कौवाझर के ग्राम वासियों का काफ़िला… न्याय की राह पर उठी पगध्वनियाँ”:तालाब और रास्ते की लड़ाई… पूरा गांव पैदल पहुँच रहा उप-तहसील कार्यालय!
Mahasamund/महासमुंद जिला के तुमगांव उपतहसील के अंतर्गत कौवाझर ग्राम में फिर एक ओर राजस्व विभाग की उदासीनता एक नई करवट लेती दिख रही है,दूसरी ओर ग्रामीणों का धधकता गुस्सा… और इसी के बीच इतिहास बनाते हुए कौवाझर गांव के लोगों ने वह कदम उठा लिया है जिसे वे “हक की अंतिम लड़ाई” बता रहे हैं। तालाब और आवागमन के रास्ते को लेकर वर्षों से चली आ रही समस्या आखिरकार इस कदर बढ़ गई कि 17 नवंबर 2025 को पूरा गांव—बूढ़े, बच्चे, महिलाएँ, जवान—सबके सब पैदल यात्रा पर निकले को मजबूर हो पड़े है। जिनका गंतव्य : उप-तहसील कार्यालय, तुमगांव।
ग्रामीणों ने इस शांतिपूर्ण परंतु तीखे संदेश वाली यात्रा की अग्रिम सूचना थाना प्रभारी, थाना–तुमगांव को सौंपते हुए साफ कहा है—
“अब हम न्याय के दरबार में पहुँचेंगे… और जब तक हमारा रास्ता और तालाब सुरक्षित नहीं होता, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी। हमें कोई नहीं रोक सकता।”
“गांव का रास्ता रोका… तालाब पर कब्ज़े की कोशिश… अब धैर्य का बांध टूटा!”
कौवाझर के ग्रामीणों का आरोप है वर्षों के गांव के पारंपरिक मार्ग और तालाब के उपयोग पर व्यवस्थित ढंग से रोक लगाने का प्रयास किया जा रहा है। निस्तार का तालाब वर्षों से पूरे गांव के लिए जीवनरेखा रहा है—
लेकिन अब हालात ऐसे बन गए हैं कि ग्रामीणों और स्कूल जाने वाले बच्चों को अपने ही गांव में आने-जाने में बाधा का सामना करना पड़ रहा है।ग्रामवासियों का कहना है कि सरपंच और सम्बन्धित जिम्मेदारों तक बात पहुंचाने की कोशिशें की गईं, परंतु परिणाम सिर्फ आश्वासनों की धुंध में खोकर रह गया।ग्रामसभा में भी निर्णय की मांग उठी, मगर समस्या जस की तस रही। ग्रामीणों की पीड़ा गहराती गई… और अंततः गांव के बुजुर्गों ने परिषद बुलाई। निर्णय स्पष्ट था—
“इस बार चुप नहीं बैठेंगे… इस बार पूरा गांव चलेगा…”
17 नवंबर का दिन—कौवाझर से उठी एकता की सबसे बड़ी पदयात्रा!
सूरज की पहली किरणें कौवाझर पर पड़ीं, वैसे ही गांव की गलियों में असामान्य हलचल दिखाई दी।
महिलाएं सिर पर पानी की बोतलें और छोटे बच्चे हाथों में पोस्टर लिए तैयार है।बुजुर्ग अपने डंडे के सहारे, पर हौसले से लबरेज़…जवान सशक्त नारों से भरे हुए…
•“हमारा तालाब—हमारा हक!”
•“गांव का रास्ता बंद नहीं होगा!”
•“न्याय चाहिए—बस न्याय चाहिए!”
इन नारों से पूरा ग्राम गूंज उठा।
धीरे-धीरे काफिला निकालने को पूरा गांव एक होता नजर आ रहा है…गांव के छोर से होते हुए खेतों की पगडंडियों पर लंबी कतार बनती दिख रही है।
गांव की करीब हर एक परिवार इस यात्रा में शामिल होगा—जो नहीं चल सकता था, उसे दूसरों ने संभालकर साथ लिया जाएगा।यही दृश्य बताता है कि समस्या कितनी गंभीर और संवेदनशील है।
तुमगांव थाने में दी गई सूचना—एक चेतावनी, एक विनती और एक दृढ़ संकल्प… सब एक साथ!
