Durg /छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में जहाँ एक ओर प्राचार्य, व्याख्याता और प्रधानपाठक स्तर पर बड़े पैमाने पर पदोन्नतियाँ धड़ाधड़ की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर लिपिक वर्ग के कर्मचारियों की पदोन्नति वर्षों से फाइलों में धूल खा रही है। प्रशासनिक गलियारों में घूमता यह मामला अब ऐसा रूप ले चुका है कि लिपिक वर्ग का धैर्य जवाब दे रहा है और संवर्ग में रोष चरम पर पहुँच गया है।
सूत्र बताते हैं कि संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग दुर्ग के दफ्तर में वरिष्ठ लेखा परीक्षक एवं सहायक ग्रेड–1 के पद वर्षों से रिक्त पड़े हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद आज तक किसी प्रकार की पदोन्नति कार्यवाही आगे बढ़ाई ही नहीं गई। जबकि अन्य संवर्गों में बिजली की गति से प्रमोशन दिए गए—पर लिपिक? उन्हें मानो ‘इंतज़ार की सजा’ सुनाकर छोड़ दिया गया है।
“आदेश आया, पर कार्रवाई नहीं!”—फाइलों में अटका न्याय!
सबसे नाटकीय मोड़ तब आया जब संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय, नवा रायपुर द्वारा स्पष्ट और लिखित निर्देश जारी कर दिए गए।
पत्र क्रमांक /स्था–04–ई/विविध/दुर्ग/2024/672 नवा रायपुर, दिनांक 31/12/2024 में साफ कहा गया कि दुर्ग संभाग के रिक्त पदों पर तत्काल पदोन्नति की कार्रवाई की जाए। लेकिन विडंबना देखिए—
आदेश विभाग तक पहुँचा, पर कार्रवाई का पहिया वहीं रुक गया जहाँ वर्षों से जड़ा हुआ था! लिपिक कर्मचारी कहते हैं, “सरकारी आदेश का क्या उपयोग, जब उसे पालन करवाने की इच्छा ही न हो?”
लिपिक वर्ग में ‘अत्यंत रोष’, विभाग पर भेदभाव के आरोप!
इस लापरवाही और ठहराव को लेकर लिपिक संवर्ग में भारी असंतोष फैल चुका है।कर्मचारियों का साफ कहना है कि—
•अन्य संवर्गों में बिना विलंब पदोन्नति हो जाती है, लेकिन लिपिक वर्ग की फाइलें जानबूझकर रोकी जाती हैं।
•यह साफ-साफ भेदभाव का मामला है, जिसने कर्मचारियों के मनोबल पर गहरा असर डाला है।
कार्यालयों में चर्चा है कि यदि पदोन्नति प्रक्रिया समय पर होती, तो कई कर्मचारी अपने लंबे कैरियर संघर्ष का उचित प्रतिफल पा सकते थे। मगर विभाग की चुप्पी ने उन्हें निराशा की कगार पर पहुँचा दिया है।
मामला पहुँचा कलेक्टर के दरबार तक—संघ ने खोला मोर्चा!
लिपिक वर्ग की बढ़ती बेचैनी और नाराज़गी को देखते हुए अब मामला कलेक्टर कार्यालय तक पहुँच चुका है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ, जिला शाखा दुर्ग के अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के मीडिया प्रभारी–दुर्ग, भानुप्रताप यादव ने कलेक्टर दुर्ग को विस्तृत ज्ञापन भेजकर इस ठहराव पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
ज्ञापन में उन्होंने कहा कि—
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रिक्त पदों पर पदोन्नति न होने से लिपिक वर्ग के सैकड़ों कर्मचारियों का भविष्य अटका हुआ है।
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शासन व संचालनालय के निर्देश होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर कार्रवाई रोकना दुर्भाग्यपूर्ण है।
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यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो कर्मचारियों में रोष और तीव्र हो सकता है
न्याय चाहिए विलंब नहीं !
संघ का कहना है कि रिक्त पदों पर समय रहते पदोन्नति दी जाए, ताकि विभाग में कार्य सुचारू रूप से चल सके और वर्षों से प्रतीक्षा में खड़े कर्मचारियों को उनका हक मिल सके।लिपिक कर्मचारी इस पूरे घटनाक्रम को केवल प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि “व्यवस्थित उपेक्षा” बता रहे हैं। उनका कहना है कि जब सरकार की मंशा साफ है, आदेश जारी हो चुके हैं, तो स्थानीय स्तर पर रुकावट क्यों? किसके निर्देश पर? किसके लाभ के लिए?
अब सबकी निगाहें कलेक्टर कार्यालय पर!
ज्ञापन कलेक्टर तक पहुँच चुका है। अब गेंद प्रशासन के पाले में है।लिपिक वर्ग आशान्वित है कि कलेक्टर महोदय त्वरित संज्ञान लेते हुए इस लंबे समय से रुकी प्रक्रिया को गति देंगे।
लिपिकों की पीड़ा, एक पंक्ति में…
“पदोन्नति की रोशनी दिखी तो सही… पर दरवाज़ा खोलने वाला कोई नहीं!”













