April 19, 2026 10:08 pm

CG”नारी शक्ति की मिसाल: अहिल्याबाई होलकर की विरासत और छत्तीसगढ़ सरकार का संकल्प”

CGनारी शक्ति की मिसाल: अहिल्याबाई होलकर की विरासत और छत्तीसगढ़ सरकार का संकल्प”

नारी शक्ति की प्रतीक : रानी अहिल्याबाई होलकर और छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिबद्धता
✍️ लक्ष्मी राजवाड़े — महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री,,,,,,

रायपुर /”जहाँ नारी पूज्यते, तत्र रमंते देवता” — इस वैदिक वाक्य को अपने जीवन से चरितार्थ करने वाली विरली नारियों में रानी अहिल्याबाई होलकर का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है। जब भारत के इतिहास में नारी को सीमित भूमिकाओं में बांध दिया गया था, तब अहिल्याबाई ने शासन, न्याय, धर्म और समाज सेवा के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ी।

आज जब हम उनकी 300वीं जयंती मना रहे हैं, यह केवल एक ऐतिहासिक क्षण नहीं, बल्कि उनके विचारों और सिद्धांतों को वर्तमान संदर्भ में पुनर्स्थापित करने का अवसर है। यह अवसर है, यह स्मरण है और साथ ही यह संकल्प भी है — एक ऐसी नारी शक्ति की स्थापना का, जो रानी अहिल्याबाई के आदर्शों पर चलकर आधुनिक भारत की नींव को और मजबूत करे।

संघर्ष से सत्ता तक — अहिल्याबाई का प्रेरणादायक जीवन:- 
महज आठ वर्ष की आयु में विवाह और युवा अवस्था में ही विधवा का चोला पहनना — रानी अहिल्याबाई का जीवन साधारण नहीं था। जीवन ने उन्हें हर मोड़ पर परखा, लेकिन हर बार उन्होंने धैर्य, साहस और सेवा के मार्ग को चुना। अपने पुत्र और पति के निधन के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी, बल्कि मालवा की गद्दी संभाली और उसे एक समृद्ध राज्य में बदल दिया।

उनके प्रशासन में न्याय की गूंज दूर-दूर तक सुनाई देती थी। उन्होंने ना सिर्फ कुशल शासन किया, बल्कि समाज के हर वर्ग की सेवा की। काशी विश्वनाथ, सोमनाथ, अयोध्या, बद्रीनाथ जैसे धार्मिक स्थलों का पुनर्निर्माण करवाकर उन्होंने भारतीय संस्कृति और आस्था की पुनर्प्रतिष्ठा की।

छत्तीसगढ़ में अहिल्याबाई के पदचिन्हों पर सरकार
आज जब छत्तीसगढ़ सरकार नारी सशक्तिकरण की बात करती है, तो यह केवल नीतियों का प्रदर्शन नहीं बल्कि एक गहरी प्रेरणा से उपजा संकल्प है — वह प्रेरणा जो अहिल्याबाई होलकर के जीवन से मिलती है।

छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है — हर नारी को सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता प्रदान करना।

महतारी वंदन योजना : आर्थिक शक्ति का संबल
इस योजना के अंतर्गत पात्र विवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को प्रतिमाह ₹1,000 की राशि दी जा रही है। यह केवल एक आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि महिला को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब तक 15 किश्तों के माध्यम से करीब 70 लाख महिलाओं को ₹9788.78 करोड़ की राशि दी जा चुकी है।

स्वावलंबन की राह : कौशल और स्वरोजगार
छत्तीसगढ़ सरकार महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए प्रशिक्षण, ऋण और विपणन सुविधा प्रदान कर रही है। कपड़ा उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और स्थानीय संसाधनों पर आधारित अनेक योजनाओं के माध्यम से लाखों महिलाएं आज स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

सुरक्षा और न्याय : भयमुक्त नारी जीवन:- 
छत्तीसगढ़ में महिलाओं की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में है। महिला हेल्पलाइन 181, वन स्टॉप सेंटर, फास्ट ट्रैक कोर्ट, निशुल्क विधिक सहायता जैसी सेवाएं महिलाओं को सशक्त और सुरक्षित बना रही हैं। इन उपायों का उद्देश्य केवल सुरक्षा देना नहीं, बल्कि महिलाओं में यह विश्वास जगाना है कि वे अकेली नहीं हैं।

शिक्षा, स्वास्थ्य, सम्मान : सशक्त नारी का मूलमंत्र
छत्तीसगढ़ सरकार यह मानती है कि नारी सशक्तिकरण केवल आर्थिक प्रोत्साहन से नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान जैसे चार स्तंभों पर आधारित होना चाहिए।

•बालिकाओं की शिक्षा के लिए विशेष छात्रवृत्ति योजनाएं

•किशोरी स्वास्थ्य एवं पोषण अभियान

•मातृत्व एवं नवजात देखभाल योजनाएं

•पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा

इन सभी प्रयासों का समवेत उद्देश्य है — एक ऐसा समाज बनाना जहाँ नारी केवल भूमिका नहीं निभाए, बल्कि नेतृत्व करे।

अहिल्याबाई की जयंती : स्मरण नहीं, संकल्प का दिन  केवल एक रानी अहिल्याबाई होलकर व्यक्तित्व नहीं हैं, वे एक जीवंत विचारधारा हैं — सेवा, त्याग और न्याय की। उनकी जयंती पर उन्हें याद करना केवल श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि उनके सपनों को साकार करने का संकल्प लेना है।

मैं समस्त प्रदेशवासियों से अपील करती हूं कि वे इस प्रयास में भागीदार बनें। जब हर घर में बेटी को शिक्षा, सुरक्षा और समान अवसर मिलेगा; जब हर महिला को आत्मनिर्भरता का अधिकार मिलेगा — तभी रानी अहिल्याबाई होलकर के आदर्शों को सच्ची श्रद्धांजलि मिलेगी।

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छत्तीसगढ़ सरकार इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही है — ताकि नारी शक्ति को राष्ट्र शक्ति में बदला जा सके। और यह तब ही संभव है जब हम सब मिलकर इस यज्ञ में आहुति दें।

आइए, रानी अहिल्याबाई की जयंती को प्रेरणा बनाएं और एक समरस, सशक्त और सुरक्षित समाज की नींव रखें — यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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