March 2, 2026 9:01 am

“कावेरी सीड्स पर बकाया भुगतान का बम: किसानों का गुस्सा उबाल पर, शुक्रवार को फूटेगा आंदोलन का ज्वालामुखी”!

कावेरी सीड्स पर बकाया भुगतान का बम: किसानों का गुस्सा उबाल पर, शुक्रवार को फूटेगा आंदोलन का ज्वालामुखी”!

mahasamund/महासमुंद सहित छत्तीसगढ़ के कई जिलों के किसान आज कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और वहां के डिप्टी कलेक्टर आशीष कर्मा को एक गरजते हुए ज्ञापन सौंपा। आरोप बेहद गंभीर थे—कावेरी सीड्स कंपनी लिमिटेड पर करोड़ों रुपये का बकाया भुगतान रोकने का दोष किसानों ने खुले शब्दों में मढ़ दिया। किसान नेताओं ने दो टूक कहा कि अब धैर्य का बाँध टूट चुका है और यदि प्रशासन ने दखल नहीं दिया तो सड़कों पर आंदोलन की ज्वाला धधक उठेगी।

“पसीने की फसल, पर खाली जेब”!
जिला पंचायत सदस्य एवं किसान नेता जागेश्वर ‘जुगनू’ चंद्राकर, कृष्णा चंद्राकर, और प्रवीन चंद्राकर ने बताया कि वर्ष 2025 में कावेरी सीड्स कंपनी ने किसानों से 967.724 एकड़ जमीन में बीज उत्पादन का अनुबंध किया था। किसानों ने विश्वास के साथ बीज तैयार कर कंपनी को उपलब्ध कराया। परंतु कंपनी ने किसानों की मेहनत को ठेंगा दिखाते हुए अब तक भुगतान ही नहीं किया।

बकाया की राशि सुनकर हर कोई दंग रह जाए—₹ 2,82,74,148/- (दो करोड़ बयासी लाख चौहत्तर हजार एक सौ अड़तालीस रुपये)।
यह रकम उन हजारों किसानों की जिंदगी और उनके परिवारों का सहारा है, जिनका अब चूल्हा ठंडा पड़ने की कगार पर है।

“कंपनी की बेरुखी, किसानों की बेबसी”!
किसानों ने बताया कि कई बार वे कंपनी प्रबंधन से मिले, गुहार लगाई, लिखित मांग की, लेकिन परिणाम सिफर रहा। अब आलम यह है कि किसान कर्ज, ब्याज और महंगाई की चक्की में पिस रहे हैं।

एक किसान ने गुस्से में कहा –

“हम खेतों में दिन-रात खून-पसीना बहाते हैं, पर हमारी मेहनत को लूटकर कंपनी ऐश कर रही है। अगर यही हाल रहा तो हम अपने हक के लिए सड़कों पर उतरेंगे।”

किसानों के हस्ताक्षरों की गूंज!
प्रस्तुत ज्ञापन में न सिर्फ महासमुंद, बल्कि बलौदाबाजार, रायपुर और अन्य जिलों के किसानों के हस्ताक्षर शामिल हैं। यह दस्तावेज किसानों की सामूहिक पीड़ा और साझा संघर्ष का प्रतीक बन गया है। यह केवल एक ज्ञापन नहीं, बल्कि कंपनी और प्रशासन दोनों के लिए अंतिम चेतावनी का बिगुल है।

आंदोलन की आहट!
किसानों ने साफ कर दिया है कि अब उनकी सहनशक्ति की सीमा खत्म हो चुकी है।26 सितंबर, शुक्रवार को दोपहर 1 बजे महासमुंद के राम मंदिर प्रांगण में एक निर्णायक बैठक बुलाई गई है। इसी बैठक में आगामी आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।

संकेत स्पष्ट हैं—यदि कंपनी ने तत्काल भुगतान नहीं किया तो महासमुंद की धरती पर किसानों का हुजूम आंदोलन की ऐसी लहर खड़ी करेगा, जो सरकार और कंपनी दोनों की नींव हिला देगी।

“किसान बनेंगे आंदोलनकारी”!
यह मामला केवल पैसों का नहीं, बल्कि किसानों की गरिमा और अस्तित्व का है। खेतों की मिट्टी से उठी यह पुकार अब संघर्ष का बिगुल बन चुकी है। किसान नेताओं का कहना है कि यह किसी एक जिले की लड़ाई नहीं, बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ के किसानों की सामूहिक जंग है।

“हमने बीज दिया, उत्पादन दिया, अब हमारा हक भी चाहिए। यदि कंपनी ने कान नहीं खोला, तो हम अपना हक छीनकर रहेंगे।”

प्रशासन पर दबाव!
किसानों ने मांग की है कि जिला प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप कर बकाया भुगतान सुनिश्चित कराए।
सवाल यह भी उठ रहा है कि जब किसानों की खून-पसीने की कमाई पर कंपनी कुंडली मारकर बैठी है, तो प्रशासन अब तक चुप क्यों है?
क्या यह मामला सिर्फ ज्ञापन की फाइलों में दबकर रह जाएगा, या वास्तव में किसानों को न्याय मिलेगा?

आगे क्या?
शुक्रवार की बैठक से तय होगा कि किसान शांतिपूर्ण धरना देंगे, रैली निकालेंगे, या फिर बड़ा उग्र आंदोलन करेंगे।एक बात तो तय है—अब यह मामला केवल आर्थिक लेन-देन नहीं रहा, बल्कि किसान बनाम कॉरपोरेट की जंग बन चुका है।

महासमुंद से उठी यह आग अब धीरे-धीरे पूरे प्रदेश में फैल सकती है।कावेरी सीड्स कंपनी पर बकाया भुगतान का यह मामला केवल किसानों की मेहनत और उनकी आजीविका से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के कृषि तंत्र, प्रशासनिक संवेदनशीलता और कॉरपोरेट जिम्मेदारी की भी बड़ी परीक्षा है।

शुक्रवार को राम मंदिर प्रांगण में किसान जुटेंगे, और वहां से निकलने वाला फैसला यह तय करेगा कि किसानों की आवाज व्यवस्था को झकझोर पाएगी या फिर यह आवाज एक और अनसुनी चीख बनकर रह जाएगी।

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