September 25, 2026 3:42 pm

महासमुंद पुलिस का बड़ा ऑपरेशन:नोटों का पहाड़, मजदूरों की फाइलें और तस्करी का कथित साम्राज्य!

महासमुंद पुलिस का बड़ा ऑपरेशन:नोटों का पहाड़, मजदूरों की फाइलें और तस्करी का कथित साम्राज्य!
महासमुंद पुलिस का बड़ा ऑपरेशन—10 ठिकानों पर एक साथ छापा, ₹1.48 करोड़ से ज्यादा नकद बरामद; पांच गिरफ्तार, हजारों मजदूरों के रिकॉर्ड ने खोले नेटवर्क के राज!

महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में पुलिस ने मानव तस्करी और कथित बंधुआ मजदूरी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस की कार्रवाई में एक साथ 10 ठिकानों पर दबिश देकर 1 करोड़ 48 लाख 54 हजार 750 रुपये नगद बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही मजदूरों के पलायन से जुड़े रजिस्टर, डायरियां, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मॉर्गेज संबंधी दस्तावेज और नोट गिनने की मशीन सहित बड़ी संख्या में दस्तावेज एवं इलेक्ट्रॉनिक सामग्री जब्त की गई है।

पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क केवल महासमुंद तक सीमित नहीं था, बल्कि छत्तीसगढ़ के साथ पड़ोसी ओडिशा तथा अन्य राज्यों तक इसके तार जुड़े होने की आशंका है। कार्रवाई के बाद अब पुलिस की जांच का दायरा और बढ़ गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं, कितने मजदूरों को दूसरे राज्यों में भेजा गया और इस पूरे कथित कारोबार में धन का लेन-देन किस स्तर तक हुआ।

नाबालिग के मामले से खुलने लगा कथित नेटवर्क का राज!

पुलिस के मुताबिक, मामले की शुरुआत एक नाबालिग से जुड़े प्रकरण की जांच से हुई। 21 सितंबर को अस्पताल से प्राप्त मेमो के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान नाबालिग के शारीरिक शोषण और गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। इसी जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस को कथित मानव तस्करी, बाल शोषण और बंधुआ मजदूरी से जुड़े नेटवर्क के सुराग मिलने का दावा किया गया।

प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने कथित नेटवर्क से जुड़े अलग-अलग ठिकानों की जानकारी जुटाई। इसके बाद पुलिस टीमों ने एक साथ कई स्थानों पर दबिश दी। एक साथ की गई इस कार्रवाई से कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया।

एडवांस रकम का लालच, फिर दूसरे राज्यों में भेजने का आरोप!

पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और मजदूरों को एडवांस रकम देने का लालच देकर अपने संपर्क में लाते थे। इसके बाद उन्हें छत्तीसगढ़ से बाहर अन्य राज्यों में ईंट भट्ठों और दूसरे श्रमस्थलों पर काम के लिए भेजे जाने का आरोप है।

पुलिस का दावा है कि कुछ मामलों में मजदूरों से कठिन परिस्थितियों में काम कराया गया तथा उनकी आवाजाही पर नियंत्रण रखने के लिए डर, दबाव और कथित धमकी का इस्तेमाल किया गया। हालांकि इन आरोपों की विस्तृत पुष्टि जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

रजिस्टरों में दर्ज हजारों मजदूरों का दावा!

छापेमारी के दौरान मिले रजिस्टर और डायरियां पुलिस जांच में महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही हैं। पुलिस के मुताबिक, इन दस्तावेजों में मजदूरों के पलायन तथा दूसरे राज्यों में भेजे जाने से संबंधित जानकारी दर्ज है।

जांच एजेंसियां अब इन रिकॉर्ड को खंगाल रही हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के कथित नेटवर्क से हजारों मजदूरों से संबंधित रिकॉर्ड मिले हैं। इनमें बंधुआ मजदूरी से संबंधित दस्तावेजी साक्ष्य होने का भी दावा किया गया है।

यदि जांच में इन दस्तावेजों की पुष्टि होती है तो मामला केवल अवैध मजदूर पलायन तक सीमित न रहकर कथित संगठित मानव तस्करी के बड़े नेटवर्क तक पहुंच सकता है।

बैंक खाते और मोबाइल खोलेंगे पैसों के खेल का राज?

