“नाड़ी मास्टर का महा चमत्कार: क्यों हुई CMHO की नाड़ी ठंडी? 24 घंटे में श्रीराम क्लीनिक ताला-मुक्त! सील होते ही जिले में विज्ञापनों की बारिश, सिस्टम भी छाता ढूंढने लगा!”
Mahasamund/छत्तीसगढ़ का महासमुंद इन दिनों एक ही नाम जप रहा है – नाड़ी मास्टर शेष नारायण गुप्ता! वजह ये नहीं कि इनके स्पर्श मात्र से नाड़ी पढ़ी जाती है, वजह ये है कि प्रशासन एक दिन इनका क्लिनिक सील करता है और उनकी की नाड़ी पढ़ देता है और आश्चर्य अगली सुबह ये क्लिनिक ऐसे खुला मिलता है जैसे दूधवाले के दरवाजे पर पड़ा फटाका। जिले के लोग दंग, सिस्टम भौचक्का और CMHO साहब की नाड़ी रहस्यमयी ढंग से ठंडी पड़ गई।
15 साल का इलाज या 15 साल का फर्जी ‘इलाज-गीरी’?
श्रीराम केयर क्लिनिक 15 साल से बिना लाइसेंस के चल रहा था। कानून ने पूछा, “पेपर?” क्लिनिक ने कहा, “परेशान मत करो मुझे… मैं सेवा कर रहा हूं।”मरीज आ रहे थे, पैसा जा रहा था, दवाएं भारी, इलाज हल्का, फिर भी समाज सेवा का सर्टिफिकेट खुद की जेब में रखा हुआ था।स्थानीय लोग बताते हैं,
“ये क्लिनिक प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा था।”
नाक के नीचे क्या, ऐसा लगता था प्रशासन की गोद में बैठकर चल रहा था। वरना 15 साल तक किसी को खांसी भी नहीं आई?
29 को ताला और 30 को चमत्कारिक खुलना!
29 अक्टूबर 2025 को स्वास्थ्य विभाग ने रेड की। अंदर न लाइसेंस, न डिग्री, और ना ही रजिस्ट्रेशन…एक एक कर जांच अधिकारी पूछते गए और क्लिनिक की दीवारें भी शर्माती रहीं। ताला लगा, जनता ने राहत की सांस ली।30 अक्टूबर की सुबह लोग उठे तो देखा ताला गायब…दुकान पर बैठे लोहार ने तक कह दिया, “इतनी तेजी से तो मैं भी ताला नहीं खोल पाता।”
गुप्ता जी CMHO ऑफिस गए, मुस्कुराए, कागज दिखाए और लाइसेंस मिल गया। जिले के लोग पूछते रह गए कि ऐसी ‘स्पीड पोस्ट’ सेवा किस दिन से शुरू हुई।
जिले में घर-घर में बहस चली कि ये “दिवाली का गिफ्ट” था या “बड़ी डील की रोशनी।”
कुछ कथित मीडिया के बैनर भी ‘चिकित्सकीय चमत्कार’ में शामिल!
सीलिंग के बाद कुछ जिले बड़े अखबारों में खबरें छपीं कि गुप्ता जी तो चार महीने पहले लाइसेंस के लिए आवेदन कर चुके थे। शिकायतकर्ता को झूठा साबित कर दिया लोगों ने अखबार पढ़कर इतना सिर खुजलाया कि पूरा जिला डैंड्रफ -फ्री हो गया।
जिला नोडल से हमने की पूछतांछ !
जिला नोडल अधिकारी छत्रपाल चंद्राकर द्वारा हमे बताया गया– “भाई, ये कहानी झूठ का हाई-वोल्टेज ड्रामा है। आवेदन सिर्फ चार दिन पहले हुआ था।”वही CMHO द्वारा हमारे द्वारा फोन में संपर्क साधा और कार्यालय में गए मगर ना तो फोन उठाना उचित समझा और कार्यालय में भी पाए गए।
अखबारों में विज्ञापनों की बौछार!
सील हुए श्रीराम क्लीनिक जो अवैध तरीके से संचालित हो रहा था उसका दिवाली पर विज्ञापन गायब था,लेकिन ऐसा क्या चमत्कार हुआ जो क्लिनिक खुलते ही विज्ञापनों के पेज भर गए। लेकिन जिले से कुछ पत्रकार भी समझ गए कि यह सिर्फ स्याही नहीं छप रही, इसमें कुछ और मिश्रण भी मिलाया गया है।
मौतें, ओवरडोज और तुगलकी इलाज!
