March 1, 2026 7:14 pm

“विकास की सड़क पर मौत के गड्ढे! तालाब लूटा, किसान रोया, सरकार मौन -महासमुंद–तुमगांव मार्ग पर भ्रष्टाचार का खतरनाक खेल”

विकास की सड़क पर मौत के गड्ढे! तालाब लूटा, किसान रोया, सरकार मौन -महासमुंद–तुमगांव मार्ग पर भ्रष्टाचार का खतरनाक खेल”

Mahasamund/जिस सड़क से विकास की रफ्तार बढ़नी थी, वही सड़क आज ग्रामीणों, पशुओं और राहगीरों के लिए मौत का न्योता बनती जा रही है। महासमुंद–तुमगांव सड़क चौड़ीकरण कार्य के नाम पर ठेकेदारों द्वारा की जा रही बेलगाम खुदाई, रॉयल्टी चोरी और नियमों की खुली अवहेलना ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश की आग भड़का दी है। ग्राम कौंदकेरा के सार्वजनिक तालाब से मुरुम की अवैध निकासी ने न सिर्फ पर्यावरण और जलस्रोतों को तबाह किया है, बल्कि सड़क किनारे ऐसे गहरे-खतरनाक गड्ढे बना दिए हैं, जो हर पल किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं।

इस पूरे मामले को लेकर किसान कांग्रेस जिलाध्यक्ष मानिक साहू ने कलेक्टर विनय कुमार लंगेह को लिखित शिकायत सौंपते हुए जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस गंभीर मामले में तत्काल संज्ञान नहीं लिया, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।

तालाब बना खदान, पानी बना सवाल!

शिकायत में बताया गया है कि लोक निर्माण विभाग द्वारा महासमुंद–तुमगांव सड़क चौड़ीकरण का ठेका मेसर्स जेडी कंस्ट्रक्शन को दिया गया था। इस प्रोजेक्ट के लिए ग्राम कौंदकेरा के सार्वजनिक तालाब से केवल 10,000 घन मीटर मुरुम निकालने की अनुमति थी। लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि ठेकेदार ने अनुमति से पांच गुना अधिक, यानी 50,000 घन मीटर से ज्यादा मुरुम निकाल लिया।

इस अंधाधुंध खुदाई से तालाब की प्राकृतिक संरचना नष्ट हो गई है। तालाब की गहराई असंतुलित हो चुकी है, तट कमजोर हो गए हैं और जल संग्रहण क्षमता पर सीधा असर पड़ा है। इसका परिणाम यह हुआ कि किसानों की सिंचाई, ग्रामीणों के पेयजल और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था संकट में आ गई है।

सड़क नहीं, आमजन की मौत का जाल!

सबसे भयावह तस्वीर सड़क किनारे दिखाई दे रही है। मुरुम निकालने के बाद खुले छोड़े गए गहरे गड्ढे, न कोई चेतावनी बोर्ड, न बैरिकेडिंग, न सुरक्षा संकेत। रात के अंधेरे में ये गड्ढे जानलेवा जाल बन चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार पशु इनमें गिर चुके हैं और राहगीरों के साथ दुर्घटनाएं होते-होते बची हैं।

स्थानीय लोगों ने बताया कि स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग अब खतरे का रास्ता बन गया है। बावजूद इसके, ठेकेदार और संबंधित विभाग आंख मूंदे बैठे हैं।

राजस्व को लाखों की चपत!

मानिक साहू ने आरोप लगाया कि इस अवैध निकासी से राज्य सरकार को लाखों रुपये की राजस्व हानि हुई है। छत्तीसगढ़ लघु खनिज नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन खनिज विभाग, राजस्व विभाग और लोक निर्माण विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। इससे यह संदेह और गहरा होता है कि कहीं न कहीं विभागीय मिलीभगत से यह पूरा खेल खेला जा रहा है।

भाजपा सरकार पर तीखा हमला,

मानिक साहू ने इस पूरे मामले के लिए सीधे तौर पर भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा,

“भाजपा सरकार के राज में छत्तीसगढ़ के संसाधनों की खुली लूट हो रही है। ठेकेदारों को खुली छूट दी गई है, किसान, ग्रामीण और आम जनता की कोई सुनवाई नहीं है। यह भाजपा की तथाकथित डबल इंजन सरकार का असली चेहरा है—जहां विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का इंजन दौड़ रहा है।”

उन्होंने इसे किसान-विरोधी नीति का परिणाम बताते हुए कहा कि तालाब जैसे सार्वजनिक संसाधनों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन यहां सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।

सड़क की गुणवत्ता पर भी सवाल!

केवल मुरुम घोटाला ही नहीं, सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि निर्माण में निम्न स्तर की सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। सड़क की मोटाई और चौड़ाई निर्धारित मानकों से कम है। काम की रफ्तार बेहद धीमी है और सुरक्षा उपायों की घोर अनदेखी की जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस तरह से काम चल रहा है, उससे यह सड़क ज्यादा दिनों तक टिक पाएगी या नहीं, इस पर भी संदेह है। यानी एक तरफ सार्वजनिक तालाब की बर्बादी, दूसरी तरफ घटिया सड़क निर्माण—दोनों में जनता का पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों में हलचल!

इस मामले ने जिले की राजनीति में भी हलचल मचा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रकरण भाजपा सरकार के कार्यकाल में चल रही निर्माण परियोजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण है। विपक्षी कांग्रेस ने इसे बड़ा मुद्दा बनाते हुए कहा है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय ऐसी अनियमितताओं पर तुरंत कार्रवाई होती थी, लेकिन भाजपा शासन में शिकायतें फाइलों में दबा दी जाती हैं।

जांच और कार्रवाई की मांग!

मानिक साहू ने अपनी शिकायत में मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। लोक निर्माण विभाग, राजस्व विभाग और खनिज विभाग की भूमिका की जांच हो। दोषी ठेकेदार पर भारी जुर्माना, रॉयल्टी चोरी का मामला दर्ज किया जाए और तालाब के पुनरुद्धार के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस पार्टी ग्रामीणों और किसानों के साथ मिलकर आंदोलन करेगी।

अब सवाल प्रशासन से!

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस शिकायत को गंभीरता से लेगा? क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा? महासमुंद–तुमगांव सड़क केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि जनता की उम्मीदों की डोर है। यदि इस पर भ्रष्टाचार और लापरवाही की गाड़ी यूं ही दौड़ती रही, तो विकास की यह सड़क विनाश की राह बन जाएगी।

अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और सरकार जनता के पक्ष में खड़ी होती है या फिर यह “मौत का गड्ढा” और भी गहरा होता चला जाएगा।

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