पुलिस ने छापेमारी में मोबाइल फोन के अलावा बैंक पासबुक, चेकबुक और एटीएम कार्ड भी जब्त किए हैं। इसके अलावा मॉर्गेज से संबंधित दस्तावेज तथा नोट गिनने की मशीन मिलने की जानकारी भी सामने आई है।

अब पुलिस की जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कथित आर्थिक लेन-देन पर केंद्रित है। बैंक खातों, मोबाइल फोन और दस्तावेजों की जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित नेटवर्क में रकम किस प्रकार पहुंचती थी और किन-किन लोगों के बीच उसका लेन-देन होता था।

पांच आरोपी गिरफ्तार, मुख्य आरोपी के रूप में मुकेश चंद्राकर का नाम!

पुलिस ने मामले में मुकेश चंद्राकर, लता सवर, नंदू मोहंती, पीयूष अग्रवाल और मनीष गुप्ता को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, मुकेश चंद्राकर को इस कथित नेटवर्क का मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ तथा जब्त दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आ सकती है। इसके आधार पर आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना भी पुलिस ने जताई है।

महिलाओं और नाबालिग बालिकाओं की तस्करी की भी जांच!

मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि पुलिस अब केवल मजदूरों के कथित शोषण तक जांच सीमित नहीं रख रही है। पुलिस का कहना है कि मानव तस्करी, नाबालिगों की तस्करी, बाल मजदूरी तथा महिलाओं एवं नाबालिग बालिकाओं के कथित शोषण से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

मोबाइल फोन और बैंक खातों से प्राप्त जानकारी के आधार पर पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित नेटवर्क का संचालन किस स्तर तक था और इसमें स्थानीय स्तर से लेकर दूसरे राज्यों तक कौन-कौन लोग संपर्क में थे।

BNS की गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज!

पुलिस के अनुसार, इस मामले में थाना खल्लारी में अपराध क्रमांक 104/2026 दर्ज किया गया है। प्रकरण में BNS की धारा 143(2), 143(3), 143(4), 3(5) तथा संगठित अपराध से संबंधित धारा 111 के तहत कार्रवाई की गई है।

पुलिस की कार्रवाई में बरामद सामग्री अब जांच का महत्वपूर्ण आधार बन गई है। बरामद नकदी, मजदूरों से संबंधित रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेज और मोबाइल फोन की जांच से कथित नेटवर्क की वास्तविक पहुंच और गतिविधियों के बारे में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

अब असली सवाल—कितने मजदूर, कितने राज्य और कितने चेहरे?

महासमुंद पुलिस की इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि कथित नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं। कितने मजदूरों को दूसरे राज्यों में भेजा गया? कितने परिवार इस कथित जाल में फंसे? क्या इसके पीछे केवल स्थानीय स्तर के लोग हैं या अंतरराज्यीय स्तर पर भी कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है? बरामद 1 करोड़ 48 लाख 54 हजार 750 रुपये की नकदी का स्रोत क्या है और इसका कथित नेटवर्क से क्या संबंध है?

इन सभी सवालों के जवाब अब पुलिस की विस्तृत जांच, दस्तावेजों के परीक्षण और न्यायिक प्रक्रिया से सामने आएंगे। फिलहाल महासमुंद पुलिस की इस कार्रवाई ने मानव तस्करी और मजदूरों के कथित शोषण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का दावा पेश किया है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस कथित नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना बनी हुई है।पुलिस के मुताबिक मामले और भी गिरफ्तारियां हो सकती है।

Leave a Comment

और पढ़ें

Cricket Live Score

Corona Virus

Rashifal

और पढ़ें

error: Content is protected !!