October 25, 2026 8:26 pm

ऑपरेशन खैर’ से कांपा तस्कर खैर लकड़ी सिंडिकेट महासमुंद पुलिस का अंतरराज्यीय प्रहार! तीन राज्यों में छापेमारी से मचा हड़कंप, करोड़ों की नकदी बरामद!

ऑपरेशन खैर’ से कांपा तस्कर खैर लकड़ी सिंडिकेट महासमुंद पुलिस का अंतरराज्यीय प्रहार! तीन राज्यों में छापेमारी से मचा हड़कंप, करोड़ों की नकदी बरामद!

ऑपरेशन खैर’ से कांपा तस्करी नेटवर्क जंगल की लकड़ी से करोड़ों के खेल तक! फर्जी एनओसी, संदिग्ध बिलिंग और अवैध कारोबार की परतें खोलने में जुटी महासमुंद पुलिस!

हरिद्वार से मुख्य आरोपी संजय छापरिया गिरफ्तार, ओडिशा के बरगढ़ से 60 लाख और हिमाचल प्रदेश से 35 लाख रुपये बरामद!

महासमुंद। खैर की लकड़ी के कथित अवैध कारोबार, फर्जी एनओसी और बिलिंग के जरिए अंतरराज्यीय स्तर पर चल रहे संगठित नेटवर्क के खिलाफ महासमुंद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। छत्तीसगढ़ से लेकर ओडिशा, मध्यप्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश तक फैले बताए जा रहे इस नेटवर्क के विरुद्ध की गई छापेमारी में अब तक 3 करोड़ 61 लाख 52 हजार 880 रुपये नकद, लगभग 70 टन खैर लकड़ी और करीब एक करोड़ रुपये मूल्य के नौ वाहन जब्त किए जाने की जानकारी पुलिस ने दी है।

पुलिस की इस कार्रवाई में एक अहम घटनाक्रम तब सामने आया, जब खैर लकड़ी के अवैध कारोबार की प्रतिस्पर्धा से जुड़े जानलेवा हमले के मामले में फरार आरोपी संजय छापरिया को उत्तराखंड के हरिद्वार से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद पूछताछ के आधार पर ओडिशा के बरगढ़ और हिमाचल प्रदेश में अलग-अलग ठिकानों पर दबिश देकर नकदी बरामद की गई। पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य केवल लकड़ी की जब्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि कथित अवैध कारोबार से अर्जित आर्थिक लाभों का पता लगाकर उन्हें कानून के दायरे में लाना भी है।

फर्जी एनओसी से शुरू हुई जांच, अंतरराज्यीय नेटवर्क तक पहुंची पुलिस!

मामले की शुरुआत खैर लकड़ी के कथित अवैध परिवहन में इस्तेमाल किए गए एनटीपीएस (NTPS) एनओसी दस्तावेज में कूटरचना के आरोपों से हुई। पुलिस के अनुसार, वन परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा के आवेदन पर 23,350 किलोग्राम खैर लकड़ी के अवैध परिवहन से संबंधित दस्तावेजों में कथित हेरफेर और धोखाधड़ी के मामले में थाना पिथौरा में 9 जुलाई 2026 को अपराध क्रमांक 172/2026 दर्ज किया गया था।

इस प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2), 3(5) एवं 111, आर्म्स एक्ट की धारा 25 तथा भारतीय वन अधिनियम, 1927 की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।

जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने आरोपी मनीष अग्रवाल, संजय छापरिया और उनके कथित सहयोगियों से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर कार्रवाई की। जांच का दायरा कई राज्यों तक पहुंचने के साथ ही लकड़ी के परिवहन, दस्तावेजों की वैधता, कारोबार से जुड़े लोगों और कथित आर्थिक लेनदेन की पड़ताल भी महत्वपूर्ण हो गई।

हरिद्वार में गिरफ्तारी, बरगढ़ में खुला नकदी का राज!

खैर लकड़ी के कथित अवैध कारोबार की प्रतिस्पर्धा को लेकर सरायपाली निवासी एक व्यक्ति पर जानलेवा हमले का मामला थाना सिंघोड़ा में अपराध क्रमांक 87/2026 के रूप में दर्ज है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में फरार चल रहे आरोपी संजय छापरिया को महासमुंद पुलिस की टीम ने 18 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार, उत्तराखंड से घेराबंदी कर गिरफ्तार किया।

आरोपी को वैधानिक प्रक्रिया के तहत न्यायालय से ट्रांजिट रिमांड प्राप्त कर महासमुंद लाया गया। पुलिस अभिरक्षा में पूछताछ और उसके मेमोरेंडम कथन के आधार पर जांच टीम ने ओडिशा के बरगढ़ जिले में दबिश दी।

कार्रवाई के दौरान आरोपी के बरगढ़ स्थित आवास से 45 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अतिरिक्त, पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपने एक सहयोगी, जो टैक्स कंसल्टेंट बताया गया है, के पास रखने के लिए 15 लाख रुपये दिए थे। इस रकम को भी 22 अक्टूबर 2026 को विधिवत जब्त किया गया।

इस तरह बरगढ़ में दो अलग-अलग ठिकानों से कुल 60 लाख रुपये की नकदी जब्त की गई। पुलिस अब इस रकम के स्रोत और कथित अवैध कारोबार से उसके संबंधों की जांच कर रही है।

हिमाचल प्रदेश में फिर दबिश, 35 लाख रुपये और बरामद!

