March 1, 2026 8:56 pm

महासमुंद धान उपार्जन केंद्र में निलंबन की गूंज:  “बारदाने बिखरे, कैमरे बंद… और अब कार्रवाई की गूंज—बम्हनी के प्रभारी गंगाधर जगत तत्काल निलंबित!”

महासमुंद धान उपार्जन केंद्र में निलंबन की गूंज:  “बारदाने बिखरे, कैमरे बंद… और अब कार्रवाई की गूंज—बम्हनी के प्रभारी गंगाधर जगत तत्काल निलंबित!”

Mahasamund/महासमुंद जिला के धान खरीदी के सीजन में जहां सरकार व्यवस्था दुरुस्त रखने के सख्त निर्देश दे रही है, वहीं बम्हनी उपार्जन केंद्र से ऐसी लापरवाही सामने आई जिसने पूरे क्षेत्र की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए। आरंगी समिति अंतर्गत उपार्जन केंद्र बम्हनी में पदस्थ प्रभारी गंगाधर जगत को कर्तव्यहीनता, अव्यवस्थित कार्य और अनुशासनहीनता के गंभीर आरोपों के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

यह कार्रवाई केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि पूरे जिले को दिया गया एक कड़ा संदेश है कि धान खरीदी में किसी भी प्रकार की ढिलाई बख्शी नहीं जाएगी। किसानों की मेहनत के पसीने पर पानी फेरने वाली अव्यवस्था अब किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं।

निरीक्षण में खुली पोल—अव्यवस्था का अंबार!

28 नवंबर को तहसीलदार और उनकी टीम ने अचानक उपार्जन केंद्र बम्हनी का निरीक्षण किया। उम्मीद थी कि खरीदी की प्रक्रिया सुचारु होगी, किसानों को सुविधा मिल रही होगी… लेकिन जो तस्वीर सामने आई, उसने प्रशासनिक टीम को झकझोर दिया।

निरीक्षण में मिली प्रमुख खामियां:

•खरीदी किए गए बारदानों का स्टैकिंग तक नहीं किया गया था—जैसे धान नहीं, कचरा बिखरा हो!

•सिले बिना बारदानों के ढेर—मानो पूरी प्रक्रिया को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया हो।

•सीसीटीवी कैमरे बंद—जवाबदेही से बचने का खुला संकेत।

•उपार्जन केंद्र में आदर्श धान का नमूना तक उपलब्ध नहीं—किसान कैसे जानें कि धान की गुणवत्ता क्या है?

•गेटपास एप में गलत या बिना फोटो अपलोड—गंभीर तकनीकी लापरवाही, जिससे खरीदी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल।

इन सभी तथ्यों ने साफ कर दिया कि केंद्र प्रभारी गंगाधर जगत ने न केवल अपने कर्तव्य की अनदेखी की, बल्कि सरकारी व्यवस्था का भी खुला उल्लंघन किया।

प्रशासन का कड़ा रुख—तत्काल निलंबन!

तहसीलदार की रिपोर्ट के बाद प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति के प्राधिकृत अधिकारी ने बिना देर किए गंगाधर जगत को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।
निलंबन के आदेश में कहा गया है कि—

“केंद्र प्रभारी का यह कृत्य घोर लापरवाही एवं अनुशासनहीनता है। शासकीय योजनाओं के सुचारु क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न करने वाले ऐसे आचरण को किसी भी स्थिति में सहन नहीं किया जाएगा।”

निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा, परंतु उनका मुख्यालय अब जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित रायपुर शाखा पिरदा निर्धारित किया गया है।अर्थात, उनकी तत्कालिक जिम्मेदारियाँ पूरी तरह से उनसे ले ली गई हैं।

किसानों में चर्चा—“अगर निरीक्षण न होता तो…?”

इस कार्रवाई के बाद स्थानीय किसानों में तेज चर्चा है। किसानों का कहना है—

•अधिकारी मौके पर न पहुंचते तो यह लापरवाही न जाने कब तक चलती रहती।

•बारदानों की सिलाई नहीं, कैमरे बंद… यह साफ बताता है कि खरीदी में कितनी मनमानी हो रही थी।

•कड़ी कार्रवाई जरूरी थी, वरना कोई सुधार नहीं होता।

किसानों का यह भी कहना है कि यदि ऐसे केंद्र समय पर दुरुस्त न किए जाएँ, तो खरीदी में भयंकर गड़बड़ी संभव है—चोरी-छिपे वजन में हेराफेरी, धान की गुणवत्ता विवाद, नकली फोटोज और फर्जी गेटपास जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

जिले में संदेश—“अब गड़बड़ी की कोई जगह नहीं”!

यह निलंबन कदम जिले के अन्य उपार्जन केंद्रों के लिए भी चेतावनी है।
प्रशासन ने साफ संकेत दे दिया है—

कैमरे हमेशा चालू रहें,

•स्टैकिंग, सिलाई, दस्तावेज और फोटो पूरी तरह व्यवस्थित रहें,

•केंद्र प्रभारी अपनी जिम्मेदारी से मुंह न मोड़ें,

•किसानों को एक-एक सुविधा ससम्मान मिले,

धान खरीदी सीजन में छोटी-सी अव्यवस्था भी बड़े विवाद को जन्म दे सकती है, इसलिए प्रशासन शुरू से ही कड़ाई बरतते हुए निरीक्षण अभियान तेज कर चुका है।

निलंबन के बाद बढ़ी हलचल!

गंगाधर जगत के निलंबन के बाद बम्हनी और आरंगी क्षेत्र में हलचल तेज है।कुछ कर्मचारियों का मानना है कि यह कार्रवाई उचित है, क्योंकि लगातार चेतावनियों के बावजूद उपार्जन केंद्र की स्थिति जस की तस बनी रही।वहीं कुछ लोग इसे “बड़ी कार्रवाई की तैयारी” मान रहे हैं—संकेत है कि आने वाले दिनों में अन्य केंद्रों पर भी सख्ती देखने को मिल सकती है।

लापरवाही पर कड़ा प्रहार!

बम्हनी उपार्जन केंद्र की अव्यवस्था केवल एक व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की गंभीर कमजोरी को दर्शाती है।लेकिन गंगाधर जगत का निलंबन इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि प्रशासन अब तनिक भी लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

धान खरीदी की हर बोरियां कीमती है… और किसानों का हर पसीना महत्वपूर्ण।ऐसे में लापरवाह अधिकारियों की भूमिका अब समय रहते सुधारी जाए—वरना उनके खिलाफ कार्रवाई तय है।

यह घटना आने वाले दिनों में कई और उपार्जन केंद्रों के लिए चेतावनी साबित हो सकती है।

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