प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था ICU में, साय सरकार के 22 महीनों में महासमुंद जिला अस्पताल बना बदहाली का प्रतीक-पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर!
भाजपा राज में कमीशनखोरी, घटिया दवाओं का बोलबाला, 575 पद खाली; मरीजों के लिए दवा, इलाज, उपकरण बना सब सपना!
Mahasamund/साय सरकार के 22 माह पूरे होते-होते प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था अपनी सबसे खराब हालत में पहुँच चुकी है। पूर्व संसदीय सचिव एवं पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने सरकार पर सीधा हमला बोला — “महासमुंद सहित पूरे छत्तीसगढ़ में सरकारी अस्पताल अब कमिशनखोरी और भ्रष्टाचार के केंद्र बन गए हैं। जिला अस्पताल सह मेडिकल कॉलेज की तस्वीर सबसे भयावह है, जहाँ 616 स्वीकृत पदों में से 575 पद अब भी खाली हैं, स्टाफ की भारी कमी से मरीज बेहाल हैं।
“कमिशन के फेर में अस्पतालों की स्थिति ICU में !
•जिला अस्पताल में जरूरी दवाओं की किल्लत!
•मरीजों को बाजार से महंगी दवाइयां खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है।
•स्टाफ की किल्लत इतनी कि मेडिकल कॉलेज का काम भी अस्पताल के सीमित कर्मचारियों से चलाया जा रहा है।
•सोनोग्राफी, एक्स-रे, सिटी स्कैन जैसी बुनियादी जांच के लिए गरीब मरीजों को निजी अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
•हाल ही में घटिया औषधि और उपकरणों की आपूर्ति की खबरें आईं, जिससे मरीजों के जीवन से खिलवाड़ हो रहा है।
भ्रष्टाचार एवं बदइंतजामी पर सवालपूर्व संसदीय सचिव!
चंद्राकर ने कहा, “साय सरकार गरीबों की जान के बदले सिर्फ कमीशन में रुचि दिखा रही है।”
•पिछले सप्ताह एक महिला मरीज का ऑपरेशन आधा- अधूरा छोड़ना पड़ा, क्योंकि ऑपरेशन थिएटर में शॉर्ट-सर्किट के चलते मशीने खराब हो गईं।
•वह मरीज ऑपरेशन की स्थिति में वापस वार्ड में शिफ्ट कर दी गई, जो मेडिकल प्रबंधन की विफलता को उजागर करता है।
•घटिया ब्लेड, कालातीत दवाएं, खराब उपकरण तक अस्पतालों में पहुँचाए जा रहे हैं, मरीजों की जिंदगी दांव पर।
कांग्रेस कार्यकाल की तुलना में गिरावट !
चंद्राकर के मुताबिक, “कांग्रेस शासन में 8 मेडिकल कॉलेज खुले!
• जिला अस्पताल मल्टी स्पेशलिटी बनाए गए और 1900 से ज्यादा वेलनेस सेंटर संचालित हुए।
•”हमर अस्पताल”, “हाट बाजार क्लिनिक”, “मोहल्ला क्लीनिक” जैसी योजनाएँ कांग्रेस काल में शुरू हुईं, जो अब बदहाल हैं।
•कांग्रेस शासनकाल में प्रदेश का स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर तीन गुना बेहतर हुआ, साय सरकार की अकर्मण्यता ने सिस्टम को जर्जर बना दिया।
575 खाली पद सरकार के लापरवाह रवैए की मिसाल!
•अस्पताल अधीक्षक, मेडिकल रिकॉर्ड अधिकारी, नर्स, डॉक्टर, टेक्नीशियन, वार्ड ब्वॉय, सफाई कर्मचारी—सभी पद खाली पड़े हैं, स्टाफ आकंड़ों में तब्दील हो चुका है।
•मरीजों की देखभाल, इलाज, जांच, दवा वितरण हर स्तर पर बाधाएँ।
•डॉक्टरों और नर्सों की भारी कमी, जरूरी उपकरणों का अभाव और सस्ती सामग्रियों की आपूर्ति के चलते जनता की जान से खिलवाड़।
जनता हलाकान, सरकार बेपरवाह !
•मरीजों को जांच के लिए प्राइवेट सेंटरों का रुख करना पड़ रहा, जिससे स्वास्थ्य सेवाएँ गरीबों की पहुँच से बाहर हो गई हैं।
•सरकारी अस्पतालों के बजाय सरकारी पैसे निजी दुकानों और क्लीनिकों को जा रहे हैं।
•सरकारी मशीनरी की निष्क्रियता मरीजों के दर्द की सबसे बड़ी वजह बन चुकी है।
अपेक्षित सुधार और सरकार की निष्क्रियता !
•चंद्राकर का कहना है कि सरकार को व्यवस्था सुधारने में कोई दिलचस्पी नहीं।
•सरकारी अस्पतालों में न स्टाफ बढ़ाया गया, न उपकरण, न दवाएं।
भ्रष्टाचार और कमिशन तंत्र के चलते मरीजों की जान जोखिम में—यह शासन के लिए सबसे बड़ा कलंक।
22 माह की साय सरकार में स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं।575 खाली पद, घटिया दवा और उपकरण की आपूर्ति, कमीशनखोरी; ये सब मिलकर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को आईसीयू में पहुँचा चुके हैं।पूर्व विधायक चंद्राकर की यह चेतावनी कि यदि तत्काल न सुधरे हालात तो गरीबों की जान से खिलवाड़ अब बहुत भारी पड़ सकता है।सवाल यही उठता है—क्या गरीबों के स्वास्थ्य का जिम्मा सरकार निभाएगी या सब कमिशन के हवाले रहेगा?













