“आयुष्मान कार्ड के आड़ पर करोड़ों का घोटाला: छुरा के लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल डॉ.ज्योति नारायण दुबे के द्वारा!”
डॉ.चंद्रशेखर धृतलहरे के नाम पर संचालित हो रहा ICU मगर डॉक्टर की अनुपस्थिति में मरीजों की बनाई जा रही है फर्जी फाईल!
Gariyaband/छत्तीसगढ़ के गरियाबंद के छुरा विकासखण्ड से मामला सामने आ रहा है छत्तीसगढ़ में गरीबों के इलाज के लिए शुरू की गई केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना अब कई जगहों पर सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड में स्थित लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि इस अस्पताल में ICU की अनुमति लेकर आयुष्मान कार्ड के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला किया जा रहा है।इससे पहले फर्जीवाडा करने के कारण SNA के द्वारा ICU को बंद करा दिया गया था और आयुष्मान को भी एक वर्ष के लिए छुड़ा के चेतावनी देते हुएं ICU का रेगुलर डॉक्टर आने के बाद ही ICU संचालित किया जायेगा।लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल द्वारा सर्दी, खांसी, बुखार और सामान्य दर्द से पीड़ित मरीजों को भी गंभीर बताकर आयुष्मान कार्ड द्वारा ICU में ब्लॉक कर फर्जीवाड़ा करते हुये शासन से भारी भरकम राशि निकाली जा रही है।और यह अभी से नहीं सालों से लक्ष्मी नारायण अस्पताल में आयुष्मान कार्ड द्वारा ICU में ब्लॉक किया जा रहा है।
यह मामला अब सिर्फ एक निजी अस्पताल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र और आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रहा है।
ICU अनुमति पर उठे सवाल!
जानकारी के अनुसार छुरा के लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल को ICU की अनुमति गरियाबंद के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) एवं SNA द्वारा प्रदान की गई है। लेकिन बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या वास्तव में अस्पताल में ICU की अनुमति दी गई है? यदि दी गई है तो क्या वहां रेगुलर (एम.डी.) मेडिसिन डॉक्टर है?
जिस डॉक्टर के नाम पर ICU की अनुमति दी गई है वह 80 किलो मीटर दूर में अपनी रेगुलर ड्यूटी रिम्स हॉस्पिटल रायपुर में कर रहे है !
स्थानीय लोगों और सूत्रों का कहना है कि ICU के लिए कोई विशेषज्ञ डॉक्टर उपस्थिति नहीं रहते है और जो डॉक्टर रहते है वह ज्योति नारायण दुबे है वह मरीजों को ICU इंचार्ज बताते है वही जिले के स्वास्थ्य विभाग द्वारा लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल के ICU उपकरणों की उपलब्धता पर कभी गंभीरता से जांच ही नहीं की गई। आरोप यह भी है कि बिना किसी मौके की जांच के ही ICU की अनुमति दे दी गई।
स्वास्थ्य नियमों के अनुसार किसी भी अस्पताल में ICU संचालित करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर होना अनिवार्य है। लेकिन छुरा के लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल को किसी रेगुलर (एम.डी.)मेडिसिन डॉक्टर बिना अनुमति दिया गया है शासन प्रशासन के ऊपर आरोप लग रहे कि बिना (एम.डी.) मेडिसिन के ICU की अनुमति क्यों दी गई है? इससे स्पष्ट होता है कि गरियाबंद जिला की जनता की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
आयुष्मान कार्ड का कथित दुरुपयोग!
आरोप यह भी है कि लक्ष्मी नारायण अस्पताल में साधारण बीमारियों से पीड़ित मरीजों को भर्ती कर आयुष्मान कार्ड ICU में ब्लॉक कर दिया जाता है और शासन को सीधा करोड़ों रूपये का चूना लगाया जा रहा है।लक्ष्मी नारायण अस्पताल छुरा के संचालक डॉ ज्योति नारायण दुबे द्वारा आयुष्मान योजना के तहत फर्जीवाड़ा कर के बड़ी राशि क्लेम की जा रही है।
बताया जा रहा है कि कई मामलों में मरीजों को यह तक पता नहीं होता कि उनके नाम से आयुष्मान कार्ड दो दिन पहले ब्लॉक कर दिया जाता है और प्रति मरीज 17000/- रूपये का शासन को सीधा चूना लगा दिया जा है।
स्वास्थ्य विभाग के जानकारों के अनुसार यदि किसी अस्पताल द्वारा इस तरह फर्जी क्लेम किया जाता है तो यह परमानेंट (D)पैनल मतलब स्मार्ट कार्ड से बर्खास्त कर दिया जाता है और निजी अस्पतालों से वसूली की जा रही है यह लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल के संचालक द्वारा यह तीसरी बार फर्जीवाड़ा कर दिया गया है।जो सरकारी धन के करोड़ों रूपये का हेराफेरी मानी जाती है।
डॉक्टर के नाम का कथित दुरुपयोग!
इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। अस्पताल में जिस डॉक्टर के नाम से आयुष्मान कार्ड ब्लॉक किए जा रहे हैं, वे हैं डॉक्टर चंद्रशेखर धृतलहरे (एम.डी.) मेडिसिन है। जो आज तक लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल गए ही नहीं है और उनकी आड़ में हॉस्पिटल संचालक द्वारा आयुष्मान कार्ड के नाम पर करोड़ों रूपये का घोटाला किया जा रहा है।
जब उनसे फोन पर इस संबंध में जानकारी ली गई तो उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा—
“मुझे इस विषय में कोई जानकारी नहीं है। मैं कभी छुरा के लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल में नहीं गया। मैंने किसी मरीज को नहीं देखा, न ही किसी मरीज की फाइल बनाई। मेरे नाम से सील और हस्ताक्षर किए जा रहे हैं, यह मुझे आज आपसे पता चल रहा है। डॉक्टर चंद्रशेखर धृतलहरें के द्वारा यह बताया गया यदि ऐसा हो रहा है तो यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।”
डॉक्टर चंद्रशेखर धृतलहरें के इस बयान ने पूरे मामले को और भी गंभीर बना दिया है। यदि किसी डॉक्टर के नाम और सील का उपयोग उसकी जानकारी के बिना किया जा रहा है, तो यह फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी का बड़ा मामला बनता है।
दलालों के जरिए मरीज लाने का आरोप!
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि आयुष्मान योजना के नाम पर दलालों के कई नेटवर्क सक्रिय है। आरोप है कि ओडिशा राज्य से भारी मात्रा में मरीजों को दलालों के माध्यम से छत्तीसगढ़ लाकर निजीअस्पतालों में भर्ती कराया जाता है। भर्ती करने के बाद 2 दिन पहले उनके आयुष्मान कार्ड को ICU में ब्लॉक कर भारी राशि क्लेम कर शासन से ली जा रही है।
यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह सिर्फ एक अस्पताल नहीं बल्कि पूरे आयुष्मान तंत्र में संगठित घोटाले का संकेत हो सकता है।
महासमुंद और रायपुर में भी उठे सवाल!
स्वास्थ्य सूत्रों के अनुसार छत्तीसगढ़ के कई जिलों में आयुष्मान कार्ड के दुरुपयोग की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। विशेष रूप से महासमुंद और रायपुर जिले में निजी अस्पतालों द्वारा बड़े पैमाने पर आयुष्मान योजना के नाम पर संदिग्ध क्लेम किए जाने की बातें सामने आई हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सभी निजी अस्पतालों की सूक्ष्म जांच की जाए तो कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।
राज्य स्तरीय जांच की मांग!
इस पूरे मामले को देखते हुए अब स्थानीय स्तर पर कई मांगें उठ रही हैं—
•छुरा के लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल की राज्य स्तरीय टीम गठित कर जांच कराई जाए!
•अस्पताल में ICU सुविधा की वास्तविक स्थिति की जांच हो!
•आयुष्मान कार्ड के सभी क्लेम का ऑडिट कराया जाए!
•यदि फर्जीवाड़ा साबित हो तो अस्पताल को सील किया जाए!
•संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो!
साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि यदि बिना जांच ICU की अनुमति दी गई है तो मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती!
आयुष्मान भारत योजना गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनदायिनी योजना मानी जाती है। लेकिन यदि इसी योजना का उपयोग दुरुपयोग कुछ निजी अस्पताल अपने लाभ के लिए करने लगें, तो इससे न केवल सरकारी खजाने को भारी नुकसान होता है बल्कि असली मरीजों के अधिकार भी प्रभावित होते हैं।अब देखना यह होगा कि इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार कितनी गंभीरता दिखाती है। क्या इस कथित घोटाले की गहराई तक जांच होगी या फिर यह मामला भी कई अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?
फिलहाल छुरा का लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल और आयुष्मान योजना से जुड़े सवाल पूरे छत्तीसगढ़ में चर्चा का विषय बन चुके हैं। जनता की निगाहें अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं












