March 2, 2026 1:42 am

“महानदी का महाप्रतिक्षित चमत्कार: मोहमेला–सिरपुर बैराज पर लगी मुहर, दो राज्यों की वर्षों पुरानी खींचातानी खत्म..

“महानदी का महाप्रतिक्षित चमत्कार: मोहमेला–सिरपुर बैराज पर लगी मुहर, दो राज्यों की वर्षों पुरानी खींचातानी खत्म… 43 किमी दूरी सिमटी, किसानों की उम्‍मीदें खिलीं!”

Mahasamund/महानदी के शांत बहते किनारों पर वर्षों से अटका एक सपना आखिरकार साकार होने की राह पर है। मोहमेला–सिरपुर बैराज परियोजना, जिसे लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच सात वर्षों से रस्साकशी चल रही थी, अब परियोजना मंडल की मुहर के साथ आगे बढ़ चुकी है। इस मुहर ने न केवल दो राज्यों के बीच खिंची तनाव की रेखा को मिटाया है, बल्कि उस उम्मीद को भी जगा दिया है जिसका इंतजार सिरपुर और आसपास के ग्रामीण बरसों से करते आ रहे थे।

साल 2017 में जब ओडिशा सरकार ने ट्रिब्यूनल के आदेश का हवाला देकर इस बैराज पर आपत्ति जताई थी, पूरा मामला ऐसे थम गया था जैसे महानदी की धार पर अचानक किसी ने पत्थर रख दिया हो। फाइलें धूल खाती रहीं, किसान बेचैन होते रहे और परियोजना राजनीति और कागजी दंगल में फंसी रही। अब सूत्रों का दावा है कि दोनों राज्यों के बीच महानदी पर दो-दो परियोजनाओं को लेकर आपसी सहमति बन चुकी है और इनके लिए औपचारिक NOC भी मिल चुकी है। इसी सहमति के सहारे परियोजना मंडल ने मोहमेला–सिरपुर बैराज को अंततः मंजूरी दे दी है।

अब सिर्फ वित्त विभाग की प्रशासकीय स्वीकृति और तकनीकी अनुमति की प्रक्रिया शेष है, जिसके बाद टेंडर जारी किया जाएगा। यानी बैराज निर्माण की नींव डालने के लिए अब घड़ी की सुइयां तेजी से घूमने लगी हैं।

अडानी पावर को मिलेगी जल आपूर्ति, सरकार को होगा बड़ा राजस्व लाभ!

इस परियोजना का एक और बड़ा पहलू है औद्योगिक जल उपयोग। प्रस्ताव के मुताबिक अडानी पावर लिमिटेड, रायपुर को औद्योगिक प्रायोजन के तहत पानी की सप्लाई भी की जाएगी। इसके बदले राज्य सरकार को हर साल लगभग 2700 लाख रुपये का जल कर मिलेगा। यह राशि सिर्फ आय का स्रोत नहीं बल्कि उस क्षेत्र के विकास की रफ्तार को तेज करने वाले ईंधन के समान है।

किसानों के लिए वरदान: 1803 हेक्टेयर में सिंचाई, 12 गांवों को निस्तारी सुविधा!

सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिलेगा। जल संसाधन विभाग का दावा है कि बैराज बनने के बाद करीब 1803 हेक्टेयर भूमि को लिफ्ट इरीगेशन के जरिए सिंचाई सुविधा मिलेगी। 12 गांवों तक पानी पहुंचेगा और जिन खेतों में आज पानी की एक बूंद के लिए तरसना पड़ता है, वहां खरीफ की फसलें अब मजबूती से लहलहा सकेंगी।

निस्तारी की सुविधा भी बेहतर होगी, जिससे पशुपालन और ग्रामीण जीवन में अतिरिक्त मजबूती आएगी। विभाग की मानें तो जलस्तर बढ़ने से भू-जल संवर्धन और पेयजल आपूर्ति में भी बड़ा सुधार होगा। महानदी का यह पानी अब सिर्फ बहेगा नहीं, बल्कि इलाके की जिंदगी भी बदलेगा।

पलारी–सिरपुर सड़क मार्ग में 43 किमी की कमी… सफर भी आसान, कारोबार भी तेज!

इस परियोजना के पूरा होने पर सिर्फ खेतों में ही जीवन नहीं बहेगा, बल्कि सड़कों पर भी रफ्तार लौट आएगी। वर्तमान मार्ग की तुलना में पलारी से सिरपुर की दूरी में लगभग 43 किमी की कमी आएगी। यह सिर्फ एक दूरी नहीं, बल्कि समय, आर्थिक बचत और व्यवसायिक गतिविधियों की नई शुरुआत भी है।

सिरपुर जैसे पर्यटन नगरी के लिए यह दूरी कम होना एक सौगात से कम नहीं। पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही आसपास के क्षेत्रों के छोटे कारोबारियों को भी एक नया बाजार देगी।

सालों का विवाद खत्म, दोनों राज्यों की सहमति से निर्माण का रास्ता खुला!

मोहमेला–सिरपुर बैराज को लेकर ओडिशा सरकार की पूर्व में उठाई गई आपत्तियों के बाद परियोजना जैसे ठहर सी गई थी। दोनों राज्यों के बीच महानदी जल बंटवारे को लेकर खिंचा विवाद पूरे प्रोजेक्ट पर ताला लगाने जैसा था। लेकिन वर्तमान में बनी आपसी सहमति ने इस ताले की चाबी खोज निकाली है।

अब निर्माण पर लगी रोक हट चुकी है और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में परियोजना मंडल द्वारा मंजूरी मिलने के बाद उम्मीद की नई किरण जग चुकी है। छत्तीसगढ़ सरकार पहले ही इस परियोजना की तैयारियां पूरी कर चुकी थी, बस अनुमति पर ही पूरा भविष्य टिका हुआ था।

स्थानीय नेतृत्व की प्रतिक्रिया: सिरपुर उपसरपंच का बयान!

सिरपुर क्षेत्र में इस परियोजना की मंजूरी को लेकर खुशी की लहर दौड़ गई है। सिरपुर के सत्ता पक्ष के उपसरपंच राजेश ठाकुर ने भावुकता से कहा:

“सिरपुर पर्यटन नगरी और आसपास के गांवों के लिए यह फैसला ऐतिहासिक है। जनता इस योजना का वर्षों से इंतजार कर रही थी। हम छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा के आभारी हैं जिनके अथक प्रयासों से इस परियोजना को हरी झंडी मिली। आने वाले वर्षों में यह बैराज यहां के किसानों, व्यापारियों और आम जनता के जीवन वरदान साबित होगी ।”

उनके शब्दों में सिर्फ एक नेता का बयान नहीं बल्कि उस जनता की राहत झलकती है जो कई सालों से इस परियोजना को मंजूरी मिलने का इंतजार कर रही थी।

महानदी के जल में अब विकास की धारा!

मोहमेला–सिरपुर बैराज परियोजना के आगे बढ़ते ही महानदी के जल में अब सिर्फ जीवन ही नहीं, बल्कि विकास की धारा भी बहने को तैयार है। दो राज्यों के बीच वर्षों पुरानी खींचतान खत्म हो चुकी है। किसानों को सिंचाई, उद्योगों को पानी, पर्यटन को रफ्तार और गांवों को सुविधा… यह परियोजना सिर्फ एक निर्माण कार्य नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की तकदीर बदलने का अध्याय बनेगी।

महानदी अब सिर्फ नदी नहीं, बल्कि उम्मीद का नया सेतु बनेगी।

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