March 4, 2026 9:40 am

नाड़ी देखते-देखते प्रशासन की नाड़ी चढ़ी: महासमुंद के प्रसिद्ध नाड़ी रोग विशेषज्ञ करोड़ों की संपत्ति बनाने वाले डॉक्टर के ऊपर हुई प्रशासनिक सर्जरी!

नाड़ी देखते-देखते प्रशासन की नाड़ी चढ़ी: महासमुंद के प्रसिद्ध नाड़ी रोग विशेषज्ञ करोड़ों की संपत्ति बनाने वाले डॉक्टर के ऊपर हुई प्रशासनिक सर्जरी!

Mahasamund/महासमुंद शांत शहर की सड़कों पर बुधवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब जिला प्रशासन की टीम ने कुम्हार पारा स्थित एक चर्चित क्लीनिक पर छापा मारा। लंबे समय से नाड़ी रोग विशेषज्ञ होने का दावा करने वाले डॉक्टर शेषनारायण गुप्ता का श्रीराम केयर क्लीनिक आखिरकार जिला कलेक्टर के आदेश पर सील कर दिया गया।जिला प्रशासन की इस कार्यवाही से अवैध क्लीनिक संचालन कर रहे झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानदारी पर हड़कंप मच गया।श्रीराम क्लीनिक की लगातार शिकायतें आ रही थी कि नाड़ी रोग के नाम से क्लीनिक लेकिन ईलाज अंग्रेजी दवाइयों का इनकी पूर्व में भी मयंक गुप्ता बेवाक बयान के संपादक द्वारा भी पत्र के माध्यम से शिकायत की जा चुकी है।जब इस मामले को लेकर खुलासा किया था शिकायत सीधे महासमुंद के जिलाधीश विनय कुमार लगेंह और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी महासमुंद तक पहुंची तो गंभीरता से संज्ञान लेते हुए कलेक्टर विनय लगेंह ने तत्काल जांच और कार्यवाही के निर्देश दिया।

कार्यवाही की पल-पल की कहानी!

सुबह नौ बजे ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर आई. नागेश्वर,डॉक्टर विकास चंद्राकर के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची। उन्हें साथ मिला तहसीलदार जुगल किशोर पटेल, जिला अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर घनश्याम चंद्राकर और नोडल अधिकारी छत्रपाल चंद्राकर का। मौके की स्थिति देखकर टीम के होश उड़ गए — एक साधारण मकान में ‘नाड़ी रोग विशेष उपचार केंद्र’ के नाम पर खुला यह क्लीनिक किसी मिनी मल्टी-सुपर हॉस्पिटल से कम नहीं था।मरीजों की लंबी कतार बाहर बैठी थी। क्लीनिक के बाहर बैठी एक युवती रिसीवर की तरह मरीजों के नाम दर्ज कर रही थी। अंदर जाते ही नाड़ी रोग विशेषज्ञ शेष नारायण गुप्ता मरीजों का “इलाज करते दिखे।

महासमुंद जिला के भोले-भाले लोगों को लूटने की फैक्ट्री!

बताया जाता है कि सैकड़ों मरीज रोजाना उनके पास आते है। हर मरीज से 1200 से 1500 रुपये की वसूली की जाती है । गांवों से आए गरीब लोग ठीक होने की उम्मीद में पैसे लुटाते रहे।जांच अधिकारियों से बात करने पर बताया गया कि डॉक्टर साहब कि डिग्री तो लेकिन इनके द्वारा नर्सिंग होम एक्ट पालन नहीं किया जा रहा है डिग्री भी जांच करने के बाद पता चलेगा सही है या फर्जी वह जांच का विषय है। बावजूद गुप्ता दावा करते कि वे नाड़ी परीक्षण से हर मर्ज का समाधान बता सकते हैं।जांच के दौरान जब टीम ने दस्तावेज मांगे, तो गुप्ता कोई वैध रजिस्ट्रेशन या मेडिकल काउंसिल का प्रमाण पत्र नहीं दिखा सके डॉक्टर का रूप धारण कर वे चिकित्सा अधिनियम का खुला उल्लंघन कर रहे थे। गुप्ता ये वही डॉक्टर है जिनके साथ कुछ महीनों पहले 7 लाख 50 लाख की नगद उनके ही घर पर हुई थी उनके पास इतना सारा पैसा कहां से आया क्या उसकी डिटेल अभी विभाग को प्रस्तुत की।

मरीज की मौत और सच का खुलासा!

