October 6, 2026 7:50 am

नावाखाई जोहार में उमड़ा राजगोंड समाज का जनसैलाब, हाथीबाहरा में दिखी एकता की ताकत!

नावाखाई जोहार में उमड़ा राजगोंड समाज का जनसैलाब, हाथीबाहरा में दिखी एकता की ताकत!

बुढ़ादेव मंदिर प्रांगण में संस्कृति, परंपरा और शिक्षा का संगम—प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का हुआ सम्मान!

हाथीबाहरा,महासमुंद।खल्लारी विधानसभा क्षेत्र के हाथीबाहरा में उस समय सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का अद्भुत नजारा देखने को मिला, जब आदिवासी राजगोंड समाज, सुवरमाल राज हाथीबाहरा के तत्वावधान में बुढ़ादेव मंदिर प्रांगण में **नावाखाई जोहार भेंट-मिलन समारोह** का भव्य आयोजन किया गया। सातों सर्कल के राजगोंड समाज परिवारों की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने पूरे आयोजन को उत्सव के साथ-साथ सामाजिक एकजुटता का प्रभावशाली मंच बना दिया।

समारोह में समाज के परिवारों के साथ जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, सामाजिक पदाधिकारी, वरिष्ठजन, महिलाएं और बड़ी संख्या में युवा एवं विद्यार्थी शामिल हुए। पारंपरिक संस्कृति, सामाजिक भाईचारे और आपसी सद्भाव से सराबोर कार्यक्रम में नावाखाई जोहार की शुभकामनाओं का आदान-प्रदान हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जनपद पंचायत बागबाहरा के अध्यक्ष श्री केशव नायकराम चन्द्राकर रहे। वहीं जिला पंचायत महासमुंद के उपाध्यक्ष भीखमसिंह ठाकुर एवं  जनपद पंचायत बागबाहरा के उपाध्यक्ष श्री तरुण व्यवहार अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्षता आदिवासी राजगोंड समाज सुवरमाल राज के अध्यक्ष श्री तुलाराम ठाकुर ने की।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में श्रीमती मधुलिका गणेश चन्द्राकर, श्रीमती भूमिका रामलाल सिन्हा, एम.एल. मंडावी, खुबचंद वर्मा,रिंकू चन्द्राकर एवं ग्राम पंचायत बाघामुंडा के सरपंच एडिशन ठाकुर सहित अनेक जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।

इसके अलावा श्रीमती मानबाई मंगलू ठाकुर, श्रीमती गौरी मुकेश ठाकुर, छत्तर सिंह सोरी, गौतम नेताम,नाथुराम महानंद, श्रीमती निशा सागर चन्द्राकर, श्रीमती शांति माझी, श्री माधो माझी एवं श्रीमती रामबाई ठाकुर सहित क्षेत्र के अनेक सामाजिक एवं जनप्रतिनिधि समारोह में शामिल हुए।

बुढ़ादेव के सानिध्य में गूंजा एकता का संदेश!

बुढ़ादेव मंदिर प्रांगण में आयोजित इस भेंट-मिलन समारोह में राजगोंड समाज की पारंपरिक मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई दी। समाजजनों ने एक-दूसरे को नावाखाई जोहार की शुभकामनाएं दीं और सामाजिक एकता एवं भाईचारे को मजबूत करने का संदेश दिया।

समारोह में वक्ताओं ने समाज की गौरवशाली परंपराओं को केवल वर्तमान पीढ़ी तक सीमित रखने के बजाय आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। बदलते समय में शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और संगठन को समाज की मजबूती का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।

शिक्षा के सितारों का हुआ सम्मान!

समारोह का सबसे आकर्षक और प्रेरणादायी पहलू समाज के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का सम्मान रहा। कक्षा 10वीं एवं 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ नवोदय, एकलव्य एवं प्रयास जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में चयनित विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

सम्मान प्राप्त करते हुए विद्यार्थियों के चेहरों पर उत्साह साफ दिखाई दिया। समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जिसके जरिए नई पीढ़ी अपने भविष्य के साथ-साथ समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। विद्यार्थियों को निरंतर मेहनत करने, लक्ष्य निर्धारित करने और समाज एवं क्षेत्र का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया गया।

महिला शक्ति की भी रही महत्वपूर्ण भागीदारी!

समारोह में राजगोंड समाज के महिला प्रकोष्ठ की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को और व्यापक स्वरूप प्रदान किया।महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष श्रीमती दशोदा बाई सोरी, सचिव श्रीमती किरन नेताम एवं उपाध्यक्ष श्रीमती टंकेश्वरी मरकाम सहित बड़ी संख्या में महिला सदस्य उपस्थित रहीं।

महिलाओं की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि सामाजिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण में महिलाओं की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। पारंपरिक मूल्यों को परिवार और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महिलाओं के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।

सामाजिक पदाधिकारियों और वरिष्ठजनों की मौजूदगी!

समारोह में समाज प्रमुख सचिव रामचरन मरकाम, सहसचिव केवल नेताम,विद्याधर सोरी, माधव मांझी, संतराम नेताम, किशोर नेटी, हिराधर मरई, प्रेमलाल नेताम, मयाराम मरई, केवल पोर्टी, खेमलाल नेटी, फग्गु नेताम, सोनू नेताम, सोनसाय नेताम, त्रिपत जगत, मधु मरकाम एवं ललत नेटी सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

वहीं बुढ़ादेव मंदिर से जुड़े पुजारी रामसाय ओटी, भोजराम जगत, ब्रह्मदेव मांझी, रुद्रे नेताम एवं जीवन मांझी सहित मंदिर के प्रमुखजनों की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।

सातों सर्कल की मौजूदगी बनी आयोजन की पहचान!

सातों सर्कल के राजगोंड समाज परिवारों की भारी भागीदारी ने हाथीबाहरा के इस आयोजन को व्यापक सामाजिक स्वरूप प्रदान किया। अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंचे समाजजनों ने एक-दूसरे से मुलाकात की और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने का अवसर प्राप्त किया।

नावाखाई जोहार भेंट-मिलन समारोह केवल शुभकामनाओं के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत, शिक्षा और नई पीढ़ी के भविष्य को लेकर समाज की सामूहिक सोच को भी सामने रखा।

आयोजक आदिवासी राजगोंड समाज सुवरमाल राज, हाथीबाहरा, जिला महासमुंद की ओर से समारोह में पहुंचे सभी अतिथियों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारी-कर्मचारियों, समाज प्रमुखों, महिला पदाधिकारियों, विद्यार्थियों, वरिष्ठजनों और समस्त समाज परिवारों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

हाथीबाहरा में आयोजित यह भव्य समारोह राजगोंड समाज की सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक चेतना का ऐसा मंच बनकर सामने आया, जहां **परंपरा के साथ शिक्षा, संस्कृति के साथ संगठन और अतीत की विरासत के साथ भविष्य की उम्मीद** एक ही मंच पर दिखाई दी। बुढ़ादेव मंदिर प्रांगण में उमड़ी भीड़ ने पूरे क्षेत्र में सामाजिक भाईचारे और एकता का संदेश दिया।

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