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August 29, 2025 11:01 pm

“क्रिप्टो से क्रूड ऑयल तक: पाकिस्तान का नया खेल, अमेरिकी डॉलर से फिर भारत में आतंक का धुआं?”

“क्रिप्टो से क्रूड ऑयल तक: पाकिस्तान का नया खेल, अमेरिकी डॉलर से फिर भारत में आतंक का धुआं?”

वॉशिंगटन/नई दिल्ली/दक्षिण एशिया में एक पुराना खेल फिर से शुरू हो चुका है। वही चेहरे, वही चालें, वही झूठे वादे और वही नतीजे—खून, आतंक और विश्वासघात। चालीस साल पुराना वह पैटर्न, जिसने भारत को दशकों तक आतंकी हमलों से झुलसाया, एक बार फिर ज़िंदा हो उठा है। और इस बार खेल का मैदान और भी बड़ा है—क्रिप्टो करेंसी से लेकर क्रूड ऑयल तक। सवाल है, क्या पाकिस्तान अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल करके भारत में आतंक का नया तूफ़ान खड़ा करने जा रहा है?

40 साल पुराना खतरनाक पैटर्न – इतिहास खुद को दोहराता है!
1980 का दशक—अफगानिस्तान में सोवियत संघ के खिलाफ युद्ध के नाम पर पाकिस्तान ने अमेरिका से अरबों डॉलर की मदद हथियाई। उस वक्त आईएसआई ने उसी पैसे से अल-कायदा की नींव डाली, तालिबान को पाल-पोस कर तैयार किया और कश्मीर में आतंक की आग भड़काई।
2000 के दशक में, जॉर्ज बुश प्रशासन ने पाकिस्तान को “गैर-नाटो सहयोगी” का दर्जा दिया। बाहर से वॉशिंगटन के साथ हाथ मिलाए, और भीतर से तालिबान के साथ खड़े रहे। अमेरिकी सैनिक मारे जाते रहे, और पाकिस्तान आतंकियों को पनाह, ट्रेनिंग और हथियार देता रहा।

आज वही कहानी फिर से लिखी जा रही है। नाम बदले हैं, लेकिन किरदार और पटकथा वही हैं।

क्रिप्टो की गुप्त डील – ट्रंप कनेक्शन!
ताज़ा घटनाक्रम ने भारत की खुफिया एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप के करीबी गोल्फ पार्टनर स्टीव विटकॉफ के बेटे जैकरी विटकॉफ की क्रिप्टो कंपनी में पाकिस्तान ने निवेश किया है। इस कंपनी में ट्रंप के दोनों बेटे और दामाद भी हिस्सेदार हैं।

मई 2025—भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर। इसी दौरान जैकरी विटकॉफ इस्लामाबाद पहुंचे और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की। सवाल उठता है—क्या क्रिप्टो के बहाने कोई और सौदा पका? क्या यह वही “फाइनेंशियल ट्रैक” है, जिससे पाकिस्तान अपने प्रॉक्सी आतंक नेटवर्क को फंड देगा?

बलूचिस्तान का ‘तेल सपना’ – हकीकत या धोखा?
डोनाल्ड ट्रंप की नज़र बलूचिस्तान के तेल पर है। सपना—वहां से कच्चा तेल निकालकर भारत को बेचना। लेकिन ज़्यादातर रिपोर्ट बताती हैं कि वहां तेल की मात्रा बेहद सीमित है। साथ ही, जो तेल है, उसे निकालने में लागत इतनी होगी कि शायद उससे मिलने वाला तेल भी खर्च नहीं निकाल पाए।

ऊपर से बलूचिस्तान में पहले से चीन का भारी निवेश है। क्या बीजिंग पाकिस्तान को अमेरिका के साथ सौदा करने देगा? या फिर पाकिस्तान दोनों से झूठ बोलकर “डबल गेम” खेलेगा? इतिहास बताता है कि पाकिस्तान के लिए यह कोई नई बात नहीं।

CENTCOM और असीम मुनीर – खतरनाक समीकरण!
सबसे बड़ा अलार्म अमेरिका की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की अचानक पाकिस्तान से बढ़ती नज़दीकी है। हाल ही में CENTCOM के चीफ माइकल कुरिल्ला को पाकिस्तान का सर्वोच्च सैन्य सम्मान मिला। उनके रिटायरमेंट समारोह में पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर को खासतौर पर बुलाया गया।

CENTCOM के पास मिडिल ईस्ट के चरमपंथियों से जुड़ी संवेदनशील खुफिया जानकारियां हैं। आशंका है कि पाकिस्तान इन सूचनाओं का इस्तेमाल भारत के खिलाफ कर सकता है। भारत जानता है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के नाम पर दिया गया हर अमेरिकी फंड, अंततः पाकिस्तान के प्रॉक्सी आतंकी नेटवर्क तक पहुंचता है।

भारत के लिए खतरे की घंटी यह पूरा घटनाक्रम भारत के लिए कई मोर्चों पर खतरा पैदा करता है—

• फाइनेंशियल टेररिज़्म: क्रिप्टो के ज़रिए गुप्त फंडिंग।

• एनर्जी जियोपॉलिटिक्स: बलूचिस्तान तेल के बहाने सामरिक सौदे।

• सैन्य खुफिया: CENTCOM से मिली जानकारी का दुरुपयोग।

भारत के सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान इस बार आतंक को “हाइब्रिड वॉरफेयर” के नए रूप में पेश कर सकता है—जिसमें साइबर अटैक, सोशल मीडिया प्रोपेगेंडा और क्रिप्टो फंडिंग शामिल होगी।

पुराना दुश्मन, नया चेहरा!
पाकिस्तान की रणनीति हमेशा से दोहरी रही है—अमेरिका को साझेदार दिखाना, और आतंक को हथियार बनाना। 1980 और 2000 के दशक में यह स्क्रिप्ट भारत को गहरे घाव दे चुकी है। अब, क्रिप्टो और क्रूड के बहाने, वही खेल फिर से शुरू हो चुका है।

भारत के लिए यह सिर्फ कूटनीतिक चुनौती नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। सवाल यह नहीं कि पाकिस्तान क्या करेगा—सवाल यह है कि भारत तैयार है या नहीं।

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