भीषण त्रासदी: जयपुर के पास सुलगती बस में चीखती जिंदगियाँ, 3 की मौत, 12 झुलसे!
Jaipur/जयपुर के शाहपुरा इलाके में मंगलवार सुबह एक ऐसा मंजर सामने आया जिसने हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए। मजदूरों से भरी एक बस जब हाईटेंशन लाइन की चपेट में आई, तो देखते ही देखते वह आग के गोले में बदल गई। कुछ ही मिनटों में मासूम जिंदगियाँ धुएँ और लपटों में खो गईं। चीखों, आग और दौड़ते कदमों के बीच सड़क पर असहाय होकर लोग बस से बाहर निकलने की कोशिश करते रहे।टोडी गांव के पास, सुबह की धुंध में धधकती बस एक भयावह दृश्य बन चुकी थी। जो बस कुछ मिनट पहले जयपुर की ओर जा रही थी, वह अब राख और करंट के बीच जलता हुआ खौफ का प्रतीक बन चुकी थी। बताया जा रहा है कि बस उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से मजदूरों को लेकर जयपुर आ रही थी। कुल मिलाकर बस में 20 से अधिक लोग सवार थे।
हाईटेंशन तार से टकराई बस, धमाके से फैली आग!
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा सुबह करीब साढ़े सात बजे हुआ। बस जैसे ही टोडी गांव के पास की मोड़ पर पहुंची, उसका ऊपरी हिस्सा अचानक ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन से टकरा गया। टकराते ही चिंगारियाँ निकलीं और बस में करंट फैल गया। पलभर में पूरी बस में आग भड़क उठी। कुछ लोगों ने दरवाजे से छलांग लगाई, तो कुछ खिड़कियों से कूदे। मगर तीन यात्रियों के लिए अब बहुत देर हो चुकी थी। वे बुरी तरह झुलस चुके थे और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।12 अन्य यात्री गंभीर रूप से झुलस गए, जिन्हें तुरंत मनोहरपुर से एंबुलेंस द्वारा जयपुर के SMS अस्पताल भेजा गया। कुछ घायल इतने विचलित थे कि उनमें से कई को खुद पता नहीं था कि उनके परिवार के सदस्य ज़िंदा हैं या नहीं।
अफरा-तफरी और चीखों से गूँज उठा इलाका!
हादसे के बाद आसमान में काले धुएँ का गुबार फैल गया। स्थानीय ग्रामीण सबसे पहले मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किए। उन्होंने पानी डालकर आग पर काबू पाने की कोशिश की, लेकिन हाईटेंशन लाइन से करंट फैलने के डर के कारण कोई भी पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। इस बीच, आग बढ़ती गई और बस पूरी तरह जलकर खाक हो गई।“बस के अंदर से मदद की पुकारें गूँज रहीं थीं, मगर कोई कुछ नहीं कर पा रहा था,” एक चश्मदीद ने कहा।
“लोग आग में घिरे हुए थे और हम बेबस खड़े बस उन्हें देख रहे थे।”
प्रशासन हरकत में, कलेक्टर घटनास्थल रवाना!
हादसे की खबर मिलते ही जयपुर जिला कलेक्टर जितेंद्र सोनी तुरंत राहत और बचाव दल के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हुए। जिला पुलिस की विशेष टीमें और सिविल डिफेंस के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और राहत कार्य प्रारंभ किया। आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियाँ भी मौके पर पहुंचाई गईं। अचानक हुए इस हादसे ने प्रशासन को चौकन्ना कर दिया।कलेक्टर ने बताया, “प्राथमिकता घायलों के उपचार की है। जिनकी हालत गंभीर है, उन्हें जयपुर के SMS अस्पताल में विशेष चिकित्सकीय टीम की निगरानी में रखा गया है। अस्पताल प्रशासन को पहले से अलर्ट किया गया था ताकि किसी देरी के बिना इलाज शुरू किया जा सके।”
घायलों की हालत नाजुक, अस्पताल में मचा हाहाकार!
SMS अस्पताल में जैसे ही घायलों को लाया गया, वहां अफरा-तफरी मच गई। स्वास्थ्यकर्मी तुरंत एक्शन में आए और बर्न यूनिट को तैयार किया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, 12 में से 5 की हालत बेहद गंभीर है। कई मरीजों के शरीर का 60 प्रतिशत हिस्सा जल गया है। अस्पताल प्रशासन ने परिजनों से पहचान कराने की अपील की है क्योंकि कुछ घायलों की हालत ऐसी है कि उनकी पहचान मुश्किल हो रही है।
पीलीभीत के मजदूरों का सपना राख में बदला!
हादसे में झुलसे ज्यादातर मजदूर उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से जयपुर किसी निर्माण कंपनी में काम करने जा रहे थे। वे बेहतर रोज़ी-रोटी की तलाश में सफर कर रहे थे, लेकिन यह यात्रा उनकी जिंदगी की आखिरी साबित हुई। गांव में जैसे ही यह समाचार पहुँचा, घरों में मातम छा गया। बच्चों की चीखें और परिजनों की सिसकियाँ उस दर्द को बयान कर रही हैं जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।“वो तो बस दो महीने बाद घर आने का वादा करके गया था,” एक पीड़ित की पत्नी फूट-फूट कर रोते हुए बोली। “मुझे नहीं पता था कि अब वो राख बनकर लौटेगा।”
15 दिन पहले जैसलमेर में भी हुआ था हादसा!
राजस्थान में 15 दिन पहले जैसलमेर में भी एक भयंकर सड़क हादसा हुआ था, जिसमें कई लोगों की मौत हुई थी। अब शाहपुरा की इस दुर्घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सड़क सुरक्षा मानकों और विद्युत लाइनों की नियमित निरीक्षण व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों है। हाईटेंशन लाइनें कम ऊंचाई पर लटकी रहती हैं, जिससे ऐसे हादसे बार-बार घट रहे हैं।
जांच के आदेश, दुख व्यक्त किया गया!
प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि सड़क के किनारे से गुज़र रही हाईटेंशन लाइन की ऊँचाई पर्याप्त नहीं थी। जिला कलेक्टर ने बिजली विभाग से इस पर विस्तृत रिपोर्ट माँगी है। वहीं, मुख्यमंत्री ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।जयपुर की सुबह उस दिन धुएँ, चीखों और जलती बस की राख से भर गई थी। तीन जिंदगियाँ बुझ गईं, बारह अब भी ज़िंदगी और मौत के बीच झूल रही हैं। सड़क पर पिघली हुई बस की खिड़कियों और जली हुई सीटों के बीच सिर्फ एक सवाल गूंजता रह गया—क्या इन हादसों से हम कभी सबक लेंगे?













