March 1, 2026 2:45 pm

मासूम की मौत से हिला बलरामपुर: स्कूल परिसर बना मौत का जाल, छज्जा गिरा—छठवीं के छात्र की दर्दनाक मौत, प्रशासन का सख्त एक्शन… प्रधान पाठक सस्पेंड,

मासूम की मौत से हिला बलरामपुर: स्कूल परिसर बना मौत का जाल, छज्जा गिरा—छठवीं के छात्र की दर्दनाक मौत, प्रशासन का सख्त एक्शन… प्रधान पाठक सस्पेंड, शिक्षक कटघरे में, सरपंच–सचिव पर FIR!”

Balrampur/बलरामपुर जिले के शांत माने जाने वाले शारदापुर गांव में एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। स्कूल परिसर में शिक्षा पाने पहुंचे मासूम बच्चों के लिए वही परिसर मौत का मैदान बन गया, जब निर्माणाधीन आंगनबाड़ी भवन का छज्जा अचानक भरभराकर गिर पड़ा। इस भयावह हादसे में छठवीं कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र की दर्दनाक मौत हो गई। मासूम की मौत के बाद गांव में मातम पसरा है, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे क्षेत्र में गुस्सा व आक्रोश उफान पर है।

घटना शारदापुर गांव स्थित शासकीय स्कूल परिसर की है, जहां आंगनबाड़ी भवन का निर्माण कार्य चल रहा था। आरोप है कि बच्चों की सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए निर्माण कार्य स्कूल परिसर में खुलेआम कराया जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के वक्त छात्र स्कूल परिसर में खेल रहे थे, तभी अचानक निर्माणाधीन भवन का कमजोर और घटिया छज्जा भरभराकर नीचे आ गिरा। इससे छज्जे के नीचे मौजूद छठवीं कक्षा का छात्र उसकी चपेट में आ गया और गंभीर रूप से घायल हो गया।

हादसे के तुरंत बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। शिक्षक और ग्रामीण घायल छात्र को आनन-फानन में अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने छात्र को मृत घोषित कर दिया। एक हंसता-खेलता बच्चा, जो पढ़-लिखकर अपने परिवार के सपनों को पूरा करना चाहता था, सिस्टम की लापरवाही की भेंट चढ़ गया।

घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। मौके पर अधिकारियों ने पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि निर्माण कार्य में न केवल गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई थी। स्कूल परिसर में निर्माण कार्य के दौरान न तो सुरक्षा घेराबंदी की गई थी, न ही बच्चों को उस क्षेत्र से दूर रखने के लिए कोई चेतावनी या निगरानी व्यवस्था मौजूद थी।

जांच में लापरवाही स्पष्ट होते ही जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। सबसे पहले स्कूल की प्रधान पाठक ममता गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। प्रशासन का कहना है कि प्रधान पाठक होने के नाते उनकी जिम्मेदारी थी कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और स्कूल परिसर में चल रहे निर्माण कार्य को लेकर उचित सावधानी बरती जाए। लेकिन इस मामले में गंभीर चूक सामने आई है।

इतना ही नहीं, स्कूल में पदस्थ तीन अन्य शिक्षकों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इन शिक्षकों से जवाब मांगा गया है कि हादसे के समय बच्चों की निगरानी और सुरक्षा को लेकर उचित कदम क्यों नहीं उठाए गए। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में इनके खिलाफ भी कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

मामला यहीं नहीं रुका। निर्माणाधीन आंगनबाड़ी भवन की जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। अधिकारियों का कहना है कि भवन निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया था, जिसके चलते छज्जा कमजोर था और मामूली दबाव में ही गिर गया। इसे गंभीर आपराधिक लापरवाही मानते हुए प्रशासन ने संबंधित सरपंच और ग्राम सचिव के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। दोनों पर सरकारी धन के दुरुपयोग, लापरवाही और मानकों की अनदेखी के आरोप लगाए गए हैं।

प्रशासन का साफ कहना है कि इस मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। चाहे वह शिक्षा विभाग का अधिकारी हो या पंचायत प्रतिनिधि—दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने यह भी संकेत दिए हैं कि निर्माण कार्य से जुड़े अन्य अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सरकारी भवनों के निर्माण में हो रही लापरवाही और भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। सवाल यह है कि आखिर स्कूल जैसे संवेदनशील स्थानों पर बिना सुरक्षा मानकों के निर्माण कार्य की अनुमति कैसे दी जाती है? क्या बच्चों की जान की कोई कीमत नहीं? मासूम छात्र की मौत ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

गांव के लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा पर ध्यान दिया गया होता, तो आज एक मासूम की जान बच सकती थी। परिजनों की मांग है कि केवल निलंबन और नोटिस तक सीमित न रहकर दोषियों को कड़ी सजा दी जाए, ताकि भविष्य में कोई और परिवार ऐसा दर्द न झेले।

बलरामपुर की इस घटना ने प्रशासन को तो हरकत में ला दिया है, लेकिन बड़ा सवाल यही है—क्या यह कार्रवाई स्थायी बदलाव लाएगी या फिर कुछ दिनों बाद यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? मासूम की मौत प्रशासन के लिए एक कड़ी चेतावनी है कि अब लापरवाही नहीं, बल्कि जवाबदेही का दौर शुरू होना चाहिए।

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