क्लिनिक में इलाज के नाम पर हर मरीज के चेहरे पर गुप्ता जी की वही फिलॉसफर वाली मुस्कान रहती थी।एक युवती की ओवरडोज से मौत, एक बच्चा बाल-बाल बचा, कई मरीज महीनों इलाज के बाद भी ठीक नहीं हुए। बाहर की पाँच रुपये की दवा ने उनका उपचार कर दिया।लोग कहते हैं, “ये नाड़ी मास्टर नहीं… नाड़ी मिसफायर है।”
कई मरीज बताते हैं कि गुप्ता जी डराते थे, “अगर इंजेक्शन नहीं लगवाया तो हालत खराब हो जाएगी।”अरे साहब, डराना बंद करो… हालत पैसे से खराब हो रही है।
7.5 लाख वाली ठगी और नकदी का ‘गणित’!
गुप्ता जी खुद एक बार ठगी के शिकार हुए और 7.5 लाख लुटा बैठे। FIR भी दर्ज हुई।लेकिन सवाल अब भी वही – इतने पैसे एकसाथ घर में कहां से रखे थे?क्लिनिक तो सेवा का था ना… फिर ये रकम किस सेवा की थी?जिला में लोग ये बात अब चाय की दुकानों पर नमकीन के साथ चर्चा में जोड़ रहे हैं।
अश्लील हरकतों का पुराना इतिहास!
महिला मरीजों के आरोप पुराने हैं। एक बार बवाल इतना बढ़ा कि प्रशासन को क्लिनिक में CCTV लगवाना पड़ा।लेकिन CCTV देखकर भी गुप्ता जी को फर्क नहीं पड़ा। लोग कहते हैं, “इन्होंने तो कैमरे को भी ऐसा ट्रेटमेंट दिया जैसे वह भी मरीज हो।”
अफवाह ये भी है कि एक बार कैमरा खुद ही बोलने वाला था, “मेरी भी प्राइवेसी रखो भाई।”
धमकी का नया खेल: वकील बनाम शिकायतकर्ता!
सच्चाई उजागर करने वालों को धमकियां दी जा रही हैं। कथाकथित वकील सौरभ साहू तक बोल पड़े – “मानहानि का केस ठोक दूंगा।”शिकायतकर्ता बोले, “ठोक दो, हम सत्य के साथ हैं।”जिले के लोग बोले, “मानहानि नहीं… पहले ये पता करो इलाज का नाटक कब तक चलेगा।”
सवाल यह है कि CMHO की नाड़ी ठंडी क्यों हुई?क्या लंबी डील हुई?CMHO आई नागेश्वर राव अभी अभी आए है जिले में और सुर्खियों में आ गए। क्या डील इतनी बड़ी थी कि CMHO आई नागेश्वर की नाड़ी ठंडी हो गई?
जिला अब एक ही बात बोल रहा है –
“CMHO साहब सीलिंग के समय इतने सख्त थे, फिर बिना दस्तावेज वाली फाइल रातों-रात इतनी प्यारी कैसे लग गई?”कुछ लोगों ने तो मजाक में कहा, “लगता है दस्तावेजों के साथ मिठाई भी गई होगी। तभी लाइसेंस इतनी मिठास से निकला।”
अब पूरे जिले में हड़कंप!
CMHO ने अब अवैध क्लिनिकों की लिस्ट बनाने के आदेश दे दिए हैं। पुलिस भी FIR के लिए पेन की निब तेज कर रही है।जिला मान रहा है कि यह मामला पूरे स्वास्थ्य तंत्र की पोल खोलने वाला है।अब यह सिर्फ एक क्लिनिक का मामला नहीं, पूरे सिस्टम की MRI रिपोर्ट है।
जिले का करोड़ों का सवाल: गुप्ता जी जेल जाएंगे या चमत्कार फिर दोहराएंगे?
महासमुंद की जनता अब पॉपकॉर्न लेकर इंतजार कर रही है।कोर्ट, पुलिस और प्रशासन की तीन-स्तरीय रेस है। देखना ये है कि आगे क्या खुलासा होता है।
क्या इस बार सच जीतेगा या फिर नाड़ी मास्टर अपना कोई नया चमत्कार दिखाएंगे?
जिले का माहौल इस समय ऐसा है मानो कोई सुपरहिट ड्रामा चल रहा हो।बस फर्क इतना है कि टिकट की कीमत जनता ने 15 साल से अपनी जेब से भरी है।













