March 2, 2026 3:25 am

दांत गिनकर मुआवजा”:दिल्ली की महिला बोली, ‘कुत्तों ने 42 बार काटा, तो 20 लाख दो ना सरकार!’

दांत गिनकर मुआवजा”:दिल्ली की महिला बोली, ‘कुत्तों ने 42 बार काटा, तो 20 लाख दो ना सरकार!’

आवारा कुत्तों के आतंक पर अदालत में ‘हिसाब-किताब का न्याय’ — दिल्ली हाई कोर्ट ने मांगा MCD से जवाब!

New Delhi/ देश की राजधानी में इन दिनों अदालत के गलियारे में एक अजीबोगरीब लेकिन दर्दनाक मामला गूंज रहा है — “कुत्ते के दांतों के हिसाब से मुआवजा।”दक्षिण दिल्ली की एक महिला प्रियंका राय ने एमसीडी (दिल्ली नगर निगम) से 20 लाख रुपये का मुआवजा मांगा है, यह कहते हुए कि “अगर सरकार आवारा कुत्तों को पालती है, तो उनके काटने की कीमत भी सरकार को ही चुकानी होगी।”
दरअसल, यह मामला किसी सड़क पर हुई साधारण दुर्घटना का नहीं, बल्कि उस डर और दर्द का है जो 7 मार्च की रात प्रियंका के जीवन में घुस गया। मालवीय नगर के खिड़की विलेज रोड पर जब वह अपनी मोटरसाइकिल के पीछे बैठी थीं, तभी अचानक झुंड के झुंड आवारा कुत्ते उनकी ओर झपट पड़े। एक नहीं, दो नहीं, पूरे 42 दांतों के निशान उनके पैरों और शरीर पर बन गए।वह चीखती रहीं, लोग जमा हुए, कुत्ते भागे — लेकिन इस हमले के निशान न सिर्फ उनकी त्वचा पर बल्कि उनके मन पर भी गहरे पैबंद छोड़ गए।

“मुआवजा गणना का फॉर्मूला: प्रति दांत 10,000 रुपये!”

हमले के बाद प्रियंका ने केवल अस्पताल का रास्ता नहीं पकड़ा, बल्कि अदालत का दरवाजा भी खटखटाया। उन्होंने कहा —

“अगर किसी इंसान की गलती से नुकसान होता है तो हर्जाना मिलता है, तो फिर सरकार की गलती से घूम रहे इन आवारा कुत्तों का हर्जाना क्यों नहीं?”

प्रियंका ने अपने मुआवजे की गणना पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के 18 अगस्त 2023 के एक ऐतिहासिक फैसले के आधार पर की है। उस आदेश में कहा गया था कि —

•प्रति दांत के निशान पर ₹10,000 रुपये की भरपाई दी जाए।

•और जहां त्वचा से मांस अलग हुआ हो, वहां हर 0.2 सेंटीमीटर पर ₹20,000 रुपये का मुआवजा।

प्रियंका ने दावा किया कि उनके शरीर में कुल 12 सेंटीमीटर का घाव हुआ, जो इस फार्मूले से 12 लाख रुपये का बनता है।इसके अलावा 42 दांतों के निशानों के लिए 4.2 लाख रुपये, और मानसिक-आर्थिक पीड़ा के लिए 3.8 लाख रुपये, यानी कुल 20 लाख रुपये का हिसाब-किताब का “कुत्ता मुआवजा”।

अदालत में गूंजी मुवाबजे की बहस’!

29 अक्टूबर को दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की अदालत में जब यह मामला आया, तो अदालत के गलियारे तक इस याचिका की गूंज फैल गई।न्यायमूर्ति ने दिल्ली नगर निगम (MCD) से पूछा —“आप बताइए, राजधानी की सड़कों पर लोग सुरक्षित हैं या कुत्ते? अगर नागरिक पर हमला होता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी?”

अदालत ने एमसीडी को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। यह आदेश कोई साधारण प्रशासनिक निर्देश नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जो शहर को “स्मार्ट सिटी” कहती है, मगर सड़कों पर लोगों को कुत्तों के डर से भागने पर मजबूर कर देती है।

“घर से बाहर निकलने में डर लगने लगा”!

प्रियंका के वकील साहेज ने अदालत में कहा कि हमले के बाद उनकी मुवक्किल महीनों तक मानसिक तनाव में रहीं।

“वह बैंक में सहायक शाखा प्रबंधक हैं। लेकिन कुत्तों के उस झुंड के बाद वह घर से बाहर निकलने से डरने लगीं। इलाज, छुट्टी और डर — सबने उनके करियर और आत्मविश्वास पर गहरा असर डाला।”

उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली में कुत्तों की आबादी इतनी बढ़ गई है कि किसी मोहल्ले में बिना लकड़ी या डंडे के निकलना अब जोखिम भरा हो गया है।

दर्द का गणित बनाम कानून की भावना!

अदालत में सबसे दिलचस्प बहस यह रही कि क्या किसी राज्य के उच्च न्यायालय का फैसला दूसरे राज्य की अदालत पर बाध्यकारी हो सकता है?
वकील साहेज ने तर्क दिया —

“भले ही यह आदेश बाध्यकारी न हो, लेकिन न्याय के सिद्धांत समान हैं। जब नुकसान समान है, तो मुआवजा भी समान होना चाहिए।”

प्रियंका ने बताया कि उनके बाएं पैर में गहरी चोट आई थी, जिससे उन्हें महीनों तक फिजियोथेरेपी करानी पड़ी। ऑफिस की छुट्टियां बढ़ती गईं और डर गहराता गया।

‘कुत्ता नीति’ पर उठे सवाल!

यह मामला अब सिर्फ एक महिला के मुआवजे का नहीं रहा, बल्कि दिल्ली की “कुत्ता नीति” पर सवाल उठाने वाला प्रतीक बन गया है।हर साल राजधानी में हजारों लोग आवारा कुत्तों के हमले का शिकार बनते हैं, लेकिन उनके लिए न कोई स्पष्ट मुआवजा नीति है, न कोई जिम्मेदारी तय।एमसीडी का कहना है कि वे स्ट्रे डॉग्स के नसबंदी और टीकाकरण अभियान चला रहे हैं, लेकिन आंकड़ों में सुधार दिखाई नहीं देता।
जहां एक ओर पशु अधिकार संगठन इन कुत्तों के संरक्षण की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर नागरिक अपने बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

“कब तक दांत गिनकर इंसाफ मिलेगा?”!

प्रियंका की याचिका ने देशभर में एक नई बहस छेड़ दी है — क्या इंसान को मुआवजा तभी मिलेगा जब वह अपने जख्मों की गिनती अदालत में रखेगा?
क्या “दांत के बदले दांत” अब “दांत के बदले मुआवजा” बन गया है?
फिलहाल अदालत ने एमसीडी से जवाब तलब कर दिया है। अगली सुनवाई में तय होगा कि क्या प्रियंका राय को 20 लाख मिलेंगे या सिर्फ दिलासा।
पर एक बात तय है —
अब दिल्ली की गलियों में सिर्फ कुत्ते नहीं, उनके काटने के ‘कानूनी दांत’ भी दिखने लगे हैं।

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