August 15, 2026 9:36 pm

अन्नदाता की खुशहाली से लिखी जाएगी विकसित छत्तीसगढ़ की कहानी! विष्णुदेव साय

“अन्नदाता की खुशहाली से लिखी जाएगी विकसित छत्तीसगढ़ की कहानी!”
हरेली पर मुख्यमंत्री साय का बड़ा संदेश—किसान प्रदेश की प्रगति की धुरी, खेती को लाभकारी बनाने सरकार का फोकस!

रायपुर। छत्तीसगढ़ की माटी, खेत-खलिहान और किसानों की उम्मीदों से जुड़े लोकपर्व हरेली के अवसर पर राजधानी नवा रायपुर में परंपरा, आस्था और विकास का अनोखा संगम देखने को मिला। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के नवीन शासकीय आवास में आयोजित गृह प्रवेश एवं हरेली उत्सव कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने जहां राजस्व मंत्री और उनके परिजनों को नए आवास में गृह प्रवेश की शुभकामनाएं दीं, वहीं प्रदेश के किसानों को केंद्र में रखते हुए सरकार की प्राथमिकताओं का भी उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “किसानों की समृद्धि से ही छत्तीसगढ़ समृद्ध होगा।” उनके इस संदेश ने हरेली के पारंपरिक उत्सव को किसान कल्याण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए एक व्यापक तस्वीर सामने रखी। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सहित अनेक मंत्री, विधायक, जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

हरेली के पावन पर्व पर गृह प्रवेश, आस्था और परंपरा का संगम

हरेली छत्तीसगढ़ का पहला लोकपर्व माना जाता है। खेतों में हरियाली, अच्छी बारिश और बेहतर फसल की उम्मीद के बीच मनाए जाने वाले इस पर्व पर किसान कृषि औजारों तथा गौवंश की पूजा करते हैं। प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए किसान अच्छी वर्षा, भरपूर पैदावार और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

इसी पावन अवसर पर राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा के नवीन शासकीय आवास में गृह प्रवेश कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री साय ने मंत्री टंकराम वर्मा एवं उनके परिजनों को नवीन आवास में प्रवेश के लिए बधाई दी और उनके सुखी, समृद्ध तथा मंगलमय जीवन की कामना की। उन्होंने प्रदेशवासियों को भी हरेली तिहार की शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेली जैसे शुभ अवसर पर गृह प्रवेश कार्यक्रम का आयोजन इस पर्व की खुशियों को और बढ़ाता है। यह पर्व केवल उत्सव नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति, प्रकृति और ग्रामीण जीवन के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है।

“किसान मजबूत तो गांव मजबूत, गांव मजबूत तो छत्तीसगढ़ मजबूत”

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने किसान को प्रदेश की प्रगति की धुरी बताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन की मजबूत नींव खेती-किसानी पर टिकी हुई है। ऐसे में किसानों की आर्थिक मजबूती को प्रदेश के विकास से अलग करके नहीं देखा जा सकता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, खेती को लाभकारी बनाने और कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं का विस्तार करने के लिए निरंतर काम कर रही है। किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिले, यह सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने प्रदेश में किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिली है।

बारिश के भरोसे से आगे—सिंचाई विस्तार पर सरकार का जोर

छत्तीसगढ़ की खेती लंबे समय से मानसून पर निर्भर रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक कृषि क्षेत्र को सुनिश्चित सिंचाई की सुविधा मिले, ताकि किसानों की वर्षा पर निर्भरता कम हो और वे बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें।

मुख्यमंत्री के संदेश में यह संकेत भी साफ दिखाई दिया कि सरकार खेती को केवल परंपरागत गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि किसान परिवार की आय बढ़ाने वाले व्यापक आर्थिक क्षेत्र के रूप में देख रही है।

उन्होंने कहा कि किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, कृषि यंत्रीकरण, सिंचाई सुविधाओं और कृषि से जुड़ी अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को इन गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

“अन्नदाता के हित में नीतियों का केंद्र”

मुख्यमंत्री सायं ने कहा कि किसान आर्थिक रूप से मजबूत होगा तो गांव मजबूत होगा और गांव मजबूत होंगे तो विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की गति और तेज होगी। सरकार की नीतियों के केंद्र में अन्नदाता का हित है और खेती-किसानी को अधिक समृद्ध एवं लाभकारी बनाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है।

हरेली के मंच से मुख्यमंत्री का यह संदेश ऐसे समय में आया, जब खेतों में हरियाली और अच्छी फसल की उम्मीद किसानों के चेहरों पर दिखाई दे रही है। ऐसे में कृषि क्षेत्र को मजबूत करने, सिंचाई का विस्तार करने और किसानों की आय बढ़ाने की बात ने समारोह को केवल धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं रहने दिया।

डॉ. रमन सिंह बोले—हरेली से शुरू होता है पर्वों का सिलसिला

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी प्रदेशवासियों को हरेली तिहार की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और कृषि परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है। इसी पर्व के साथ प्रदेश में तीज-त्योहारों के उल्लास का सिलसिला शुरू होता है।

डॉ. सिंह ने कहा कि इस वर्ष अच्छी बारिश से किसानों में उत्साह है और बेहतर फसल की उम्मीद जगी है। उन्होंने कामना की कि प्रदेश के खेत-खलिहान अच्छी फसल से लहलहाएं, किसानों के घरों में खुशहाली आए और छत्तीसगढ़ निरंतर प्रगति करे। उन्होंने राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा एवं उनके परिवार को गृह प्रवेश की बधाई भी दी।

राम भजन ने बांधा समां, समारोह हुआ भक्तिमय

हरेली और गृह प्रवेश के इस आयोजन में उस समय वातावरण और भी भक्तिमय हो गया, जब राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने राम भजन की प्रस्तुति दी। भजन की प्रस्तुति ने समारोह में मौजूद अतिथियों और नागरिकों को भाव-विभोर कर दिया। कृषि संस्कृति, गृह प्रवेश, लोकपर्व और भक्ति—इन सभी रंगों ने कार्यक्रम को खास बना दिया।

कार्यक्रम में महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल रमेश बैस, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव, उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक मोतीलाल साहू एवं श्री इंद्रकुमार साहू, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष  गौरीशंकर अग्रवाल, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा के परिजन उपस्थित रहे।

हरेली का संदेश—खेत हरे हों, किसान खुशहाल हों

नवा रायपुर में आयोजित यह समारोह एक ओर जहां गृह प्रवेश और हरेली की खुशियों का गवाह बना, वहीं मुख्यमंत्री  साय ने किसान कल्याण को प्रदेश की समृद्धि से जोड़ते हुए सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा।

हरेली की हरियाली के बीच मुख्यमंत्री का संदेश साफ था—छत्तीसगढ़ की असली समृद्धि खेतों की हरियाली और किसानों की खुशहाली से होकर गुजरती है। अब देखने वाली बात यह होगी कि किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई का विस्तार करने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के संकल्प का असर आने वाले समय में प्रदेश के खेत-खलिहानों तक किस रूप में पहुंचता है।

क्योंकि छत्तीसगढ़ की पहचान सिर्फ उसकी हरियाली नहीं, बल्कि उस हरियाली को अपने पसीने से सींचने वाला किसान भी है—और जब अन्नदाता मुस्कुराएगा, तभी प्रदेश की विकास यात्रा को वास्तविक अर्थों में नई ताकत मिलेगी।

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