“पुरी दर्शन के सफर में मौत का मंजर: राजनांदगांव में कार-ट्रक भिड़ंत, इंदौर के 6 युवकों की मौके पर मौत”
राजनांदगांव, बागनदी थाना क्षेत्र – शुक्रवार की सुबह पांच बजे, चिरचारी गांव के पास का वह दृश्य किसी फिल्मी हादसे से कम नहीं था। सन्नाटा चीरती हुई एक चीख और फिर मीलों दूर तक गूंजने वाली टक्कर की आवाज़। कुछ ही पलों में हंसी-खुशी से भरी एक यात्रा खामोशियों के सागर में डूब गई। इंदौर से सात युवकों का दल, भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए उड़ीसा के पुरी जा रहा था।उज्जैन में महाकाल के दर्शन कर वे आगे की यात्रा पर निकले थे, लेकिन किसे पता था कि यह सफर अधूरा रह जाएगा।
तेज रफ्तार बनी काल!
नागपुर से रायपुर जा रही सफेद रंग की आर्टिगा कार में सभी सवार थे। जैसे ही कार चिरचारी के मोड़ पर पहुंची, वह अचानक अपनी लेन छोड़कर दूसरी तरफ चली गई। सामने से आ रहा ट्रक किसी बेकाबू बवंडर की तरह उनसे टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। लोहे के टुकड़े सड़क पर बिखर गए और कई शव कार में फंसे रह गए। आसपास मौजूद ग्रामीणों का कहना था—”आवाज इतनी भयानक थी कि हम घर से भागकर बाहर आए, पर जो नजारा देखा, उससे रूह कांप उठी।”
छह की मौके पर मौत, एक जिंदगी से जंग!
हादसे में छह युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। मृतकों में इंदौर निवासी आकाश मोर्या (28), गोविंद (33), अमन राठौर (26), नितिन यादव (34), संजय केसरी सेठी और उड़ीसा निवासी बिरनिल शामिल हैं। एक अन्य मृतक की शिनाख्त अब तक नहीं हो पाई है। घायल युवक सागर यादव की हालत नाजुक बताई जा रही है।
चालक की झपकी से टूटा जीवन का पहिया!
एएसपी राहुल देव के अनुसार, प्रारंभिक जांच में चालक के झपकी लेने की आशंका जताई गई है। सुबह-सुबह लंबी यात्रा के कारण थकान ने शायद उसकी आंखों से नींद चुराई और कार ने नियंत्रण खो दिया। पहले डिवाइडर से टकराई और फिर सीधे सामने से आ रहे ट्रक से भिड़ गई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और दुर्घटना की जांच शुरू कर दी।
गांव में पसरा मातम!
चिरचारी के ग्रामीणों के लिए यह शनिवार का सवेरा किसी काले अध्याय से कम नहीं था। दुर्घटनास्थल पर फैले खून के धब्बे, टूटी हुई कार के हिस्से और चारों ओर पसरी गंध—सब कुछ इस बात का गवाह था कि पल भर की लापरवाही कैसे सात परिवारों को तबाह कर देती है। राहगीरों ने घायलों को बाहर निकालने के लिए कार के दरवाजे तोड़े। किसी ने पुलिस को फोन किया, तो कोई पानी की बोतल लेकर दौड़ा। लेकिन तब तक छह जिंदगियां हमेशा के लिए बुझ चुकी थीं।
धार्मिक यात्रा से मौत की यात्रा तक!
पीड़ितों के परिजन बताते हैं कि सभी युवक धार्मिक आस्था से प्रेरित होकर यात्रा पर निकले थे। उज्जैन में महाकाल के दर्शन के बाद उनका अगला पड़ाव पुरी था, जहां वे जगन्नाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करने वाले थे। लेकिन नियति ने उनकी राह में ऐसा मोड़ ला दिया, जिसने जीवन की डगर ही खत्म कर दी।
तेज रफ्तार का कहर—सिर्फ आंकड़े नहीं, कहानियां
राजनांदगांव पुलिस के मुताबिक, इस साल अब तक जिले में लगभग 40 से अधिक सड़क हादसे हो चुके हैं, जिनमें आधे से ज्यादा मामलों में वजह तेज रफ्तार और चालक की लापरवाही रही है। हर आंकड़ा अपने पीछे एक अधूरी कहानी, एक बिखरा परिवार छोड़ जाता है।
इंदौर शहर में मातम का माहौल!
इंदौर में जब हादसे की खबर पहुंची, तो मृतकों के घरों में कोहराम मच गया। किसी मां के हाथ से फोन गिर पड़ा, कोई पिता चीखते हुए जमीन पर बैठ गया, रिश्तेदार, दोस्त, पड़ोसी—सब अस्पताल और पुलिस स्टेशन की ओर दौड़ पड़े।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया!
घटना पर मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री ने गहरा शोक व्यक्त करते किया है। प्रशासन ने सड़क सुरक्षा उपायों को और सख्त करने का भरोसा दिलाया। वहीं, स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि इस क्षेत्र में ट्रैफिक कंट्रोल और सड़क के डिवाइडर की मरम्मत तुरंत की जाए, ताकि ऐसे हादसे फिर न हों।
सबक या सिर्फ खबर?
ऐसे हादसे हमें यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या हमारी सड़कों पर सिर्फ वाहन ही दौड़ रहे हैं या मौत भी उनके साथ कदम से कदम मिला रही है। तेज रफ्तार का रोमांच कुछ पलों का हो सकता है, लेकिन इसका अंजाम कई परिवारों की उम्र भर की पीड़ा बन जाता है।राजनांदगांव के उस मोड़ पर अब ट्रक और कार के निशान मिट चुके हैं, लेकिन ज़मीन पर लगे खून के दाग़ और टूटे कांच के टुकड़े अब भी उस सुबह की कहानी सुना रहे हैं—एक ऐसी कहानी, जिसमें भगवान के दर्शन का सपना, मौत के साये में विलीन हो गया।