“यूरिया पर नहीं चलेगी कालाबाजारी की चाल – प्रशासन ने किसानों के हित में उठाया सख्त कदम”!
Mahasamund/जिले में किसानों की धड़कन बने यूरिया को लेकर प्रशासनिक सख्ती का बिगुल बज चुका है। कलेक्टर विनय लंगेह के स्पष्ट निर्देश और उप संचालक कृषि एफ.आर. कश्यप के मार्गदर्शन में एक ऐसी कार्रवाई हुई जिसने कालाबाजारी करने वालों की नींद उड़ा दी है और किसानों को राहत की सांस दी है।
ग्राम लाफिनखुर्द स्थित मेसर्स आर.के. ट्रेडर्स में जिला स्तरीय निरीक्षण दल ने आकस्मिक दबिश दी। अचानक हुई इस छापामार कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी। निरीक्षण के दौरान 72 बोरी यूरिया मौके पर बरामद हुई, जिसे प्रशासन ने तुरंत ही किसानों को शासकीय दर 266 रुपये प्रति बोरी पर वितरित कर दिया।
किसानों के चेहरे पर लौटी मुस्कान!
किसानों की सबसे बड़ी चिंता यही रहती है कि जब उनकी फसलें खाद-पानी की प्यास में तड़पती हैं, तब कालाबाजारी करने वाले जरूरत का फायदा उठाकर ऊँचे दाम वसूलते हैं। लेकिन इस बार प्रशासन की सख्ती ने तस्वीर बदल दी। मौके पर पहुंचे किसान जब 266 रुपये की दर से यूरिया पाकर घर लौटे तो उनके चेहरों पर संतोष और विश्वास की चमक दिखाई दी।
निरीक्षण दल की मौजूदगी!
इस आकस्मिक निरीक्षण और वितरण के दौरान सहायक संचालक कृषि डॉ. परमजीत सिंह, उर्वरक निरीक्षक उमेश चन्द्राकर,ओमप्रकाश चन्द्राकर,भूषण साहू और उषा मरावी स्वयं उपस्थित रहे। यह दृश्य किसानों के लिए विश्वास जगाने वाला था कि प्रशासन अब उनके साथ खड़ा है और हर हाल में उन्हें उनका हक दिलाकर रहेगा।
जिला प्रशासन का कड़ा संदेश!
जिला प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि किसानों के हक पर डाका डालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। जो व्यापारी या विक्रेता कालाबाजारी में शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यही नहीं, लाइसेंस रद्द करने से लेकर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने तक की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
महासमुंद के किसानों हितों की रक्षा!
कलेक्टर विनय लंगेह ने कहा कि किसान इस देश और प्रदेश की रीढ़ हैं। उनकी मेहनत पर ही अन्न पैदा होता है और प्रदेश की अर्थव्यवस्था गति पाती है। ऐसे में किसानों को शासकीय दर पर उर्वरक उपलब्ध कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में कहा –
“किसी भी स्तर पर कालाबाजारी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसान अब ठगे नहीं जाएंगे, प्रशासन उनके साथ है।”
कालाबाजारी करने वालों में हड़कंप!
लाफिनखुर्द की इस कार्रवाई की खबर जैसे ही आसपास के क्षेत्रों में फैली, वैसे ही उन दुकानदारों और दलालों में हड़कंप मच गया जो वर्षों से किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर उर्वरक की कालाबाजारी कर रहे थे। अब उन्हें लगने लगा है कि प्रशासन की पैनी नजर कहीं भी और कभी भी पड़ सकती है।
महासमुंद के किसानों की आवाज़!
स्थानीय किसानों ने प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि यह सही मायनों में किसान हितैषी कदम है।पहले हमें यूरिया लेने के लिए न केवल लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था, बल्कि दलालों की जेब भी भरनी पड़ती थी। आज जिला कलेक्टर ने हमारी मेहनत की रक्षा की है। हम आभारी हैं।”
महासमुंद जिला कलेक्टर ने यह कर दिखाया कि पहले किसानों को यूरिया लेने के लिए न केवल लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था और दलालों की जेब भी भरनी पड़ती थी। आज प्रशासन ने हमारी मेहनत की रक्षा की है। हम आभारी हैं।”यह कार्रवाई न सिर्फ किसानों के लिए राहत भरी खबर है बल्कि यह पूरे प्रदेश के लिए एक संदेश भी है – अब किसानों की जरूरतों से खिलवाड़ नहीं होगा।यूरिया का शासकीय दर पर वितरण यह साबित करता है कि जब प्रशासन दृढ़ संकल्प ले तो कोई भी कालाबाजारी टिक नहीं सकती।
किसान का पसीना अब सही मूल्य पाएगा, और अन्नदाता की मेहनत के बीच कोई भी कालाबाजारी की दीवार नहीं खड़ी हो पाएगी।













