बेमेतरा में सनसनीखेज हादसा: कपड़ा व्यापारी के बिगड़े बेटे ने डिफेंडर से डेढ़ दर्जन लोगों को कुचला — एक की मौत, भीड़ ने घर को घेरा, उबाल पर शहर!
Bemetra /रविवार की शाम बेमेतरा शहर खून और चीखों से कांप उठा, जब स्थानीय थोक कपड़ा व्यापारी बंटी सलूजा का पुत्र क्रिस सलूजा अपनी तेज़ रफ्तार डिफेंडर गाड़ी लेकर सड़कों पर मौत बनकर दौड़ पड़ा। देखते ही देखते उसने करीब डेढ़ दर्जन लोगों को कुचल डाला। मौके पर जीवन राम साहू नामक एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दर्जनभर लोग अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं।
घटना इतनी भयावह थी कि सड़क पर गिरी चप्पलें, टूटे मोबाइल और खून से सनी मिट्टी इस निर्मम हादसे की गवाही दे रही थीं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि क्रिस सलूजा शराब के नशे में था और तेज रफ्तार में गाड़ी चलाते हुए अचानक भीड़ में घुस गया। कुछ लोगों का कहना है कि मृतकों की संख्या दो से तीन तक हो सकती है, लेकिन पुलिस ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
“लोग तड़पते रहे, गाड़ी नहीं रुकी!”
चश्मदीदों के मुताबिक हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई। घायल लोग सड़कों पर तड़प रहे थे, चीख-पुकार मची थी, लेकिन क्रिस सलूजा ने गाड़ी नहीं रोकी — वह तेज रफ्तार से निकल गया और सीधे अपने घर जा छिपा। गुस्साई भीड़ ने जब व्यापारी के घर का रुख किया तो वहां नया बवाल खड़ा हो गया।
“सबको निपटा दूंगा!” — व्यापारी की धमकी से भड़की भीड़!
बताया जा रहा है कि जब स्थानीय लोग आरोपी के घर पहुंचे तो उसके पिता बंटी सलूजा, जो शहर के नामी कपड़ा व्यापारी हैं, न केवल बदतमीजी पर उतर आए, बल्कि लोगों को धमकाते हुए कहा —
“किसी को ज्यादा बोलने की ज़रूरत नहीं… सबको निपटा दूंगा!”
यह सुनते ही भीड़ आक्रोशित हो उठी। पथराव शुरू हो गया, और गुस्से में लोगों ने सलूजा परिवार के घर के बाहर जमकर तोड़फोड़ कर दी। खिड़कियों के शीशे टूट गए, गाड़ियों के टायर फाड़ दिए गए, और पूरा मोहल्ला पुलिस-सायरनों की आवाज़ से गूंज उठा।
पुलिस पर लापरवाही के आरोप!
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हादसे के बाद जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो उसने आरोपी को गिरफ्तार करने के बजाय सुरक्षित घर तक छोड़ दिया। यही बात आग में घी का काम कर गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि “अगर कोई आम आदमी होता तो अब तक जेल में होता, लेकिन व्यापारी का बेटा होने के कारण पुलिस नरमी दिखा रही है।”
भीड़ रात भर व्यापारी के घर के बाहर डटी रही और क्रिस सलूजा तथा उसके पिता की गिरफ्तारी की मांग करती रही। पुलिस बल को अतिरिक्त जवानों के साथ मौके पर तैनात किया गया, लेकिन तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा था।
अस्पतालों में अफरातफरी, लाशों के बीच मातम!
घायलों को आनन-फानन में जिला अस्पताल और रायपुर के मेकाहारा रेफर किया गया। कई लोगों की हालत नाज़ुक बताई जा रही है। अस्पताल परिसर में परिजनों की चीखें गूंज रही थीं — कोई बेटे का नाम पुकार रहा था, तो कोई अपने पिता का मोबाइल ढूंढ रहा था।
डॉक्टरों के मुताबिक घायलों में से चार की हालत बेहद गंभीर है। घटना के बाद पूरे शहर में शोक की लहर है। मृतक जीवन राम साहू के परिजन न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
प्रशासनिक चुप्पी और जनता का गुस्सा!
दिलचस्प यह है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। पुलिस अधिकारी केवल इतना कह रहे हैं कि मामले की जांच की जा रही है।वहीं लोगों का कहना है कि अगर आरोपी को तुरंत गिरफ्तार नहीं किया गया, तो वे शहर बंद का आह्वान करेंगे।
एक स्थानीय व्यापारी ने कहा —
“जिस शहर में अमीरों के बच्चे कानून को रौंद कर चले जाते हैं, वहां गरीबों की जान की कीमत क्या है?”
“इंसाफ चाहिए!” — सड़कों पर उतरे लोग!
रविवार देर रात तक बेमेतरा की सड़कों पर भीड़ जमा रही। “इंसाफ चाहिए! क्रिस सलूजा को गिरफ्तार करो!” के नारे गूंजते रहे। पुलिस ने हालात काबू में करने के लिए हल्का बल प्रयोग भी किया।हालांकि, लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। कई संगठनों ने सोमवार को शहर बंद का आह्वान करने की चेतावनी दी है।
पुलिस का दावा — “आरोपी की तलाश जारी”!
पुलिस सूत्रों के मुताबिक क्रिस सलूजा फरार हो चुका है। उस पर हत्या, लापरवाही से मौत और गंभीर लापरवाही के तहत मामला दर्ज किया गया है। बेमेतरा पुलिस ने रायपुर, दुर्ग और कवर्धा जिलों में टीम भेजी है।
बेमेतरा में तनावपूर्ण सन्नाटा!
समाचार लिखे जाने तक बेमेतरा शहर में तनावपूर्ण शांति बनी हुई थी। पुलिस चौक-चौराहों पर तैनात है, लेकिन माहौल बारूद की तरह गर्म है। हर गली-मोहल्ले में बस एक ही चर्चा है —
“क्या सलूजा परिवार को कानून छू पाएगा, या पैसा एक बार फिर इंसाफ को रौंद देगा?”
यह सवाल अब पूरे छत्तीसगढ़ के लोगों के दिल में गूंज रहा है…बेमेतरा की सड़कों पर बिखरा खून सिर्फ हादसा नहीं — एक चेतावनी है, कि जब रफ्तार और रुतबा मिल जाए, तो कानून भी अक्सर कुचल जाता है।













