“तीर्थ के नाम पर छल”:मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, शासकीय शिक्षिका पर झूठे शपथ-पत्र से अनुचित लाभ लेने का गंभीर आरोप!
Mahasamund /छत्तीसगढ़ की बहुचर्चित और जनकल्याणकारी मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना पर उस वक्त सवालों का सैलाब उमड़ पड़ा, जब महासमुंद जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया। योजना का लाभ केवल पात्र वृद्धजनों को देने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना में कथित तौर पर झूठे घोषणा-पत्र, फर्जी बीपीएल दर्जा और तथ्यों को छुपाकर एक शासकीय शिक्षिका द्वारा स्वयं एवं अपने परिजनों को तीर्थ यात्रा कराए जाने का आरोप लगा है। इस पूरे मामले ने न केवल प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है, बल्कि आम जनता के बीच भी आक्रोश पैदा कर दिया है।
छत्तीसगढ़ नागरिक कल्याण समिति के सदस्य एवं पूर्व पार्षद पंकज साहू ने इस कथित फर्जीवाड़े को लेकर मुख्य सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ शासन नवा रायपुर, संचालक लोक शिक्षण संचालनालय, कलेक्टर महासमुंद तथा जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद को विस्तृत पत्र प्रेषित कर शासकीय उच्च माध्यमिक शाला बेमचा, महासमुंद में पदस्थ व्याख्याता (एल.बी.) श्रीमती किरण पटेल को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच के बाद सेवा से बर्खास्त करने और उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।
योजना की पवित्र मंशा पर दाग?
मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का उद्देश्य समाज के उन वरिष्ठ नागरिकों को धार्मिक तीर्थ यात्रा का अवसर देना है, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और स्वयं यात्रा करने में असमर्थ हैं। इस योजना के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनमें शासकीय सेवकों, 60 वर्ष से कम आयु वालों तथा अपात्र व्यक्तियों को योजना से बाहर रखा गया है। इसके बावजूद, आरोप है कि श्रीमती किरण पटेल, जो वर्तमान में शासकीय सेवा में कार्यरत हैं, ने तथ्यों को छुपाते हुए योजना का लाभ लिया।
आरोपों की परतें खुलतीं गईं!
पूर्व पार्षद पंकज साहू द्वारा प्रेषित पत्र में बताया गया है कि दिनांक 27 अक्टूबर 2025 से 31 अक्टूबर 2025 के बीच समाज कल्याण विभाग महासमुंद द्वारा जिले से प्रयागराज, काशी विश्वनाथ एवं हनुमान मंदिर की तीर्थ यात्रा कराई गई। इसी यात्रा सूची में नगरीय क्षेत्र महासमुंद से श्रीमती किरण पटेल, उनके पति पवन पटेल, उनकी मौसी श्रीमती गौरी बाई पटेल तथा अन्य रिश्तेदारों के नाम शामिल पाए गए।
आरोप है कि यह समस्त व्यक्ति योजना की पात्रता शर्तों पर खरे नहीं उतरते, इसके बावजूद उन्हें यात्रा कराई गई। सबसे गंभीर आरोप यह है कि आवेदन के साथ संलग्न घोषणा-पत्र (शपथ-पत्र) के बिंदु क्रमांक 5 में श्रीमती किरण पटेल द्वारा यह उल्लेख किया गया कि वे वर्तमान में शासकीय सेवक नहीं हैं, जबकि वास्तविकता में वे शासकीय उच्च माध्यमिक शाला बेमचा में व्याख्याता के पद पर पदस्थ हैं।
फर्जी बीपीएल और झूठा शपथ-पत्र!
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि श्रीमती किरण पटेल ने स्वयं को बीपीएल श्रेणी का दर्शाते हुए फर्जी तरीके से सूची में नाम जुड़वाया और उसी आधार पर मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के लिए आवेदन किया। आरोप है कि यह सब जानबूझकर, योजना की पात्रता शर्तों की पूर्ण जानकारी होने के बावजूद किया गया।
पूर्व पार्षद साहू का कहना है कि जब कोई शासकीय सेवक यह जानते हुए कि वह योजना का लाभ लेने के लिए अपात्र है, फिर भी झूठा शपथ-पत्र भरकर शासन से सुविधा प्राप्त करता है, तो यह न केवल नैतिक अपराध है बल्कि कानूनी अपराध भी है। यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों का खुला उल्लंघन माना जा सकता है।
“यह केवल अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि धोखाधड़ी है”!
पंकज साहू ने अपने पत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह मामला केवल विभागीय अनुशासनहीनता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन के साथ छल एवं धोखाधड़ी का गंभीर मामला है। इसलिए, केवल निलंबन या विभागीय जांच पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि भारतीय दंड संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत पुलिस थाना महासमुंद में एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।
उनका यह भी कहना है कि यदि ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में जनकल्याणकारी योजनाएं अपात्र और प्रभावशाली लोगों के हाथों खिलौना बनकर रह जाएंगी, और वास्तविक जरूरतमंदों का हक मारा जाएगा।
RTI से मिले दस्तावेज बने साक्ष्य!
इस पूरे मामले को और भी गंभीर बनाता है यह तथ्य कि पूर्व पार्षद साहू ने सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत प्राप्त आवेदन पत्र, घोषणा पत्र और यात्रा सूची की सत्यापित छायाप्रतियां भी शिकायत के साथ संलग्न की हैं। उनका दावा है कि इन दस्तावेजों से स्पष्ट होता है कि किस प्रकार पात्रता शर्तों को दरकिनार कर योजना का लाभ लिया गया।

RTI से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर ही उन्होंने शासन और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को दंड मिले।
शिक्षा जगत में भी उठे सवाल!
इस पूरे प्रकरण ने शिक्षा विभाग में भी असहज स्थिति पैदा कर दी है। एक ओर जहां शिक्षक समाज को नैतिकता, ईमानदारी और अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाला माना जाता है, वहीं दूसरी ओर एक शासकीय शिक्षिका पर इस प्रकार के गंभीर आरोप लगना पूरे तंत्र की छवि पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल एक व्यक्ति का दोष नहीं होगा, बल्कि यह प्रणाली की कमजोरी को भी उजागर करेगा, जिसने ऐसे आवेदन को बिना समुचित सत्यापन के स्वीकृति दे दी।
प्रशासन की चुप्पी, जनता की नजरें!
फिलहाल, इस मामले पर संबंधित विभागों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन पत्र के सार्वजनिक होने के बाद यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आ गया है। आम जनता और सामाजिक संगठनों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि शासन इस पूरे मामले में कितनी पारदर्शिता और सख्ती दिखाता है।
मिसाल बने या फाइलों में दबे?
मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना जैसी योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक राहत पहुंचाने के लिए बनाई जाती हैं। यदि ऐसे मामलों में दोष सिद्ध होने पर भी कठोर कार्रवाई नहीं होती, तो यह योजनाओं की आत्मा पर चोट होगी। अब देखना यह है कि यह मामला एक मिसाल बनता है या फिर फाइलों के ढेर में दबकर रह जाता है।
पूर्व पार्षद पंकज साहू ने अंत में शासन से आग्रह किया है कि झूठे घोषणा-पत्र भरकर अनुचित लाभ लेने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ खिलवाड़ करने का साहस न कर सके।













