April 2, 2026 10:57 pm

“नियमों का गला घोंटकर चल रहा स्वास्थ्य विभाग! बिलासपुर CMHO कार्यालय बना ‘भ्रष्टाचार का अभयारण्य’”

“नियमों का गला घोंटकर चल रहा स्वास्थ्य विभाग! बिलासपुर CMHO कार्यालय बना ‘भ्रष्टाचार का अभयारण्य’”

“जहां नियम ही नहीं, वहां दंड कैसा? स्थापना शाखा में शून्य व्यवस्था ने खोली लापरवाही और मनमानी की पोल”

रायपुर/बिलासपुर।छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ माने जाने वाले जिला स्तर के कार्यालयों में यदि नियम-कानून ही गायब हो जाएं, तो कल्पना कीजिए कि आम जनता की सेहत किस कगार पर खड़ी होगी। ऐसा ही एक चौंकाने वाला और चिंताजनक मामला सामने आया है बिलासपुर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय से, जहां खुद विभागीय दस्तावेज यह गवाही दे रहे हैं कि स्थापना शाखा में शासन के मूलभूत नियम और निर्देश ही संधारित नहीं हैं!

यह खुलासा किसी बाहरी जांच एजेंसी ने नहीं, बल्कि स्वयं स्थापना शाखा के प्रभारी अधिकारी डॉ. रक्षित जोगी द्वारा जारी एक आधिकारिक पत्र के माध्यम से हुआ है। इस पत्र ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि पूरे जिले में फैले स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

“नियम नहीं, तो जवाबदेही कैसी?”

प्राप्त जानकारी के अनुसार, CMHO कार्यालय की स्थापना शाखा में चिकित्सकों से लेकर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों तक से कार्य लेने के लिए शासन द्वारा समय-समय पर जारी किए गए कोई भी नियम, निर्देश या आदेश संधारित नहीं किए गए हैं।

इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि कोई कर्मचारी अपने पद के दायित्वों के विपरीत कार्य करता है, या फिर अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करता—तो उसे दंडित करने के लिए कार्यालय के पास कोई ठोस दस्तावेजी आधार ही मौजूद नहीं है।यह स्थिति न केवल प्रशासनिक शिथिलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि पूरे सिस्टम में जवाबदेही नाम की कोई चीज बची ही नहीं है।

भ्रष्टाचार का खुला खेल, जिम्मेदार मौन!

जब नियमों का अभाव हो, तो मनमानी का राज होना तय है। बिलासपुर जिले में यही हो रहा है।सूत्रों के अनुसार, जिला और ब्लॉक स्तर के स्वास्थ्य कार्यालयों में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है। सरकारी योजनाओं के लिए आवंटित राशि का “बंदरबांट” खुलेआम हो रहा है, और इसमें शामिल अधिकारी-कर्मचारी बिना किसी भय के अपने हित साध रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर, जो कर्मचारी ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं, उन्हें लगातार प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।

ऐसे माहौल में कार्य करने वाले कर्मचारी मानसिक रूप से टूटते जा रहे हैं, जबकि भ्रष्ट तत्वों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाएं अंतिम पायदान पर!

इस अव्यवस्था का सीधा असर जिले में संचालित राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर पड़ा है।

टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण अभियान, और अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं में बिलासपुर जिला पूरे प्रदेश में अंतिम पायदान पर पहुंच गया है।

इसका खामियाजा सबसे ज्यादा उन ग्रामीणों, माताओं, बच्चों और बुजुर्गों को भुगतना पड़ रहा है, जो इन योजनाओं के वास्तविक हकदार हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति के कारण न केवल मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पा रहा, बल्कि कई मामलों में उनकी जान तक खतरे में पड़ रही है।

पत्र ने खोली व्यवस्था की परतें!

स्थापना प्रभारी अधिकारी डॉ. रक्षित जोगी द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि:

•कार्यालय में कार्य संचालन से संबंधित नियम/निर्देश संधारित नहीं हैं!

•कर्मचारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही हेतु कोई स्पष्ट प्रावधान उपलब्ध नहीं है!

•कार्यों के मूल्यांकन और जवाबदेही तय करने के लिए कोई दस्तावेजी व्यवस्था मौजूद नहीं है!

यह पत्र अपने आप में एक “सरकारी स्वीकारोक्ति” है, जो यह साबित करता है कि व्यवस्था किस हद तक चरमरा चुकी है।

जवाबदेही से बचने का खेल या लापरवाही?

अब बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज स्थापना शाखा में क्यों नहीं रखे गए?

क्या यह महज लापरवाही है, या फिर एक सुनियोजित रणनीति जिसके तहत नियमों को गायब रखकर भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया जा रहा है?

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नियमों का दस्तावेजी आधार नहीं होगा, तब तक किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करना लगभग असंभव होगा—और यही स्थिति भ्रष्टाचारियों के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बन जाती है।

सरकार की चुप्पी से उठ रहे सवाल !

इस पूरे मामले में अब तक राज्य शासन या उच्च अधिकारियों की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।जनता यह जानना चाहती है कि:

•क्या इस मामले की जांच होगी?

•दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी?

•और सबसे महत्वपूर्ण—क्या स्वास्थ्य सेवाओं को फिर से पटरी पर लाने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे?

व्यवस्था सुधारो, वरना स्वास्थ्य संकट तय’!

बिलासपुर CMHO कार्यालय का यह मामला केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी है।यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो इसका असर न केवल स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा, बल्कि आम जनता का शासन पर विश्वास भी डगमगा जाएगा।

अब देखना यह है कि शासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है—या फिर यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह धूल फांकता रह जाएगा।

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