“लाल आतंक खात्मे का नया सूर्योदय: छत्तीसगढ़ में गूंजा विजय का शंखनाद — नक्सलवाद के खात्मे की ओर ऐतिहासिक कदम”!
“नवा रायपुर में सियासी सौहार्द की तस्वीर, विकास के नए युग का उद्घोष”!
रायपुर/छत्तीसगढ़ की धरती, जो कभी बंदूकों की गूंज और बारूदी सुरंगों के साये में सिसकती थी, आज उसी जमीन से शांति, विकास और विश्वास का नया सूर्योदय हो रहा है। वर्षों से लाल आतंक की गिरफ्त में जकड़ा यह प्रदेश अब एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है—जहां भय का अंत और भविष्य का आरंभ साफ दिखाई दे रहा है।
इसी ऐतिहासिक सफलता के बीच प्रदेश की राजनीति का एक भावुक और प्रतीकात्मक क्षण सामने आया, जब उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से उनके नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में सौजन्य मुलाकात की। यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि उस लंबे संघर्ष की जीत का जश्न थी, जिसने छत्तीसगढ़ को एक नई पहचान देने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
“पुष्पगुच्छ में छिपा संघर्ष का सम्मान, नेतृत्व को सलाम”!
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने मुख्यमंत्री को पुष्पगुच्छ भेंट कर नक्सलवाद के खिलाफ मिली इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई दी। इस दौरान वातावरण में एक अलग ही उत्साह और संतोष झलक रहा था—मानो वर्षों की पीड़ा, बलिदान और संघर्ष आज एक सकारात्मक परिणाम में बदल गया हो।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर भावुक होते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ अब नक्सलमुक्त होकर विकास, विश्वास और समृद्धि के नए युग में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद ने दशकों तक प्रदेश की प्रगति को जकड़े रखा, विशेषकर बस्तर अंचल को हिंसा और भय की आग में झोंक दिया।
“बस्तर से बदली तस्वीर—अब बंदूक नहीं, विकास बोलेगा”!
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बस्तर, जो कभी लाल आतंक का गढ़ माना जाता था, अब बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। सड़कों का जाल बिछ रहा है, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं गांव-गांव तक पहुंच रही हैं, और सबसे बड़ी बात—लोगों के चेहरे पर अब डर नहीं, उम्मीद दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं अब जमीन पर उतर रही हैं और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की मुख्यधारा तेजी से मजबूत हो रही है। गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, युवाओं को नई दिशा मिल रही है, और आमजन का भरोसा शासन-प्रशासन पर लगातार मजबूत हो रहा है।
“दिल्ली से मिला दम—नीति, नीयत और नेतृत्व का कमाल”!
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को दिया। उन्होंने कहा कि उनके दृढ़ संकल्प, स्पष्ट नीति और सटीक रणनीति के चलते ही आज छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में इतनी बड़ी सफलता संभव हो पाई है।
साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय, सुरक्षा बलों की रणनीतिक तैनाती और विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन ने इस अभियान को निर्णायक मोड़ तक पहुंचाया है।
“शहादत का कर्ज, जिसे इतिहास हमेशा याद रखेगा”!
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उन वीर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता उन शहीदों की कुर्बानी का परिणाम है, जिनके साहस और बलिदान ने इस अभियान की नींव रखी।
साय ने सुरक्षा बलों की वीरता, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि उनका योगदान अमूल्य है और प्रदेश हमेशा उनका ऋणी रहेगा।
“अब छत्तीसगढ़ दौड़ेगा विकास की रफ्तार से”!
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि नक्सलमुक्त वातावरण में अब छत्तीसगढ़ विकास के नए आयाम स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि निवेश के नए अवसर पैदा होंगे, उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, और प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में अपनी मजबूत पहचान बनाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अब समय आ गया है जब छत्तीसगढ़ अपनी वास्तविक क्षमता को पहचानते हुए देश के विकास में अग्रणी भूमिका निभाएगा।
“डर से विश्वास तक का सफर—एक नई कहानी का आगाज़”!
आज छत्तीसगढ़ केवल एक राज्य नहीं, बल्कि एक उदाहरण बनता जा रहा है—कैसे दृढ़ इच्छाशक्ति, सही रणनीति और जनसमर्थन से सबसे बड़ी चुनौतियों को भी हराया जा सकता है।
नवा रायपुर की इस मुलाकात ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब छत्तीसगढ़ की कहानी बदल चुकी है। जहां कभी गोलियों की आवाज गूंजती थी, वहां अब विकास के गीत सुनाई दे रहे हैं।
यह सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक नए युग का उद्घोष है—जहां छत्तीसगढ़ अब भयमुक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है।












