“जिन्होंने गढ़े हजारों भविष्य, उनकी विदाई में उमड़ पड़ा सैलाब—गाजे बाजे,आंसुओं और तालियों के बीच रवाना हुए विजय कुमार देवता”
37 वर्षों तक बच्चों में संस्कारों की ज्योति जलाने वाले विजय कुमार देवता को अश्रुपूर्ण विदाई,,,,
रिपोर्ट : सुशांत पांडा बरगढ़
बरगढ़, गाइसिलेट। विद्यालय का प्रांगण शुक्रवार को किसी साधारण विदाई समारोह का नहीं, बल्कि एक ऐसे युग के समापन का साक्षी बना जिसने 37 वर्षों तक हजारों विद्यार्थियों के जीवन को ज्ञान, संस्कार और मानवता के प्रकाश से आलोकित किया। कटाबाहाल स्थित नेताजी उच्च विद्यालय में उस समय भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा जब आदर्श शिक्षक श्री विजय कुमार देवता अपने गौरवशाली शिक्षकीय जीवन की अंतिम औपचारिक विदाई ले रहे थे। मंच पर सम्मान था, आंखों में आंसू थे और वातावरण में एक ही भावना गूंज रही थी—“ऐसे गुरु बार-बार नहीं मिलते।”
जैसे ही समारोह प्रारंभ हुआ, विद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। पूर्व छात्र-छात्राएं, अभिभावक, शिक्षक, ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित होकर उस व्यक्तित्व को सम्मान देने पहुंचे, जिसने अपने जीवन के 37 अमूल्य वर्ष शिक्षा की सेवा में समर्पित कर दिए। हर चेहरा यह बता रहा था कि यह केवल एक शिक्षक की सेवानिवृत्ति नहीं, बल्कि एक ऐसी परंपरा का विराम है जिसने अनगिनत विद्यार्थियों को जीवन का सही मार्ग दिखाया।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक श्री सुदर्शन बारिक की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में विज्ञान शिक्षक प्रमोद साहू, शारीरिक शिक्षक कांग्रेस प्रधान तथा पूर्व शिक्षक अनंग साहू ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में उपस्थित सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि श्री विजय कुमार देवता ने कभी शिक्षण को नौकरी नहीं माना, बल्कि उसे राष्ट्र निर्माण का पवित्र मिशन समझकर निभाया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं विद्यालय के पूर्व प्रधानाध्यापक चंद्रभानु बढ़ेई ने कहा कि विजय कुमार देवता जैसे शिक्षक किसी भी शैक्षणिक संस्थान की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं। उन्होंने कहा कि उनके अनुशासन, समयपालन, कर्तव्यनिष्ठा और विद्यार्थियों के प्रति आत्मीय व्यवहार ने विद्यालय की पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियां भी उनके कार्यों को प्रेरणा के रूप में याद रखेंगी।
समारोह में ग्राम के गौंटिया मानभंजन बरिहा, जटाधारी मिश्र, विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सनातन बढ़ेई, पूर्व अध्यक्ष प्रफुल्ल बेहरा, बिपिन बिहारी प्रधान सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाध्यापक रमेश साहू, ऐश्वर्य शेखर देवता, मोहन राणा, अरक्षित बारिक, विष्णु भोई, प्रफुल्ल डनसेना एवं संकीर्तन सेठ ने भी श्री देवता के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें शिक्षा जगत का प्रेरणास्रोत बताया। सुदाम प्रधान, इंद्रमणि प्रधान, वीरेंद्र प्रधान, समारु साहू, तेजराज कर्णाल एवं कल्पतरु कर्णाल सहित अनेक लोगों ने उन्हें सम्मानित किया।
