“15 हजार की रिश्वत लेते पकड़ा गया ‘करोड़पति SDO’: सरगुजा के सूरजपुर प्रेमनगर में एसीबी का बड़ा धमाका!
घर से निकले नोटों के बंडल, 52 लाख की एफडी, सोना-चांदी और रिश्वत की चमक में डूबा ‘सरकारी बाबू’!”
Ambikapur/सूरजपुर जिला में सरकारी भ्रष्टाचार के दलदल में डूबे एक और अफसर की कहानी ने पूरे सरगुजा संभाग को हिला दिया है। सूरजपुर जिले के प्रेमनगर आरईएस विभाग में पदस्थ एसडीओ ऋषिकांत तिवारी की चमक-दमक भरी ज़िंदगी की परत जब एसीबी (Anti Corruption Bureau) की टीम ने उघाड़ी, तो नोटों के बंडल, सोने-चांदी के गहने और 52 लाख की एफडी के रूप में भ्रष्टाचार की पूरी ‘डिक्शनरी’ उसके घर से निकल आई।
यह वही अफसर है जो सरकारी कार्यालयों में “ईमानदारी का चेहरा” बनकर घूमता था, मगर अंदर से रिश्वत का सौदागर निकला। बुधवार की देर शाम जब वह एक किसान से मात्र 15 हजार रुपए की घूस लेते रंगे हाथों पकड़ा गया, तो जिले भर में सनसनी फैल गई।
रिश्वत का ‘तालाब’ और भ्रष्टाचार की गहराई!
घटना प्रेमनगर ब्लॉक के नवापारा खुर्द गांव की है। गांव के किसान दिगंबर सिंह को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत तालाब निर्माण की मंजूरी जून 2025 में मिली थी। किसान ने अपनी निजी जमीन पर 1 लाख 82 हजार रुपए खर्च कर तालाब बनवाया, मगर काम पूरा होने के बाद जब भुगतान की बारी आई, तो सरकारी एसडीओ ने अपनी “फीस” मांग ली।
एसडीओ ऋषिकांत तिवारी ने तालाब का मूल्यांकन और रिपोर्ट तैयार करने के लिए दिगंबर से 15 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की। सीधा-सादा किसान पहले तो सोच में पड़ गया, लेकिन जब भ्रष्टाचार की रकम मांगना अफसर की “आदत” लगी, तो उसने सीधा एसीबी की टीम से संपर्क किया।
ACB का ऑपरेशन “तालाब ट्रैप”!
शिकायत की जांच के बाद एसीबी डीएसपी प्रमोद कुमार खेस की टीम ने जाल बिछाया। तय प्लान के मुताबिक बुधवार, 12 नवंबर की शाम दिगंबर सिंह ने एसडीओ को अपने घर बुलाया। रिश्वत की रकम में पहले ही स्पेशल केमिकल लगाया जा चुका था।
जैसे ही एसडीओ ने 15 हजार रुपए हाथ में लिए, ठीक उसी पल दरवाजा धड़ाम से खुला — “एसीबी! हाथ ऊपर!” की आवाज गूंजी और एक पल में ईमानदारी का नकाब उतर गया। अधिकारी के चेहरे का रंग उड़ चुका था, नोटों पर केमिकल की चमक ने उसकी बेईमानी की पोल खोल दी थी।
करोड़ों की संपत्ति से दंग रह गई टीम!
रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद टीम ने रातोंरात एसडीओ के सरकारी आवास और निजी घर पर छापा मारा।
नतीजा चौकाने वाला था —
•नकद राशि: 2 लाख 27 हजार रुपए!
• एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट): लगभग 52 लाख रुपए!
• सोने-चांदी के गहने,
• जमीनों के कागजात,
• बैंक खाते और बीमा योजनाओं में निवेश के दस्तावेज मिले।
टीम ने जब बैंक स्टेटमेंट खंगाले, तो यह साफ हुआ कि यह अफसर लंबे समय से “मिट्टी से सोना और रूपये निकलाने की मशीन” बना हुआ था। कई खातों में लाखों के ट्रांजेक्शन, और कई फर्जी नामों से बीमा पॉलिसियां भी खुली हुई थीं।
कबूलनामे ने उड़ा दिए होश!