थाना प्रभारी, थाना–तुमगांव को भेजे गए सूचना पत्र में ग्रामीणों ने साफ लिखा—
“हम पूरा गांव अपने परिवारों समेत पैदल मार्च कर उप- तहसील कार्यालय पहुंच रहे है। हमारा उद्देश्य शांतिपूर्ण है, परंतु हमारा संघर्ष सच्चा है। हमें निस्तार के तालाब और आवागमन के मार्ग की रक्षा करनी है। यह लड़ाई हम तब तक लड़ेंगे जब तक न्याय नहीं मिल जाता।”
इस सूचना के साथ ग्रामीणों ने प्रशासन को यह भी संकेत दे दिया है कि आज वे सिर्फ ज्ञापन देने नहीं जा रहे—वे जा रहे हैं अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए, अपनी पीढ़ियों के भविष्य के लिए।
सवाल यही… गांव की जीवनरेखा आखिर क्यों बन गई विवाद का कारण?
तालाब पर किसी प्रकार की रोक, सीमांकन विवाद या रास्ते पर अवैध दखल—इन मुद्दों पर ग्रामीणों में काफी समय से नाराजगी रही है।
मगर इस बार मामला गांव की एकता को छू गया। हर उम्र का हर व्यक्ति एक ही बात कह रहा है—
“तालाब हमारा है—रास्ता हमारा है—जीवन हमारा है… कोई छीन नहीं सकता!”ग्रामीणों का साफ संदेश: “शांतिपूर्ण यात्रा है—मगर इरादा दृढ़ है”!
यात्रा शुरू होने से पहले ग्रामवासियों ने स्पष्ट किया—
•वे किसी प्रकार का अवरोध और उपद्रव नहीं चाहते हम सिर्फ शांतिपूर्ण तरीके से न्याय चाहते है।
•यह यात्रा संघर्ष का प्रतीक है, हिंसा का नहीं
•उनका लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ न्याय पाना है
हालांकि, ग्रामीणों के तेवर तीखे हैं। उनके अनुसार वर्षों से अनसुनी की गई आवाज अब एक जनसैलाब बनकर प्रशासन के सामने खड़ी होगी।उप-तहसील कार्यालय में होगा ऐतिहासिक ज्ञापन—तालाब और रास्ते को लेकर निर्णायक मांगें!
कौवाझर के लोग इस यात्रा में न सिर्फ शिकायत लेकर जा रहे हैं, बल्कि स्पष्ट मांगों के साथ पहुंचेंगे—
•तालाब का संरक्षण और ग्रामीणों के पारंपरिक निस्तार अधिकार की कानूनी सुरक्षा!
•गांव के रास्ते को खुला कराने की स्पष्ट प्रशासनिक कार्रवाई!
•विवादित क्षेत्रों का चिन्हांकन और स्थायी समाधान!
•संबंधित जिम्मेदारों की जांच और कार्रवाई!
कौवाझर का यह संघर्ष सिर्फ गांव का नहीं… यह न्याय के अधिकार की गूंज है!यह पदयात्रा सिर्फ कदमों का सफर नहीं है—
•यह वर्षों से दबे आक्रोश का विस्फोट है।
•यह तालाब या रास्ते की लड़ाई नहीं—यह सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई है।
•कौवाझर के लोगों ने आज यह दिखा दिया है कि!
जब गांव एकजुट हो जाए…
तो कोई भी संघर्ष बड़ा नहीं रहता।तुमगांव की ओर बढ़ता यह जनसमूह प्रशासन के लिए एक संदेश है—
“न्याय अब मांगा नहीं जाएगा… लिया जाएगा।”