वक्ताओं ने कहा कि श्री विजय कुमार देवता ने केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं दिया, बल्कि विद्यार्थियों में सत्य, अनुशासन, नैतिकता, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना भी विकसित की। उन्होंने शिक्षा को जीवन निर्माण का माध्यम बनाया और हजारों विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को नई दिशा दी। यही कारण है कि आज उनके शिष्य समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता के साथ अपने गुरु का नाम भी गौरव से लेते हैं।
शिक्षा के साथ-साथ श्री देवता ने कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी अपनी अमिट पहचान बनाई। वर्षों तक उन्होंने धनुयात्रा के मंच पर कंस का ऐसा सशक्त अभिनय किया कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते थे। रावण और त्रिपुरासुर जैसे पौराणिक पात्रों को भी उन्होंने प्रभावशाली ढंग से जीवंत किया। दूरदर्शन के कई धारावाहिकों और टेलीफिल्मों में उनके अभिनय ने यह सिद्ध कर दिया कि वे केवल एक कुशल शिक्षक ही नहीं, बल्कि बहुमुखी प्रतिभा के धनी कलाकार भी हैं। समारोह में बलांगीर के लोकप्रिय ‘कटप्पा’ की उपस्थिति ने कार्यक्रम में उत्साह और आकर्षण का नया रंग भर दिया।
जब श्री विजय कुमार देवता अपने विदाई संबोधन के लिए खड़े हुए तो पूरा सभागार शांत हो गया। भावुक स्वर में उन्होंने कहा, “मेरे आदर्श गुरु श्री श्याम सुंदर प्रधान से प्रेरणा लेकर मैंने एक अच्छा शिक्षक बनने का प्रयास किया। इस इंसान बनाने की पाठशाला में मेरा एकमात्र उद्देश्य अच्छे इंसानों का निर्माण करना था।” उनके इन शब्दों ने उपस्थित लोगों के हृदय को झकझोर दिया। कई पूर्व विद्यार्थी अपने प्रिय गुरु से मिलकर भावुक हो उठे और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
कार्यक्रम का संचालन सहायक शिक्षक नवीन बरिहा ने प्रभावशाली ढंग से किया, जबकि बिपिन बिहारी नंद ने सभी अतिथियों और उपस्थित जनसमुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया।
गौरतलब है कि श्री विजय कुमार देवता ने 24 अक्टूबर 1989 को अपने शिक्षकीय जीवन की शुरुआत की थी। लगभग 37 वर्षों तक निरंतर शिक्षा की अलख जगाने के बाद वे 31 जुलाई 2026 को नेताजी उच्च विद्यालय से सेवानिवृत्त हुए। इस लंबे कार्यकाल में उन्होंने हजारों विद्यार्थियों को केवल परीक्षा में सफल होना ही नहीं सिखाया, बल्कि जीवन में अच्छा इंसान बनने की प्रेरणा भी दी।
समारोह का सबसे भावुक क्षण तब आया जब विद्यालय परिवार, छात्र-छात्राओं, पूर्व विद्यार्थियों और सैकड़ों ग्रामीणों ने बाजे-गाजे, नृत्य और संगीत के साथ एक भव्य शोभायात्रा निकाली। यह शोभायात्रा कटाबाहाल गांव की गलियों से गुजरते हुए श्री विजय कुमार देवता को उनके मुंडापाली स्थित निवास तक सम्मानपूर्वक पहुंचाने गई। रास्ते भर लोगों ने पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया। अनेक लोगों की आंखें नम थीं, लेकिन उनके चेहरों पर इस बात का गर्व भी था कि उनके बीच ऐसा शिक्षक रहा जिसने अपना पूरा जीवन समाज और शिक्षा को समर्पित कर दिया।
यह विदाई केवल एक कर्मचारी की औपचारिक सेवानिवृत्ति नहीं थी, बल्कि गुरु और शिष्य के उस अटूट रिश्ते का जीवंत प्रमाण थी, जिसमें सम्मान, श्रद्धा और प्रेम जीवनभर कायम रहता है। विजय कुमार देवता भले ही विद्यालय की सेवा से निवृत्त हो गए हों, लेकिन उनके संस्कार, उनकी शिक्षाएं और उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों के माध्यम से सदैव जीवित रहेंगे।












