March 2, 2026 1:42 am

“5 हजार कर्मचारियों की ‘क्लॉक-आउट’ क्रांति: फेस आईडी ने मचाया हड़कंप, नगर निगमों में हड़कंप और सड़कों पर कचरे का साम्राज्य!”

“5 हजार कर्मचारियों की ‘क्लॉक-आउट’ क्रांति: फेस आईडी ने मचाया हड़कंप, नगर निगमों में हड़कंप और सड़कों पर कचरे का साम्राज्य!”

Bhopal/मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन विभाग में शनिवार दोपहर ऐसा भूचाल आया जिसने नगर निगमों की वर्षों पुरानी व्यवस्था को हिला कर रख दिया। सरकार ने नगर निगमों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए जो “बड़ा कदम” उठाया, उसने राज्यभर में हलचल पैदा कर दी। अत्याधुनिक एआई-एमएल आधारित फेस आईडी सिस्टम लागू करने की तैयारी ने पहले से डगमगाई अनुशासन प्रणाली में एक तरह की डिजिटल क्रांति छेड़ दी। इस नए फैसले का असर इतना व्यापक और तात्कालिक था कि सरकार की स्क्रीन पर सिर्फ कुछ घंटों में हजारों नाम ‘रेड लाइट’ में बदलते दिखाई देने लगे।

सबसे ज्यादा हड़कंप तब मचा जब भोपाल में शनिवार दोपहर 12 बजे तक 5 हजार से अधिक कर्मचारियों को सीधे ड्यूटी से हटा दिया गया। विभाग का दावा है कि यह वे लोग थे जो लंबे समय से ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हो रहे थे, फिर भी वेतन ले रहे थे या फिर फर्जी उपस्थिति दर्ज करा कर सिस्टम को चकमा दे रहे थे। वर्षों से चली आ रही यह ‘पुरानी व्यवस्था’ जैसे ही नई तकनीक की नजरों में आई, वैसे ही उसका नकाब उतर गया।

नए सिस्टम का नाम है ई-एचएएमएस, यानी इलेक्ट्रॉनिक ह्यूमन रिसोर्स एंड अटेंडेंस मैनेजमेंट सिस्टम। इस तकनीक का दावा है कि अब किसी भी कर्मचारी की उपस्थिति, उनकी वास्तविक लोकेशन और कार्य के घंटे पूरी तरह डिजिटल होंगे। चेहरे की पहचान से लेकर मोबाइल-आधारित उपस्थिति तक, सबकुछ एआई के अधीन चलेगा। विभाग की उम्मीद है कि इससे फर्जी वेतन भुगतान और अनुपस्थित कर्मचारियों का खेल खत्म होगा। लेकिन दूसरी तरफ कर्मचारियों का कहना है कि यह अचानक लागू किया गया फैसला कर्मचारी हितों को नजरअंदाज करता है और बिना उचित नोटिस के कार्रवाई करना अनुचित है।

उधर भोपाल के नगर निगम में शनिवार को दृश्य बिल्कुल अलग था। शहर में कचरा वाहन नहीं पहुंचे तो कई इलाकों में लोगों को खुद ही कचरा अपने घरों में रोकना पड़ा। चालक वर्ग ने शुक्रवार से ही काम बंद रखा था। उनका आरोप है कि नया सिस्टम बिना चर्चा के थोपा जा रहा है। इस वर्ग के कर्मचारियों में नाराजगी उस समय चरम पर पहुंच गई जब शनिवार सुबह तक 5 हजार से अधिक कर्मचारियों को हटाने की खबर फैलती चली गई।

गेंहूखेड़ा स्थित नगर निगम कार्यालय के बाहर सफाईकर्मियों की भीड़ अचानक बढ़ने लगी। नाराज कर्मचारियों ने बैनर और पोस्टर हाथ में लेकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। नाराज सफाईकर्मियों का आरोप है कि उन्हें आधी सैलरी दी गई है, जबकि उनका काम पूरे महीने का रहा है। भारतीय सफाई मजदूर संघ के अध्यक्ष सोनू डागर ने आरोप लगाते हुए कहा कि “नगर निगम को या तो पूरा महीना पुराने सिस्टम के अनुसार सैलरी देनी थी या फिर नया सिस्टम 1 नवंबर से शुरू करना था। अब बीच महीने नियम बदलकर कर्मचारियों के पेट पर लात मारी जा रही है।”

स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि दोपहर तक पुलिस बल भी तैनात करना पड़ा ताकि कोई अप्रिय स्थिति न बने। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल इस नए सिस्टम पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। उनका कहना है कि तकनीक लागू करने से पहले कर्मचारियों से बात करना और उनकी चिंताओं को सुनना जरूरी था, लेकिन नगर निगम प्रशासन ने एकतरफा फैसला लिया है।

इधर विभागीय अधिकारी अपनी स्थिति साफ करते हुए कहते हैं कि यह कदम राज्य में पारदर्शिता और अनुशासन बढ़ाने के लिए आवश्यक था। उनका तर्क है कि कई नगर निगम वर्षों से फर्जी उपस्थिति, ठेकेदारों के जरिए गलत वेतन भुगतान और अनियमित कार्यप्रणाली से जूझ रहे थे। सरकार चाहती है कि नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिलें और कर्मचारियों की उपस्थिति वास्तविक समय में रिकॉर्ड हो। बिना तकनीक के यह संभव नहीं था।

हालांकि इस बीच आम जनता सबसे ज्यादा परेशान है। कचरा वाहनों के नहीं पहुंचने से शहर के कई इलाकों में दुर्गंध फैल गई है। लोग सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर प्रशासन की आलोचना कर रहे हैं। कुछ लोगों ने यह भी तंज कसा कि “टेक्नोलॉजी तो ठीक है, पर कचरा कौन उठाएगा?” वहीं कुछ लोग इसे सफाई अभियान का ‘डिजिटल मोड़’ बता रहे हैं।

स्थिति का अगला अध्याय काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है। तकनीक लागू करना विकास की दिशा है, लेकिन अचानक लागू किए गए फैसले ने राज्य की नगर निगम व्यवस्था में तूफान खड़ा कर दिया है। शहरों की साफ-सफाई रुकी है, कर्मचारी नाराज हैं और प्रशासन दबाव में है।

फिलहाल इतना तय है कि मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन विभाग में यह डिजिटल बदलाव सिर्फ तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि एक बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल का केंद्र बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखने वाली बात होगी कि यह फेस आईडी आधारित ‘क्रांति’ सिस्टम को मजबूत करेगी या विरोध की आग में और भड़केगी।

Leave a Comment

और पढ़ें

Cricket Live Score

Corona Virus

Rashifal

और पढ़ें

error: Content is protected !!