पूछताछ में ऋषिकांत तिवारी ने आधा सच खुद उगल दिया। उसने माना कि उसके घर से जब्त नकदी का बड़ा हिस्सा उसने हाल के महीनों में पंचायतों और निर्माण कार्यों से “कमीशन” के रूप में इकट्ठा किया था।
उसने बताया कि हर तालाब, सड़क या पुलिया के मूल्यांकन में “प्रति काम फीस” तय थी — छोटे कार्यों में 5 से 15 हजार, बड़े कामों में 30 हजार तक। यानी सरकारी रकम का कुछ प्रतिशत हर काम में उसकी जेब में जाता था।
न्यायालय में पेशी और जेल का रास्ता!
गुरुवार को एसीबी टीम ने आरोपी एसडीओ को सूरजपुर न्यायालय में पेश किया। वहां अभियोजन पक्ष ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक हिरासत की मांग की। अदालत ने उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।साथ ही, एसीबी अब उसके परिवार और रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों की भी जांच में जुट गई है। विभागीय निलंबन की कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
“भ्रष्ट अफसर गया तो बज उठे पटाखे!”
प्रेमनगर क्षेत्र के सरपंचों और पंचायत सचिवों के बीच इस खबर ने त्योहार का माहौल बना दिया।जैसे ही एसीबी की रेड की खबर फैली तुरंत सरपंच और सचिवों में राहत की सांस ली और पटाखों फोड़कर खुशी जाहिर की।
स्थानीय प्रतिनिधियों ने कहा,
“यह वही अफसर है जिसने हर छोटे काम में रिश्वत मांगी। आज न्याय हुआ है, जनता का विश्वास लौटा है।”
ग्राम के एक बुजुर्ग किसान ने भावुक होकर कहा,
“भगवान ने देर की लेकिन अंधेर नहीं की… अब तो तालाब भी बनेगा और हमारा हक भी मिलेगा।”
आरईएस विभाग की छवि पर दाग!
यह मामला केवल एक अफसर की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (RES) विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल है।छोटे किसानों से लेकर पंचायत प्रतिनिधि तक, सभी इसी विभाग के चक्कर लगाते रहे हैं — हर मूल्यांकन, हर बिल, हर रिपोर्ट में “कमीशन संस्कृति” जड़ जमा चुकी है।
अब जब एसीबी की रेड ने इन जड़ों को हिला दिया है, उम्मीद की जा रही है कि विभागीय स्तर पर क्लीन-अप अभियान शुरू होगा।
जांच अभी जारी, खुल सकते हैं और भी राज!
एसीबी डीएसपी प्रमोद खेस ने बताया कि बरामद एफडी, खातों और बीमा दस्तावेजों की वित्तीय जांच जारी है। कई खातों के लिंक तीसरे पक्षों से जुड़े मिले हैं। संभावना है कि और अफसरों या ठेकेदारों के नाम भी सामने आएंगे।
“हमने सिर्फ एक मछली को पकड़ा है, मगर जाल में और भी कई फंसे हैं,” — अधिकारी ने मुस्कराते हुए कहा।
जनता की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई के वीडियो और तस्वीरें वायरल हो गए। लोगों ने लिखा —
•“15 हजार की रिश्वत में फंसा करोड़ों का साम्राज्य — यही है भ्रष्टाचार का सच।”
•“ACB ने एक अफसर नहीं, बल्कि किसानों की उम्मीद को आजाद किया है।”
प्रेमनगर की यह रेड सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता की जीत का प्रतीक बन गई है।15 हजार की रिश्वत के लालच में करोड़ों का साम्राज्य धराशायी हो गया।एक किसान की हिम्मत ने एक पूरी व्यवस्था को आईना दिखा दिया —कभी-कभी सिर्फ एक मुट्ठी ईमानदारी ही सबसे बड़ा विस्फोट साबित होती है।













