“छत्तीसगढ़ के किसानों के चेहरे पर लौटी मुस्कान! मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बड़ा फैसला – धान खरीदी की तारीख बढ़ी, अब 5 और 6 फरवरी को भी खुले रहेंगे केंद्र”
Raipur/छत्तीसगढ़ के अन्नदाता किसानों के लिए एक बार फिर राहत और सम्मान का संदेश लेकर आई है राज्य सरकार। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किसानों की पीड़ा, परेशानी और मांग को गंभीरता से समझते हुए धान खरीदी की अवधि में दो दिवस की ऐतिहासिक वृद्धि का निर्णय लिया है। अब प्रदेश के पंजीकृत किसान 4 और 5 फरवरी को भी अपने धान को सरकारी उपार्जन केंद्रों में बेच सकेंगे। इस फैसले से हजारों ऐसे किसानों को राहत मिलेगी, जो किसी कारणवश तय समय पर अपना धान नहीं बेच पाए थे।
मुख्यमंत्री के इस निर्णय से पूरे प्रदेश में उत्साह का माहौल है। खेतों में पसीना बहाने वाले किसानों के लिए यह फैसला किसी संजीवनी से कम नहीं माना जा रहा है। सरकार के इस कदम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य की प्राथमिकता में किसान सर्वोपरि हैं।
किसानों की आवाज बनी सरकार!
धान खरीदी की समय-सीमा समाप्त होने के बाद अनेक क्षेत्रों से शिकायतें और मांगें सामने आ रही थीं कि कई किसान टोकन कटने के बावजूद समय पर केंद्र तक नहीं पहुंच पाए। कहीं मौसम ने बाधा डाली, तो कहीं परिवहन की समस्या सामने आई। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल निर्णय लिया और दो दिन की अतिरिक्त अवधि की घोषणा कर दी।
यह निर्णय साबित करता है कि छत्तीसगढ़ सरकार केवल योजनाएं नहीं बनाती, बल्कि जमीनी हकीकत को समझकर त्वरित कार्रवाई भी करती है।
धान खरीदी का ऐतिहासिक महाअभियान!
15 नवंबर 2025 से शुरू हुए धान खरीदी महाभियान ने इस वर्ष नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 31 जनवरी 2026 तक प्रदेश के 25 लाख 11 हजार से अधिक किसानों से लगभग 140 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है। यह आंकड़ा न केवल राज्य की कृषि शक्ति को दर्शाता है, बल्कि किसानों के सरकार पर बढ़ते विश्वास का भी प्रमाण है।
धान खरीदी के एवज में अब तक किसानों को 33 हजार 149 करोड़ रुपये का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जा चुका है। बैंक लिंकिंग और डिजिटल भुगतान प्रणाली ने बिचौलियों की भूमिका को लगभग समाप्त कर दिया है, जिससे किसानों को पूरा लाभ मिल रहा है।
पारदर्शिता बनी सरकार की पहचान!
मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में धान खरीदी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और निगरानीयुक्त बनाया गया है। प्रदेशभर में संचालित 2,740 धान उपार्जन केंद्रों पर डिजिटल व्यवस्था लागू की गई है, जिससे हर लेन-देन का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है।
टोकन प्रणाली, ऑनलाइन पंजीयन, बायोमेट्रिक सत्यापन और सीधा भुगतान जैसी व्यवस्थाओं ने धान खरीदी को भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई है। सरकार की यह व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है कि केवल वास्तविक किसान ही योजना का लाभ उठाएं।
27 लाख से अधिक किसानों का पंजीयन!
इस खरीफ सीजन में प्रदेश के 27 लाख 43 हजार 145 किसानों ने पंजीयन कराया है। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य में कृषि अब भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनी हुई है। सरकार की नीतियों और समर्थन मूल्य प्रणाली के कारण किसानों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है।
धान खरीदी की तिथि बढ़ने से अब वे किसान भी राहत की सांस ले सकेंगे, जो अंतिम दिनों में किसी तकनीकी या व्यक्तिगत समस्या के कारण केंद्र तक नहीं पहुंच पाए थे।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला नया बल!
धान खरीदी से गांवों में आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं। किसानों के खातों में सीधे पैसा पहुंचने से बाजारों में रौनक बढ़ी है। छोटे व्यापारी, दुकानदार, मजदूर और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोग भी इस व्यवस्था से लाभान्वित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि 33 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि का सीधा वितरण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देगा और विकास की धारा को मजबूत करेगा।
किसान हितैषी शासन का प्रतीक!
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि किसान हितैषी शासन की पहचान बन चुका है। सरकार ने यह संदेश दिया है कि अन्नदाता की उपेक्षा नहीं होगी और उसकी मेहनत का पूरा मूल्य उसे मिलेगा।
राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि भविष्य में भी धान खरीदी व्यवस्था और अधिक सरल, सुरक्षित और प्रभावी बनाई जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
उम्मीद और विश्वास का नया सूरज!
धान खरीदी की अवधि में दो दिन की वृद्धि ने किसानों के मन में नई उम्मीद जगा दी है। खेतों में मेहनत करने वाला किसान आज स्वयं को सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर रहा है। सरकार और किसान के बीच विश्वास की यह मजबूत डोर आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को कृषि के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली है।
मुख्यमंत्री श्री साय का यह फैसला इतिहास में किसान हित में उठाए गए साहसिक और संवेदनशील कदम के रूप में दर्ज होगा। यह निर्णय न केवल वर्तमान की समस्या का समाधान है, बल्कि भविष्य के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करता है।












