबाइल और नगदी रकम बरामद की। कुल मिलाकर 32,010 रुपये की संपत्ति जब्त की गई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम 2022 की धारा 6(क) के तहत मामला दर्ज किया।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई…
इसी अभियान के दौरान पुलिस को एक और सफलता मिली। एक अन्य स्थान पर जयेश साहू नामक व्यक्ति भी सट्टा खिलाने के खेल में लिप्त पाया गया। पुलिस ने उसी रणनीति को दोहराया—फिर से ग्राहक बनकर पहुंची, और फिर से जाल बिछाया गया।
जयेश साहू पिता खुसीराम साहू उम्र 45 साल साकिन वार्ड न 3 थाना पारा बागबाहरा भी अपने ‘नंबर गेम’ में इतना व्यस्त था कि उसे यह अंदाजा ही नहीं हुआ कि उसके आसपास कानून का शिकंजा कस चुका है। जैसे ही पुलिस ने उसे पकड़ा, उसके चेहरे का रंग उड़ गया।
उसके पास से एक वीवो मोबाइल और नगदी रकम बरामद की गई। कुल 11,800 रुपये की संपत्ति जब्त कर उसे भी जुआ अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया और न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
इस पूरी कार्रवाई ने बागबाहरा में हलचल मचा दी। जहां एक ओर आम जनता ने पुलिस की इस सक्रियता की सराहना की, वहीं सट्टा कारोबारियों के बीच खौफ का माहौल बन गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से बस स्टैंड क्षेत्र में सट्टे का यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा था। कई बार शिकायतें भी हुईं, लेकिन इस बार पुलिस ने जिस चतुराई और सटीकता से कार्रवाई की, उसने सबको चौंका दिया।
पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में चल रहे इस अभियान का स्पष्ट संदेश है—अवैध गतिविधियों के लिए अब कोई जगह नहीं बचेगी। चाहे वह सट्टा हो, जुआ हो या कोई और गैरकानूनी काम, कानून का शिकंजा हर हाल में कसकर रहेगा।
इस कार्रवाई ने यह भी साबित कर दिया कि पुलिस अब सिर्फ वर्दी में नहीं, बल्कि हर रूप में मौजूद है। कभी ग्राहक बनकर, कभी आम आदमी बनकर—हर उस जगह पहुंच रही है जहां कानून तोड़ा जा रहा है।
बागबाहरा की इस घटना ने पूरे जिले में एक नई चेतावनी जारी कर दी है। सट्टा कारोबारियों के लिए यह साफ संकेत है कि अब उनकी ‘किस्मत’ नहीं, बल्कि ‘कानून’ चलेगा।
और अंत में, इस पूरे घटनाक्रम ने एक बात तो साफ कर दी—जब पुलिस ग्राहक बन जाए, तो सट्टेबाजों का खेल खत्म होना तय है… और इस बार भी वही हुआ!












