महासमुंद पटवारी संघ में भूचाल: चन्द्रभान साहू बर्खास्त, सर्वसम्मति से रामनारायण चन्द्राकर बने नये कार्यकारी अध्यक्ष!
mahasamund/जिले के पटवारी संघ में उस समय बड़ा नाटकीय मोड़ आ गया जब वर्तमान अध्यक्ष चन्द्रभान साहू को सर्वसम्मति से उनके पद से बर्खास्त कर दिया गया और वरिष्ठ पटवारी रामनारायण चन्द्राकर को सर्वसम्मति से नया कार्यकारी अध्यक्ष चुन लिया गया। यह निर्णय न केवल महासमुंद जिले बल्कि पूरे प्रदेश के राजस्व अमले में चर्चा का विषय बन गया है।
शिकायतों की लहर और अविश्वास का वातावरण!
सूत्रों के अनुसार, चन्द्रभान साहू के खिलाफ लंबे समय से शिकायतों की बाढ़ आ रही थी। आरोप था कि उन्होंने महिला पटवारियों के साथ सोशल मीडिया ग्रुपों में अभद्र एवं अशोभनीय संदेश साझा किए। इस व्यवहार ने न केवल महिला पटवारियों की गरिमा को ठेस पहुँचाई, बल्कि संघ की छवि को भी गहरी क्षति पहुँचाई।
संघ के कई सदस्यों का कहना था कि साहू के रवैये से संगठन का अनुशासन लगातार टूट रहा था। छोटे से छोटे विवाद को भी वह तूल देने लगे थे, जिससे संघ का माहौल तनावपूर्ण हो गया था। कई बैठकों में उनके आचरण को लेकर विरोध दर्ज कराया गया, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
ऐतिहासिक सर्वसम्मति!
आखिरकार महासमुंद तहसील पटवारी संघ की आपात बैठक बुलाई गई। बैठक में सभी सदस्यों ने एक स्वर में चन्द्रभान साहू को अध्यक्ष पद से हटाने का प्रस्ताव रखा। बिना किसी विरोध के, सर्वसम्मति से उनका पद समाप्त कर दिया गया।
इसके बाद वरिष्ठ पटवारी रामनारायण चन्द्राकर का नाम नए कार्यकारी अध्यक्ष के लिए आगे आया। विशेष बात यह रही कि इस निर्णय में किसी भी सदस्य ने विरोध नहीं जताया। पूरे संघ ने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच रामनारायण चन्द्राकर का स्वागत किया और उन्हें बधाई दी।
नए नेतृत्व से उम्मीदें!
रामनारायण चन्द्राकर लंबे समय से पटवारी संघ की गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। उनकी ईमानदार छवि और शांत स्वभाव के कारण उन्हें सभी का विश्वास प्राप्त हुआ। संघ के सदस्यों का मानना है कि उनके नेतृत्व में संगठन को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।
संघ के वरिष्ठ सदस्यों ने कहा कि चन्द्राकर का अनुभव और निष्ठा संगठन को एकजुट रखने में अहम भूमिका निभाएगा। कई महिला पटवारियों ने भी राहत की सांस ली और विश्वास जताया कि अब कार्यस्थल पर उन्हें सम्मान और सुरक्षा की गारंटी मिलेगी।
चन्द्रभान साहू पर गंभीर आरोप!
जहाँ एक ओर संघ नए अध्यक्ष के स्वागत में डूबा है, वहीं दूसरी ओर चन्द्रभान साहू के खिलाफ लगे आरोपों ने उनके राजनीतिक और सामाजिक भविष्य पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
• महिला पटवारियों के साथ अशोभनीय मैसेज करना।
• संघ की बैठकों में अनुशासनहीनता दिखाना।
• संगठन की साख को नुकसान पहुँचाना।
कई सदस्यों ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को संघ का अध्यक्ष बनाए रखना संगठन के लिए आत्मघाती कदम होता।
संगठन में नई ऊर्जा का संचार!
रामनारायण चन्द्राकर ने पदभार संभालते ही कहा कि उनका उद्देश्य संघ के प्रत्येक सदस्य की समस्याओं को प्राथमिकता से हल करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ में अनुशासन और भाईचारे को सर्वोपरि रखा जाएगा।उन्होंने यह भी घोषणा की कि महिला पटवारियों की सुरक्षा और सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उनकी बातों से उपस्थित सदस्यों के चेहरे पर संतोष और गर्व की झलक दिखाई दी।
प्रदेश स्तर पर चर्चा!
महासमुंद तहसील का यह फैसला प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक संदेश है कि संगठन में अनुशासन और गरिमा से कोई समझौता नहीं होगा। कई जिलों के पटवारी संघों ने इस निर्णय का स्वागत किया है और महासमुंद को अनुकरणीय उदाहरण बताया है।महासमुंद तहसील पटवारी संघ का यह ऐतिहासिक फैसला संगठन की गरिमा और एकता को बनाए रखने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। चन्द्रभान साहू की बर्खास्तगी और रामनारायण चन्द्राकर की नियुक्ति ने स्पष्ट कर दिया है कि अब संघ में अनुशासन, पारदर्शिता और सम्मान की संस्कृति को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलेगी।
निश्चित रूप से यह बदलाव महासमुंद ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के राजस्व अमले में नई ऊर्जा और उम्मीद की किरण लेकर आया है।