महासमुंद पुलिस की कार्रवाई हिमाचल प्रदेश तक भी पहुंची। पुलिस के अनुसार, वहां कुछ ठिकानों पर आरोपी मनीष अग्रवाल और संजय छापरिया को कथित रूप से अवैध खैर लकड़ी खपाने में सहायता देने वाले
लोगों से जुड़े ठिकानों की जांच की गई।

इससे पहले हिमाचल प्रदेश के विभिन्न ठिकानों से 1 करोड़ 70 लाख रुपये नकद जब्त किए जाने की जानकारी पुलिस ने दी थी। इसी क्रम में एक अन्य स्थान पर दबिश देकर 35 लाख रुपये और बरामद कर जब्त किए गए।

बरगढ़ से मिली 60 लाख रुपये की रकम और हिमाचल प्रदेश से बरामद 35 लाख रुपये की कार्रवाई ने मामले में आर्थिक जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी मनीष अग्रवाल, संजय छापरिया और उनके सहयोगियों के विभिन्न ठिकानों से अब तक कुल 3,61,52,880 रुपये नकद जब्त किए जा चुके हैं।

यह राशि कथित तौर पर अवैध खैर लकड़ी के कारोबार से अर्जित बताई गई है। हालांकि, रकम के वास्तविक स्रोत, प्रत्येक आरोपी की भूमिका और अपराध से उसके संबंध का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के अधीन रहेगा।

70 टन खैर लकड़ी जब्त, नौ वाहन भी पुलिस के कब्जे में!

कार्रवाई का एक बड़ा पहलू लकड़ी और परिवहन में इस्तेमाल किए गए वाहनों की जब्ती भी है। पुलिस के मुताबिक, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्यप्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में विभिन्न ठिकानों पर दबिश देकर अब तक लगभग 70 टन अवैध खैर लकड़ी जब्त की जा चुकी है।

इसके अलावा, मामले में कुल नौ वाहन जब्त किए गए हैं। इनमें चार ट्रक और एक डंपर सहित पांच भारी मालवाहक वाहन, एक हुंडई क्रेटा, एक महिंद्रा एक्सयूवी-500 और एक डस्टर सहित तीन कारें तथा एक मालवाहक पिकअप वाहन शामिल हैं।

पुलिस ने इन वाहनों की कुल अनुमानित कीमत लगभग एक करोड़ रुपये बताई है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इन वाहनों का इस्तेमाल कथित अवैध परिवहन में किस प्रकार किया गया और संबंधित व्यक्तियों की क्या भूमिका रही।

अब आर्थिक लाभ पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी!

महासमुंद पुलिस ने बताया कि जब्त की गई 3,61,52,880 रुपये की नकदी की विधिवत कुर्की तथा आरोपियों को कथित अपराध से अर्जित आर्थिक लाभों से वंचित करने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 107 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता, आर्म्स एक्ट और भारतीय वन अधिनियम के तहत दर्ज अपराधों की विवेचना जारी है। पुलिस दस्तावेजों की सत्यता, लकड़ी के परिवहन के स्रोत, कथित नेटवर्क से जुड़े व्यक्तियों और आर्थिक लेनदेन की कड़ियों की जांच कर रही है।

जंगल की संपदा की सुरक्षा और जवाबदेही का सवाल!

खैर की लकड़ी का अवैध कारोबार केवल वन संपदा के नुकसान का विषय नहीं है। यदि दस्तावेजों में कूटरचना, धोखाधड़ी और अवैध परिवहन के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह व्यवस्था की निगरानी और कानूनी जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला होगा। ऐसे मामलों में यह पता लगाना भी जरूरी है कि लकड़ी कहां से लाई गई, परिवहन के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ और कथित कारोबार से किन लोगों को आर्थिक लाभ मिला।

महासमुंद पुलिस की अब तक की कार्रवाई में नकदी, लकड़ी और वाहनों की बड़ी जब्ती सामने आई है। लेकिन इस पूरे प्रकरण की असली तस्वीर विवेचना पूरी होने, साक्ष्यों की जांच और न्यायालय में आरोपों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।

फिलहाल, महासमुंद पुलिस की अंतरराज्यीय कार्रवाई जारी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के दौरान कथित सिंडिकेट की अन्य कड़ियां कितनी उजागर होती हैं और अवैध खैर लकड़ी के कारोबार से जुड़े आरोपों पर कानून के तहत आगे क्या कार्रवाई होती है।

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