सूत्रों से मिली जानकारी से यह पता चला कि गुप्ता की करतूतों का भांडा तब फूटा जब हंशी श्रीवास्तव नाम की 17 वर्षीय युवती की मौत उनके इलाज के दौरान हुई। अप्रैल 2022 की घटना से परिजन आज तक सिहर उठते हैं।हंशी श्रीवास्तव टीबी की मरीज थीं। सरकारी अस्पताल से उन्हें लगातार छह माह दवा लेने की सलाह दी गई थी। लेकिन झोलाछाप गुप्ता ने परिवार को भ्रमित किया कि “टीबी जैसी कोई बीमारी नहीं है, मैं इसे जड़ से खत्म कर दूंगा।”
दवाइयों की ओवरडोज ने युवती की हालत बिगाड़ दी और आखिर 30 अक्टूबर 2022 को उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि उसके शरीर में मात्र छह ग्राम ही ब्लड बचा था।परिजनों ने तब से लगातार न्याय की मांग की थी। आज वह न्याय का दिन आया, जब उसी क्लीनिक के दरवाजे पर ‘सील’ की मोहर लगी।

श्रीराम केयर क्लीनिक या मल्टी सुपर हॉस्पिटल?

प्रशासनिक टीम भी यह देखकर हैरान रह गई कि बिना लाइसेंस यह क्लीनिक किसी बड़े हॉस्पिटल की तरह संचालित हो रहा था।अंदर सभी प्रकार की आयुर्वेदि दवाइयों धड़ल्ले से रखी बिना परमिशन के रखी थी ।

पत्रकारो की सतर्कता से हुआ बड़ा खुलासा!

पत्रकार मयंक गुप्ता ने बताया, “जब मैंने कई मरीजों की शिकायतें सुनीं, तो पूरा मामला खंगालने का निश्चय किया। कई हफ्तों की जांच, वीडियो साक्ष्य और दस्तावेजों के बाद मैंने लिखित शिकायत जिलाधिकारी को भेजी।” उन्होंने कहा कि यह कार्यवाही प्रशासनिक तत्परता और मीडिया की सजगता का प्रतीक है।

जिलाधीश विनय लगेंह का सख्त संदेश!

जिला कलेक्टर विनय लगेंह ने कहा है कि जिला के लोगों के साथ स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। “कोई भी अवैध क्लीनिक, फर्जी डॉक्टर या बिना पंजीकरण वाला नर्सिंग होम जिले में संचालित नहीं हो सकेगा। सभी को लाइसेंस और योग्यता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने होंगे, अन्यथा कठोर कार्यवाही की जाएगी।”

महासमुंद की यह घटना पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी है। नाड़ी परीक्षण या आयुर्वेद के नाम पर ठगी करने वाले नकली डॉक्टर समाज के लिए खतरनाक हैं। लोग अब जागरूक हों — किसी भी चिकित्सक के पास जाने से पहले उसके पंजीकरण और योग्यता की जांच अवश्य करें।प्रशासन की इस निर्णायक कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि सतर्क नागरिक और जिम्मेदार प्रेस मिलकर किसी भी फर्जीवाड़े की नींव हिला सकते हैं।
और अब, कुम्हारपारा का वही क्लीनिक — जो सालों से लोगों के विश्वास को बेचता आया था — अब कानून के शिकंजे में है।

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