बेलसोंडा की बेटी मेघना बनी ‘यंग साइंटिस्ट इंडिया’ की धड़कन – मिनी माता की तर्ज पर प्रदेश का परचम लहराने चेन्नई रवाना”
Mahasamund/छत्तीसगढ़ की धरती एक बार फिर गौरवान्वित हुई है। शिक्षा और नवाचार की नई किरण लेकर महासमुंद जिले के बेलसोंडा की बेटी कुमारी मेघना चंद्राकर ने अपने हौसलों से वह मुकाम हासिल किया है, जिसकी कल्पना करना भी कठिन होता है। SPACE KIDS INDIA, ATL INNOVATION MISSION और MARATHON INDIA के संयुक्त तत्वावधान में चेन्नई में 27 से 29 अगस्त तक आयोजित “यंग साइंटिस्ट इंडिया” कार्यक्रम में मेघना का चयन हुआ है।
यह कोई साधारण चयन नहीं, बल्कि विज्ञान की दुनिया में वह ऐतिहासिक क्षण है जब छत्तीसगढ़ के दस प्रतिभाशाली विद्यार्थियों में से तीन महासमुंद जिले से पहुंचे हैं और उनमें से मेघना ने अपने अद्भुत प्रोजेक्ट से सबका ध्यान खींचा है।
“खोयले” और मिश्रित आचार बना विज्ञान का विषय!
जहाँ देशभर के बच्चे अंतरिक्ष, रोबोटिक्स और तकनीक की खोजों के साथ मंच पर उतर रहे हैं, वहीं मेघना ने छत्तीसगढ़ की परंपरा और स्वाद को विज्ञान के साथ जोड़ने की अनूठी पहल की है। उनका प्रोजेक्ट है – फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में “खोयले” और मिश्रित
आचार व्यंजन!
मेघना इस प्रोजेक्ट के माध्यम से यह साबित करने जा रही हैं कि लोकल फूड केवल संस्कृति का हिस्सा नहीं, बल्कि भविष्य की वैज्ञानिक दिशा भी हो सकता है।
शिक्षक और पंचायत का आशीर्वाद!
इस सफलता के पीछे मेघना के संकुल केंद्र बेलसोंडा (HSS बेलसोंडा) के पूरे शिक्षक परिवार का योगदान है।प्राचार्य शोभा सिंहदेव ने अपने नेतृत्व से मेघना को हर कदम पर मार्गदर्शन दिया, वहीं व्याख्याता जगदीश सिन्हा ने प्रोजेक्ट की तकनीकी तैयारी और प्रस्तुति पर विशेष ध्यान दिया।
यही नहीं, मेघना का यह सफर पंचायत परिवार के लिए भी गर्व का पल है। वे बेलसोंडा की पूर्व सरपंच भामिनी पोखन चंद्राकर की बेटी हैं। गांव की मिट्टी से निकली यह प्रतिभा आज पूरे प्रदेश का मान बढ़ाने रवाना हो रही है।
“मिनी माता” की छवि में मेघना!
मेघना को उनके गांव और संकुल केंद्र में पहले से ही मिनी माता की उपाधि से पुकारा जाता है।यह नाम केवल संयोग नहीं है, बल्कि उनके स्वभाव और कर्म का प्रमाण है।सामाजिक सरोकारों से जुड़ाव और विज्ञान की ओर झुकाव – दोनों ने मिलकर उन्हें वह व्यक्तित्व दिया है, जो नई पीढ़ी की प्रेरणा बन रहा है।
कार्यक्रम का महत्व!
“यंग साइंटिस्ट इंडिया” का यह आयोजन पूरे देश के लिए एक ऐसा मंच है जहाँ विद्यार्थी न केवल अपनी खोज को प्रस्तुत करते हैं, बल्कि विज्ञान और नवाचार की वैश्विक दिशा से भी परिचित होते हैं।यहाँ देशभर से चुनिंदा बच्चे पहुँचते हैं और अपने प्रोजेक्ट से समाज, शिक्षा और तकनीक को नई