काग़ज़ों में पक्की, ज़मीन पर खोखली! महासमुंद–तुमगांव MDR सड़क में करोड़ों का खेल, ठेकेदार JD Construction पर भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप — उपमुख्यमंत्री से कार्रवाई की गुहार”
Mahasamund/महासमुंद जिले की जीवनरेखा कही जाने वाली महासमुंद–तुमगांव मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड (MDR) एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिस सड़क से किसानों की फसल मंडियों तक पहुँचती है, व्यापार की रफ्तार बढ़ती है और ग्रामीण इलाकों को शहर से जोड़ने की उम्मीद टिकी है, वही सड़क अब भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। जिला किसान कांग्रेस के अध्यक्ष मानिक साहू ने इस सड़क निर्माण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उपमुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री अरुण साव से सीधी शिकायत की है।
महासमुंद में साहू समाज के शपथ ग्रहण समारोह में पहुँचे उपमुख्यमंत्री को सौंपे गए लिखित आवेदन में जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष मानिक साहू ने दावा किया है कि ठेकेदार JD Construction द्वारा किए जा रहे कार्य में तकनीकी मानकों की खुलेआम अनदेखी हो रही है और कुछ PWD अधिकारियों की मिलीभगत से जनता के करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं।
मानकों की धज्जियाँ,गुणवत्ता से समझौता!
शिकायत में कहा गया है कि सड़क निर्माण में Indian Roads Congress (IRC: 37-2018), MoRTH स्पेसिफिकेशंस और छत्तीसगढ़ PWD के तय मानकों को ताक पर रखा जा रहा है।सड़क की सबसे अहम परतें — सबग्रेड और GSB (Granular Sub Base) — जिनकी मोटाई 200 से 300 मिमी होनी चाहिए, वहाँ भारी कटौती की जा रही है। प्रति किलोमीटर जहाँ 1400 से 2100 क्यूबिक मीटर गिट्टी-मुरूम की आवश्यकता होती है, वहाँ घटिया और कम मात्रा में सामग्री डाली जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की सड़क सामान्य रूप से 10 से 12 साल तक टिकनी चाहिए, लेकिन मौजूदा हालात में यह सड़क 1–2 साल में ही उखड़ने की पूरी आशंका है। सवाल यह है कि क्या यह महज लापरवाही है या सुनियोजित भ्रष्टाचार?
पानी निकासी व्यवस्था भी बनी मज़ाक!
मानिक साहू ने आरोप लगाया कि सड़क के बीच लगाए जा रहे सीमेंट पाइप कल्वर्ट पहले से ही टूटे-फूटे और निम्न गुणवत्ता के हैं।बारिश के मौसम में यही कल्वर्ट जलभराव का कारण बनेंगे और सड़क को समय से पहले बर्बाद कर देंगे।
इतना ही नहीं, निर्माण के दौरान अनिवार्य माने जाने वाले कॉम्पैक्शन टेस्ट, फील्ड डेंसिटी टेस्ट, CBR टेस्ट और मार्शल स्टेबिलिटी टेस्ट तक नहीं कराए जा रहे हैं।यहां तक नाली निर्माण में जो छड़ लगाई जा रही है उसको भी नियम विरुद्ध लगाई जा रही है छड़ लगाने की सेंटीमीटर के मापकों में भी हेरफेर किया गया हैं दूरी बढ़ाकर कर के लगाई है यह सीधे-सीधे नियमों का उल्लंघन और सरकारी तंत्र की गंभीर चूक मानी जा रही है।
“यह तकनीकी गलती नहीं, सीधा भ्रष्टाचार है”!
जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष मानिक साहू ने दो टूक कहा—
“यह सिर्फ तकनीकी खामी नहीं, बल्कि स्पष्ट भ्रष्टाचार है। ठेकेदार और कुछ PWD अधिकारियों की मिलीभगत से जनता के करोड़ों रुपये की लूट हो रही है। इसका खामियाजा किसानों और आम जनता को भुगतना पड़ेगा।”
उन्होंने कहा कि यह सड़क किसानों की कृषि उपज के परिवहन, गांवों की कनेक्टिविटी और जिले के विकास के लिए बेहद अहम है। घटिया निर्माण से न सिर्फ किसानों की रोजमर्रा की परेशानियाँ बढ़ेंगी, बल्कि बार-बार मरम्मत के नाम पर सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ भी पड़ेगा।
उपमुख्यमंत्री से की गई बड़ी मांगें!
मानिक साहू ने उपमुख्यमंत्री अरुण साव से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कई कड़े कदम उठाने का आग्रह किया है, जिनमें प्रमुख हैं—
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निर्माण कार्य को तत्काल रोकना,
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NIT, IIT या किसी स्वतंत्र केंद्रीय संस्थान से कोर कटिंग और लैब टेस्टिंग,
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दोषी ठेकेदार JD Construction पर भारी पेनल्टी और ब्लैकलिस्टिंग,
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भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज करना,
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दोषी PWD अधिकारियों पर विभागीय व आपराधिक कार्रवाई,
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BoQ, टेस्ट रिपोर्ट, भुगतान विवरण और प्रोग्रेस रिपोर्ट को सार्वजनिक करना,
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जांच किसानों और शिकायतकर्ताओं की मौजूदगी में कराना,
जनआंदोलन और कोर्ट जाने की चेतावनी!
मानिक साहू ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उच्च न्यायालय, मीडिया और जनआंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
उन्होंने कहा कि महासमुंद जिले में इससे पहले भी घटिया सड़क निर्माण के कई मामले सामने आ चुके हैं, जहाँ कुछ महीनों में ही सड़कें उखड़ गईं और जनता का पैसा बर्बाद हुआ।
अब पूरे जिले में गूंज रहा एक सवाल!
इस पूरे मामले ने जिले की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। किसानों और आम जनता के बीच एक ही सवाल गूंज रहा है—
“क्या इस बार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, या यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा?”
उपमुख्यमंत्री एवं PWD मंत्री अरुण साव से अब जिले को त्वरित और निर्णायक हस्तक्षेप की उम्मीद है। यह मामला सिर्फ एक सड़क का नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की नीयत और जवाबदेही की भी परीक्षा है।
अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो महासमुंद–तुमगांव MDR सड़क भ्रष्टाचार की एक और बदनाम मिसाल बनकर रह जाएगी।












